आदिकाल में किसी दूसरी पार्टी या चिन्ह से जीते विधायक और सांसदों को सत्ताधारी पार्टिया खरीदकर अपनी पार्टी में शामिल करना, बैमानी, अपराध व लोकतकन्त्र में नीचता मानी जाती थी,2014 के बाद चाणक्यनीति कहि जाने लगी है,
बड़े मठ मंदिरो में दान देने से अच्छा है अपने आस पास छोटे गांव देहात के मंदिरोंमें पूण्य दान करे। भगवान हर मंदिर में है। @INCIndia@narendramodi@myogiadityanath
@yadavakhilesh राम मंदिर आंदोलन में जिन लोगो ने गोली खाई,जो कार सेवक गोधरा कांड में चल दिये गये, मंदिर बनने के बाद उन्हें क्या मिला,कुछ नही,ना ट्रस्ट में जगह न मान न सम्मान,नकली राष्ट्र बादियो,ब हिदुत्व बादीयो ने ट्रस्ट ब मंदिर ब कब्ज़ा जमा लिया है,बस इससे उन सभी का असली चेहरा देश के सामने आगया
राम मंदिर आंदोलन में जिन लोगो ने गोली खाई,जो कार सेवक गोधरा कांड में चल दिये गये, मंदिर बनने के बाद उन्हें क्या मिला,कुछ नही,ना ट्रस्ट में जगह न मान न सम्मान,नकली राष्ट्र बादियो,ब हिदुत्व बादीयो ने ट्रस्ट ब मंदिर ब कब्ज़ा जमा लिया है,बस इससे उन सभी का असली चेहरा देश के सामने आगया
तब के घोसित आपातकाल से आज का अघोषित आपातकाल ज्यादा खतरनाक है।तब आपातकाल गगोसित हुआ क्योंकि सरकार को मीडिया,कानून,ओर न्यायपालिका अपने कब्जे में करनी थी,आज बिना आपातकाल घोसित किये बिना ही सब जेब मे है। @RahulGandhi@PMOIndia