लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन कानून और संविधान को सड़क के दबाव में बंधक बनाने की छूट किसी को नहीं मिलनी चाहिए।
हम जैसे आम लोगों की एक सीधी और दो-टूक बात: रोज़ सुबह उठकर अपनी दुकान खोलने, दफ्तर जाने, बच्चों की स्कूल फीस भरने और टैक्स चुकाने वाले एक आम हिंदुस्तानी की सबसे बड़ी ज़रूरत क्या होती है? अमन, शांति और देश की स्थिरता।
पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और खुले स्रोतों (OSINT) की कड़ियों को जोड़ें, तो एक अजीब सी हलचल दिखती है। 2 अक्टूबर के आसपास अलग-अलग संगठनों, विपक्षी गुटों और मंचों की लामबंदी तेज़ हो रही है। मुद्दे अलग दिखते हैं, चेहरे अलग दिखते हैं, लेकिन क्या यह सिर्फ एक आम प्रदर्शन है या इसके पीछे कोई गहरा, सुनियोजित तालमेल बन रहा है?
हम लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं। नीतियों से असहमति हो—खुलकर बोलिए। सरकार की आलोचना करनी हो—संसद से सड़क तक करिए। शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का संवैधानिक हक है।
लेकिन अगर विरोध की आड़ में सड़कों को बंधक बनाकर सामान्य जनजीवन ठप किया जाए, संस्थाओं और चुनाव प्रणाली के प्रति अविश्वास फैलाकर अव्यवस्था रची जाए, या विदेशी व संदिग्ध फंडिंग के सहारे देश को भीतर से अस्थिर करने का खेल खेला जाए। तो फिर सरकार की चुप्पी या नरमी को जनता क्षमा नहीं, लाचारी समझेगी।
प्रधानमंत्री जी, इतिहास गवाह है कि बार-बार की नरमी और अति-उदारता ने देश को किस मोड़ पर लाकर खड़ा किया था। इस बार 'पृथ्वीराज चौहान' बनने की भूल मत दोहराइए। राजनीतिक नफ़ा-नुकसान से ऊपर उठकर शासन की धमक दिखाइए।
जनता कोई तानाशाही या अंधाधुंध बल प्रयोग नहीं मांग रही। जनता सिर्फ 'संस्थागत दृढ़ता' मांगती है दूध का दूध, पानी का पानी, हर संदिग्ध समन्वय, हर अघोषित फंडिंग की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच हो।
कानून सर्वोपरि, जो शांति से बात रखे, उसकी सुरक्षा हो; लेकिन जो हिंसा, तोड़फोड़ या अराजकता फैलाए, उस पर कानून का ऐसा शिकंजा कसे कि दोबारा कोई व्यवस्था को चुनौती देने की हिम्मत न करे।
न भय, न पक्षपात, न कोई बेकसूर परेशान हो, और न ही कोई अपराधी अपनी राजनीतिक पहुंच के दम पर छूट पाए।
नेताओं को चुनना या बदलना जनता का अधिकार है, लेकिन मुट्ठी भर भीड़ के दबाव से देश के तंत्र को झुका देना लोकतंत्र नहीं, अराजकता है।
देश भाषणों से नहीं, संविधान और कानून के कड़ाई से पालन से चलता है।
राष्ट्र प्रथम। संविधान सर्वोपरि। कानून सबसे ऊपर।
जय हिंद। 🇮🇳
Menteri Koordinator Bidang Infrastruktur dan Pembangunan Kewilayahan yang juga Ketua Umum Partai Demokrat, Agus Harimurti Yudhoyono (AHY), memimpin secara langsung Forum Koordinasi Penanganan Permukiman Kumuh Terpadu di Gedung BJ Habibie BRIN, Jakarta Pusat, Senin (14/9).
Forum tersebut membahas penguatan kolaborasi lintas kementerian dan lembaga untuk mempercepat penataan kawasan kumuh secara terpadu.
#ahy #menkoinfrastruktur #forum
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