Praptyasha Theatre Institute is a dedicated socio-cultural organization committed to use the creative power of Indian theatre for the greater good of society.
एक समय की मशहूर बैडमिंटन स्टार ज्वाला गुट्टा आज मां बन चुकी हैं। मां बनने के बाद जब उन्हें पता चला कि सरकारी अस्पतालों में कितने छोटे-छोटे समय से पहले पैदा हुए और अनाथ बच्चे सिर्फ इसलिए जिंदगी और मौत के बीच फंसे हैं क्योंकि उनके लिए “माँ का दूध” ही नहीं है तो उन्होंने सिर्फ अफसोस नहीं किया कदम उठाया।
उन्होंने अपने बिजी टूर और ट्रेवल के बीच रोज़ चुपचाप दूध निकालकर स्टोर करना शुरू किया और कुछ ही समय में ये मात्रा 30 लीटर से भी ज़्यादा हो गई यानी 300 से ज्यादा फीड।
ये सारा दूध उन्होंने हैदराबाद के एक सरकारी अस्पताल के NICU में दान कर दिया जहां ऐसी ही कई नन्ही जानें थीं जिनकी मां नहीं थी या जिनकी माएं दूध नहीं बना पा रही थीं। डॉक्टरों के मुताबिक इस दूध से कई बच्चों का वज़न बढ़ा सांसें स्थिर हुई और चेहरों पर पहली बार सच वाला गुलाबी रंग लौटा।
मीडिया ने जब वजह पूछी तो ज्वाला ने बस इतना कहा जब तक मेरा दूध बना है मैं चाहती हूं कि कोई बच्चा भूखा न सोए। ज्वाला गुट्टा आप सिर्फ एक बैडमिंटन स्टार नहीं आप उन सभी बच्चों की दूसरी मां हैं
जिन्हें भगवान ने जिंदगी का नया मौका देने के लिए आपके रास्ते भेजा। आपको दिल से सलाम।
ब्रिटिश सरकार ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था का सर्वे करवाया था 1821-1836 के बीच!
ये ह�� William Adam report (Bengal presidency, 1836-38)👇
इसके अनुसार-
-बंगाल और बिहार में 1 लाख से ज़्यादा गुरुकुल/पाठशाला थे
-हर जगह शूद्रों की संख्या ज़्यादा थी
-शूद्र और दलित शिक्षक भी थे
अंबेडकर की सबसे आर्थेटिक जीवनी धनंजय कीर की ही मानी जाती है जिसकी एक प्रति अंबेडकर को भी उन्होंने दी थी
इसी में साफ-साफ लिखा है कि pende नमक उनके ब्राह्मण टीचर ने अंबेडकर को बीमार होने पर घर ले जाकर उनको कपड़े दिए
और उनके ब्राह्मण टीचर कृष्ण जी ने उनको अपना सरनेम दिया
अब इससे ज्यादा ऑथेंटिक प्रमाण कुछ नहीं हो सकता
फिर भी झूठ झूठ झूठ
क्योंकि अंबेडकरवाद का मतलब ही हो गया है पढ़ाईचोरी और झूठ
हिंदुओं के 16 संस्कार होते है , किंतु इसमें केवल कर्ण भेदन संस्कार की बात करूँगी, ये विज्ञान इतना गहन है जिसको भारत के ऋषियों ने सहस्त्र वर्ष पहले जान लिया था ,
गोरखनाथ जी के नाथ संप्रदाय में कनफटा योगी बहुत प्रसिद्ध हैं। आपने भी “कनफटा” शब्द सुना होगा , कान में छेद करने के पीछे बहुत गहरा विज्ञान है और इसमें कई ऐसे रहस्य छिपे हुए हैं, जिन्हें शायद आपने आज से पहले कभी नहीं सुना होगा।
प्राप्त्याशा रंगमंच के कलाकारों की रीवा रंगयात्रा
मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित रंग प्रयोग नाट्य समारोह देखने गए साथ ही आर्ट प्वाइंट में जाकर दादा सुधीर सिंह जी से भी मुलाकात की एवं कलाकृतियों का दर्शन किया।#praptyasha#kakalpur#rangmanch#ajay_dahiya