जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए बना COP पैट्रोल में इथनॉल मिलाने की सिफारिश करता है! इसलिए हर देश क्षमतानुसार 10-80% मिलाता है। भारत में जहरीली हवा से लाखों मरते हैं। फिरभी कुछ जड़ विरोध पर तुले हैं! बिजली निकाल कर दिए पानी से उपज कैसे होगी जैसी बातें करने वालों से और क्या आशा होगी?
@DevKshatriy@shivkant Brajil is using it from last 50 year or more ' Farmers are getting payment of Sugar cane due to this only Otherwise compare it from 15 year back ' this blending started during @incredibleindia
@Kapil_Jyani_ Brajil is using Ethnol from last 50 year & more ; farmers are receiving payment on time due to this only : you have right to say anything 🥸🥸😭
अब राजनीति से हटकर कुछ बात हमारे प्राचीन मनीषियों के प्राकृतिक ज्ञान और मौसम के पूर्वाभास और संकेतों की....
जैसे कि इस साल जामुन की बंपर बहार
इस साल बाजार में दिख रहे हैं।
इतने जामुन मैंने पिछले दो तीन दशकों में कभी नहीं देखे।
जहां भी देखिए जामुन के पेड़ों के नीचे जामुन के ढेर लगे हैं।
जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से लदे हुए हैं।
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
हमारे बुजुर्ग हमेशा कहते थे कि.....
"जिस गर्मी में जामुन ऐसे ढेरों गिरते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।"
बुजुर्गों का ये पारंपरिक ज्ञान वनस्पति शास्त्र के हिसाब से बिल्कुल सटीक है। विज्ञान में इस प्रक्रिया को "Masting" या "Stress Fruiting" कहते हैं।
पेड़ों के खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को "Suicide Fruiting" या "Bumper Crop" भी कहा जाता है।
विज्ञान इसके बारे में कहता है कि....
Survival Instinct यानी अस्तित्व की लड़ाई
जब पेड़ को जमीन के नीचे पानी की कमी महसूस होती है, तब पेड़ "Defense Mode" में चला जाता है। अपनी प्रजाति को जिंदा रखने के लिए पेड़ अपनी सारी ताकत फल बनाने में लगा देता है।
और नए पत्ते-टहनियों पर रोक लग जाती है।
ऐसे साल में पेड़ नई कोंपल निकालना बंद कर देता है।
ऊर्जा बचाकर सिर्फ जामुन का उत्पादन बढ़ाता है।
इसीलिए पिछले साल कम फल वाले पेड़ भी इस बार लदे हैं।
इस भविष्यवाणी और सूखे से रिश्ता देखें तो हमारे बड़े बूढ़ों का अनुभव सही है, क्योंकि पेड़ मौसम के बदलाव को पहले पहचान लेते हैं।
जामुन की जड़ 'Taproot' बहुत गहराई तक जाती है।
जब भूजल स्तर बहुत नीचे जाता है, तभी जड़ों को तनाव महसूस होता है।
ये तनाव ही आने वाले सूखे का संकेत है।
सीधी बात सी बात यह है कि,
जामुन का पेड़ आत्महत्या नहीं कर रहा, बल्कि खुद का बलिदान देकर अगली पीढ़ी को जन्म दे रहा है।
यहां हमारे पूर्वजों ज्ञान अनेकों पीढ़ियों का अनुभव और विज्ञान यहां एक बिंदु पर मिलते हैं।
इस साल जामुन का स्वाद लें, पर प्रकृति के इस 'सूखे' के संकेत को गंभीरता से देखें।
पानी संभलकर इस्तेमाल करें।।
नरेंद्र मोदी शानदार भाग्य लेकर आए हैं.
बनारस में जो रस है उसकी सबसे श्रेष्ठ अभिव्यक्ति उस्ताद बिसमिल्लाह खां की स्मृति में वहां संग्रहालय उनके ही युग में बन रहा है.
शादी हो या गम, बेटी विदा हो रही हो या बहू आ रही है, करोड़ों घरों में ऐसे तमाम अवसरों पर सुर बिखेरने वाले उस्ताद को नमन. उनके होठों से लगते ही बांस से बना साधारण वाद्य शास्त्रीय हो गया.
ये बात भी दर्ज हो कि बिसमिल्लाह खां को भारत रत्न वाजपेयी जी के समय दिया गया.
उस्ताद का सम्मान करने का सौभाग्य अच्छे नसीब वालों को ही मिलता है.
नगर निगम का आभार.
@HimanshuN_ias@SavitaaAnand77@ashoktiwaribjp@narendramodi
राजस्थान में सवर्ण (EWS) होना अपराध है? 😭
आज R-SET का नोटिफिकेशन आया है।
🔰 सुनील जाट : 50% अंक : योग्य 😎
🔰 अमित मीणा : 50% अंक : योग्य 😎
🔰 राहुल गुर्जर : 50% अंक : योग्य 😎
🔰 अंकित यादव : 50% अंक : योग्य 😎
🔰 रोहित शेखावत : 54. 90% अंक : अयोग्य 😭
हम इस बार चुप नहीं बैठेंगे... 🙏
अनुच्छेद-15
" सरकार किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति, नस्ल, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकती। "
वीडियो को सुने... प्रभावित छात्रों को आगे लाइए और नीतिगत परिवर्तन की इस मुहिम में सहयोग करें।
हमें 10 प्रभावित छात्र चाहिए... सवर्ण MLAs से सम्पर्क करके मुख्यमंत्री से मिलकर नीति में न्यायोचित सुधार करवाया जाएगा।🙏🙏🙏
सोशल मीडिया पर कुछ लोग नेहरू के इंडिया को मिस करते दिखे कि नेहरू ने क्या-क्या कर दिया था, कितने नए इंस्टीट्यूशन बनाए थे।
लेकिन उन इंस्टीट्यूशंस की सच्चाई देखें तो पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।
नेहरू एक विज़नरी थे..
उनका विज़न था — सोवियत रूस की नकल...
उनकी बौद्धिक खुराक थी फ़ैबियन सोशलिज़्म की जुगाली।
नेहरू ने सोवियत स्टाइल की सेंट्रलाइज़्ड कंट्रोल और प्लानिंग वाली इकोनॉमी की नकल की। शिक्षा में फ़ैबियन स्टाइल सोशलिस्ट इंडॉक्ट्रिनेशन का सहारा लिया।
नेहरू ने शैक्षणिक इंस्टीट्यूशन बनाए और उनमें वामपंथी सोच के बीज बो दिए।
आईआईटी बनाए, पर इंडस्ट्री नहीं लगने दी।
सरकारी इंडस्ट्री लगाई, उनमें ट्रेड यूनियन का कीड़ा लगा दिया।
नेहरू को क्लीन स्लेट मिली थी, वह उस पर कुछ भी लिख सकते थे, लेकिन उन्होंने उस पर एक छोटे अनपढ़ बच्चे की तरह टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें खींच दीं। नेहरू देश को जिस गलत रास्ते पर ले चले, उस पर देश कम से कम पचास साल बिना ब्रेक के चलता रहा।
नेहरूवाद वह कुत्ता है जिसने मातृभूमि की वेदी पर चढ़ाए हर प्रसाद को जूठा कर दिया। वह छिपकली है जो हर खीर की हांडी में गिरकर उसे ज़हरीला बना गई।
और अभी तो मैंने विभाजन, सैन्य नीति, सीमा की सुरक्षा और विदेश नीति जैसे विषयों को छुआ भी नहीं है। अभी तो बात हो रही है उन प्वाइंट्स की जो नेहरूवाद के मज़बूत स्तंभ गिने जाते हैं, नेहरू की उपलब्धियाँ गिनी जाती हैं।
नेहरू के आकलन के लिए आपको मोदी तक जाने की ज़रूरत ही नहीं है। ना ही नेहरू को मिलने वाली गालियों के लिए सोनिया और राहुल की करतूतों को ज़िम्मेदार ठहराने का स्कोप है।
नेहरू ने अपने जीवनकाल में अपने ही कर्मों से इतना अर्जित कर लिया है जो उन्हें अनंत काल तक गालियाँ पड़वाने के लिए पर्याप्त है।
अखिलेश यादव की बेटी के लिए शोसल मीडिया पर जो भद्दी पोस्ट हुई वह अक्षम्य है।
किन्तु उर्मिला बाजपेई के साथ सपाई गुंडों ने जो किया था अखिलेश यादव ने अब तक उसके लिए माफी नहीं मांगी है।
19 मार्च 2013...
जब उत्तर प्रदेश में सपा सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। इटावा जिले का संतोषपुर गांव और गांव के सम्मानित व्यक्ति शिव कुमार बाजपेई।
शिव कुमार बाजपेई की पत्नी उर्मिला बाजपेई घर में बैठी थीं। एकाएक 20-25 आदमी घर में घुसे, उन्हें लातों से मारा, बाल और पैर पकड़कर बाहर खींचा, मुंह पर कालिख पोती, गले में जूतों-चप्पलों की माला पहनाई और पूरे गांव में घुमाया। जब उन्होंने अपना चेहरा छुपाना चाहा तो उनके हाथ पीछे बांध दिए गए।
उर्मिला बाजपेई का दोष क्या था?
कोई दोष नहीं...
उनके पति शिव कुमार बाजपेई अपने पड़ोसी प्रदीप त्रिपाठी की जमानत के लिए भागदौड़ कर रहे थे। प्रदीप त्रिपाठी के बेटे के साथ राज बहादुर यादव की बेटी फरार हो गई थी। बेटा नहीं मिला तो पुलिस ने प्रदीप त्रिपाठी को उठाया, प्रताड़ित किया और जेल भेज दिया।
शिव कुमार बाजपेई के सिर्फ इसी "गुनाह" के कारण उनकी पत्नी के साथ यह सब हुआ। इसके बाद सपाई यादवों का झुंड पूरे गांव में घूमता रहा।
जो भी ब्राह्मण सामने मिलता, उसे पीटा जाता, गालियां दी जातीं और औरतों को घर से निकालकर नंगा घुमाने की धमकियां दी जातीं। गांव के अधिकांश ब्राह्मण परिवार घरों में बंद भय से कांप रहे थे।
कुछ युवक पुलिस स्टेशन पहुंचे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। करीब 7 घंटे बाद IG के आदेश पर गांव में PAC तैनात हुई और तब जाकर अत्याचार रुका। लेकिन रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई।
उल्टा पीड़ितों को सांत्वना देने पहुंचे ब्राह्मण सभा और परशुराम सेना के पदाधिकारियों समेत एक दर्जन से अधिक लोगों को जेल भेज दिया गया कि इनसे शांति भंग का अंदेशा है।
पीड़ितों का प्रतिनिधिमंडल लखनऊ पहुंचा और मंत्री अभिषेक मिश्र से मिला। घटना से अवगत होने के बावजूद उन्होंने यह कहकर लौटा दिया कि यह मुख्यमंत्री के जिले का मामला है, मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता।
वही अभिषेक मिश्र आज भी सपा में हैं। माता प्रसाद पाण्डेय, पवन पाण्डेय और संतोष पाण्डेय जैसे लोग भी ब्राह्मणों से वोट मांगते हैं।
हम यूरोप से हर मायने में बेहतर हैं।
यूरोप भारत के दुश्मन देशों को हथियार बेचता है, वो हथियार भारत के खिलाफ इस्तेमाल होते हैं।
लेकिन हमने कभी भी यूरोपीय देशों के खिलाफ कोई साजिश नहीं की।
इसलिए यूरोपीय देश भारत से सवाल न ही पूछे तो बेहतर है।
: एस जयशंकर, विदेश मंत्री