सवर्ण इतिहासकार पहले लिखते थे बताते थे और सिखाते थे
की आर्यों का आगमन 1500 BC के आसपास हुआ है.
जब आर्यों के आगमन 1500 BC के आसपास हुआ तो संस्कृत भाषा प्राचीन भाषा कैसे हुई ?
क्या 1500 BC से पहले भारत के लोग गूंगे थे, क्या 1500 BC से पहले भारत के लोग कोई भाषा नही बोलते थे ?
गजब इतिहास पढ़ाया जा रहा है ?
भारत की प्राचीन भाषा प्राकृत, पाली और द्रविड़ियन तमिल भाषा है.
संस्कृत भाषा का कोई भूगोल नही. कोई अखबार नही. कोई बोलने लिखने वाला नही. किसी वर्ग विशेष की भाषा कभी सबकी नही हो सकती.
हमरा पूर्वज की भाषा जो भी थी लेकिन संस्कृत नही थी. आज हमरी भाषा भोजपुरी है.
भारत के सबसे बड़े भाषा वैज्ञानिक और इतिहासकार आदरणीय डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह जी का कहना है,
छठ पूजा का उदभव नेपाल के तराई, बिहार के मगध और पूर्वी उत्तरप्रदेश के इलाकों में हुआ. यह वही क्षेत्र है जहां तथागत बुद्ध पैदल घुमा करते थे.
बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ, लुम्बिनी नेपाल के तराई में है. यह इलाका छठ पूजा का गढ़ है.
छठ पूजा को वैदिक धर्म से जोड़ा जाता है, जो कि गलत इतिहास है. वैदिक धर्म का शुरुआती विकास कुरू और पांचाल क्षेत्र में हुआ जो हरियाणा और पश्चिम उत्तरप्रदेश पड़ता है.
ओबीसी की जनसंख्या और योग्यता के अनुपात में उन्हें सरकारी नौकरियों और पदों में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। सरकारें लगातार ओबीसी, एससी, एसटी के पद खत्म कर रही हैं, जो घोर अन्याय है। साथियों अब न्याय की लड़ाई लड़नी होगी!
#OBC_SC_ST_के_पद_वापस_करो
मेजर ध्यानचंद कुशवाहा, विश्व हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में गिनती होती है।उनका जन्म प्रतागराज के कुशवाहा परिवार में हुआ था। उनकी जन्मतिथि 29 अगस्त को भारत में "राष्ट्रीय खेल दिवस" के रूप में मनाया जाता है। ये भारत रत्न के असली हकदार हैl
मेजर ध्यानचंद एक महान भारतीय हॉकी खिलाड़ी थे जिन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा और कौशल से दुनिया भर में ख्याति प्राप्त की। यहाँ कुछ और जानकारी है उनके बारे में:--
- जन्म: 29 अगस्त 1905, इलाहाबाद (अब प्रयागराज), उत्तर प्रदेश
- मृत्यु: 3 दिसंबर 1979, नई दिल्ली
- जाति: कुशवाहा
- खेल: हॉकी
- पदक: तीन बार ओलंपिक स्वर्ण पदक (1928, 1932, 1936)
- खेल शैली: ध्यानचंद को उनकी गति, दृष्टि, और गेंद को नियंत्रित करने की क्षमता के लिए जाना जाता था।
- पुरस्कार: 1956 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया
- विरासत: मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है, और उनकी उपलब्धियों ने भारतीय हॉकी को विश्व स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई।
जयंती पर नमन🙏
#मेजर_ध्यानचंद_कुशवाहा
ज़मीदार कुल का एक लड़का, गांव घर का कुल अंगार पहली बार का विधायक और पहला कुशवाहा मुख्यमंत्री का सफर।
आज उनकी पुण्यतिथि पर हमारा नमन रहेगा ।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री यशकायी सतीश कुमार सिंह जी की चौथी पुण्यतिथि पर नमन
यूपी के औरैया जिले के अजीतमल थाना के जैनपुर गांव में अजय कुशवाहा उम्र 18 साल की लाश नाले में मिली है ।
परिवार ने हत्या की आशंका जताई है @Uppolice@auraiyapolice मामले की जांच करके आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित करें।
सम्राट असोक ने केवल 84,000 स्तूप, चैत्य, बौद्ध विहार और शिलालेख नही बनवाया.
सम्राट असोक ने अखंड भारत का भी निर्माण किया. अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश कश्मीर आदि क्षेत्र मौर्य काल में अखंड भारत का का हिस्सा था.
मौर्य काल वो काल है जिसमें जाति पाती नही थी. संस्कृत या वैदिक सभ्यता नही थी. ना ही वर्ण अव्यवस्था थी.
मौर्य काल में गण व्यवस्था थी. मौर्य काल भारत का Golden Age काल है. जहां दूध की नदियां बहती थी, सभी को तलवार उठाने का समान अधिकार था.
जो कहते हैं कि जातिवाद मत फैलाइए उनके मुंह पर योगी जी का तमाचा।
गोपाल मिश्रा की हत्या को 5 दिन हुए हैं आरोपियों का एनकाऊंटर हो गया सहायता राशि मिल गई लेकिन एक बेटी प्रिया मौर्य उसके आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार भी नहीं किया गया।
वास्तविक जातिवाद तो योगी जी निभा रहे हैं
सम्राट अशोक अपने पूरे जीवनकाल के दौरान एक भी युद्ध में पराजित नहीं हुए।
हमारे महापुरूष सदैव से ही शिक्षा को बढ़ावा देते आए हैं सम्राट अशोक के ही समय में 23 विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई जिसमें तक्षशिला, नालन्दा, विक्रमशिला, कन्धार आदि विश्वविद्यालय प्रमुख है!
वहीं महात्मा ज्योतिबा फूले व माता सावित्री बाई फुले ने मिलकर 17 विद्यालय स्थापित किए ।
व नारी शिक्षा को बढ़ावा दिया
#सम्राट_अशोक_विजयादशमी
#सम्राट_अशोक
#महात्मा_ज्योतिबा_फूले
चाणक्य मौर्यों का नही बल्कि मनु महाराज का आदमी मालूम पड़ता है.
चाणक्य ने अर्थशास्त्र में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र के लिए अलग-अलग बस्तियों का विधान किया है.
क्या ऐसा था मौर्य काल ?
मौर्य काल में जाति वर्ण अव्यवस्था का विकास हुआ ही नही था.
मित्रों, चाणक्य नीति और चाणक्य की जातिवादी विचारधारा HINDU SAMAJ की एकता के लिए खतरा है.
अगर हमें HINDU SAMAJ में भाईचारा और एकता बनाए रखनी है तो जातिवादी वर्णवादी चाणक्य के दर्शन का विरोध होना चाहिए.
भारत माता की जय.
सम्राट अशोक विजयादशमी को बौद्ध धर्म के अनुयायी मनाते हैं क्योंकि इस दिन सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया था:
सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध में जीत हासिल करने के बाद बौद्ध धर्म अपनाया था.
कहते हैं कि विजयादशमी के दिन सम्राट अशोक ने दीक्षा ली थी.
उससे पहले के नौ दिनों तक पूरे राज्य में उत्सव चलते रहे.
बौद्ध इतिहास में तब से यह दिन अशोक विजयादशमी के रूप में मनाया जाने लगा.
धम्म दीक्षा लेने के बाद, अशोक ने हर तरफ़ बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया.
#सम्राट_अशोक_विजयादशमी
बाबा साहब ने तथागत गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक की विरासत को आगे बढ़ाते हुए आज के दिन ही अपने लाखों समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म में वापसी की थी
1956 में विजयादशमी 14 अक्टूबर को पड़ी थी। उस दिन बाबा साहेब डॉ भीमराव आम्बेडकर ने करीब 5 लाख लोगों के साथ नागपुर में ही बौद्ध धर्म अपना लिया था।
बाबा साहब ने जहां बौद्ध धम्म की दीक्षा ली, नागपुर की वह जगह आज दीक्षाभूमि के नाम से जानी जाती है, हम सब हर साल विजयादशमी के मौके पर उस दिन को याद करते हैं।
हर साल अशोक विजयादशमी के दिन हजारों लोग बौद्ध धर्म स्वीकार करते हैं।
सम्राट अशोक विजयादशमी की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
गिरा जहाँ पर खून वहां का,पत्थर-पत्थर जिन्दा है
जिस्म नहीं है मगर नाम का, अक्षर-अक्षर ज़िंदा है
जीवन में यह अमर कहानी,अक्षर-अक्षर गढ़ लेना
शौर्य कभी सो जाए तो,चंद्रगुप्त और सम्राट अशोक को पढ़ लेना...
#सम्राट_अशोक_विजयादशमी
अखंड भारत सम्राट असोक ने बनाया है. आज का भारत सम्राट असोक की ही देन है.
मौर्य साम्राज्य ने भारत को जोड़ने का काम किया. आठवीं शताब्दी के बाद भारत कमजोर होना शुरू हुआ, तब तक हिन्दू राजाओं का दौर आ चुका था.
मध्यकाल में हिन्दू राजा - महाराजाओं के शासनकाल में भारत छोटे छोटे रियासतों में बंट गया, कमजोर हो गया.
सवर्ण इतिहासकारों को सम्राट असोक समकालीन कोई हिन्दू राजा नजर नही आता है. यहां वे दो षड्यंत्र एक साथ रचते हैं.
1 - मौर्य काल में वर्ण अव्यवस्था थी
2 - सम्राट असोक क्रूर शासक थे
पहली बात : सम्राट असोक ने चार लिपियों में अभिलेख लिखवाए हैं. चारों में से किसी में वर्ण अव्यवस्था का उल्लेख नही मिलता.
मेगस्थनीज ने भी वर्ण अव्यवस्था का उल्लेख नही किया.
केवल चाणक्य ने वर्ण अव्यवस्था का उल्लेख किया है जो कि उस समय था ही नही.
असोकावादन मूलतः दिव्यावदान नामक मिथक कथाओं में सम्राट असोक को बदनाम किया गया है. भारत को छोड़कर दुनिया कहीं भी सम्राट असोक के नाम को बदनाम करने शैक्षणिक अभियान नही चलाया गया.
सम्राट असोक का जन्म मौर्यकालीन बौद्ध सभ्यता में हुआ था, वे बौद्ध थे इसी कारण उन्हें महन चरित्र को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.