भूल गए का बबुआ ???
समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में व्यापारी असुरक्षित थे, गुंडे और माफिया खुलेआम संरक्षण पाते थे, निवेशक उत्तर प्रदेश आने से डरते थे और कानून व्यवस्था बदहाली का प्रतीक बन चुकी थी।
आज उत्तर प्रदेश में कानून का राज है, माफिया पर कार्रवाई हो रही है, रिकॉर्ड निवेश आ रहा है और छोटे व्यापारियों को सुरक्षित माहौल मिल रहा है। यही कारण है कि प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
जो लोग वर्षों तक परिवारवाद, तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार की राजनीति करते रहे, उन्हें मेहनतकशों और छोटे व्यवसायों की चिंता चुनाव आते ही याद आती है।
उत्तर प्रदेश का भविष्य नारों से नहीं, सुशासन और विकास से बनेगा, और जनता यह फर्क अच्छी तरह समझती है।
जब आप एक के बाद एक गलत चीज उठा-उठाकर जोड़ते हुए कुछ खड़ा करना चाह रहे हैं, तो फिर आपका इंटेंट (इरादा) पता चलता है कि आप असल में क्या करना चाह रहे हैं।
वीडियो में यह साफ किया गया है कि सरकार या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी युवाओं को कॉकरोच नहीं कहा। लेकिन इस बयान को जानबूझकर सरकार के खिलाफ मोड़ दिया गया ताकि बेरोजगार युवाओं को भड़काकर एक झूठा राजनीतिक नैरेटिव और विरोध प्रदर्शन खड़ा किया जा सके।
पिछले एक दशक में राहुल गांधी और पूरे विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ शायद ही कोई आरोप छोड़ा हो।
कभी "चौकीदार चोर है" का नारा लगाया गया, कभी राफेल सौदे को घोटाला बताया गया। कभी कहा गया कि यह "अडानी-अंबानी की सरकार" है, तो कभी विदेशी रिपोर्टों, अंतरराष्ट्रीय विवादों और अपुष्ट आरोपों के सहारे मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की गई। हर चुनाव से पहले एक नया नैरेटिव गढ़ा गया, हर हार के बाद एक नया बहाना खोजा गया।
प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया, उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए व्यक्तिगत हमले किए गए, उनकी नीयत पर सवाल उठाए गए और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं तक को कठघरे में खड़ा किया गया। विपक्ष को भरोसा था कि लगातार झूठ बोलने से वह सच बन जाएगा।
लेकिन हुआ ठीक इसका उल्टा।
जितने आरोप देश के भीतर लगाए गए, उतना ही प्रधानमंत्री मोदी का कद दुनिया में बढ़ता गया। जिस व्यक्ति को विपक्ष देश में बदनाम करने में जुटा रहा, उसी नेता को दुनिया के बड़े-बड़े राष्ट्र सम्मानित करते रहे। आज तक 30 से अधिक देशों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च या प्रमुख राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। यह केवल किसी व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का सम्मान है।
विपक्ष ने सोचा था कि मोदी जी को अपमानित करके चुनाव जीत लेंगे।
उन्होंने सोचा कि झूठे आरोपों की बौछार से जनता का विश्वास तोड़ देंगे।
उन्होंने सोचा कि विदेशों की सुर्खियां भारत के मतदाताओं का फैसला बदल देंगी।
लेकिन भारत की जनता ने बार-बार उन्हें गलत साबित किया।
जनता ने देखा कि एक तरफ आरोपों की राजनीति है और दूसरी तरफ विकास की राजनीति।
एक तरफ नकारात्मकता है और दूसरी तरफ राष्ट्र निर्माण का संकल्प।
एक तरफ सत्ता पाने की बेचैनी है और दूसरी तरफ देश को आगे ले जाने का विजन।
इसलिए हर चुनाव में विपक्ष के आरोप कमजोर पड़ते गए और मोदी जी के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत होता गया।
सच्चाई यह है कि मोदी विरोध को ही अपनी राजनीति का आधार बनाने वालों के पास आज भी कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं है। दस साल से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन विपक्ष अभी तक यह तय नहीं कर पाया कि वह देश के लिए क्या करना चाहता है। उसकी पूरी राजनीति केवल "मोदी विरोध" तक सिमट कर रह गई है।
इतिहास गवाह है कि किसी नेता को बदनाम करके लोकप्रियता नहीं छीनी जा सकती, खासकर तब जब उसके पीछे जनता का विश्वास खड़ा हो।
राहुल गांधी और विपक्ष ने आरोप लगाने में एक दशक लगा दिया।
जनता ने हर चुनाव में एक पंक्ति में जवाब दे दिया।
झूठ के नैरेटिव बन सकते हैं, लेकिन जनादेश नहीं।
आज काशी की पावन धरा पर माननीय प्रदेश अध्यक्ष जी पंकज चौधरी जी ने नन्ही बिटिया से मुलाकात कर उसे भरपूर दुलार और आशीष दिया।
बेटी और माननीय अध्यक्ष जी के बीच का यह आत्मीय क्षण बेहद भावुक करने वाला और असीम सुकून देने वाला है। बेटियों का यही मुस्कुराता हुआ चेहरा हमारे समृद्ध भविष्य की पहचान है।
#BJPUP
#UttarPradesh
चुनाव नजदीक आते ही अखिलेश यादव जी को मंदिर, पूजा और भंडारे की याद आने लगती है।
जो नेता वर्षों तक खुद को पूजा-पाठ से दूर बताते रहे, जिनकी राजनीति तुष्टिकरण और वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमती रही, वे आज अचानक बड़े मंगल पर मंदिरों में हाजिरी लगाकर खुद को सनातन का हितैषी साबित करने में जुट गए हैं।
सनातन आस्था कोई चुनावी पोशाक नहीं है जिसे जरूरत पड़ने पर पहन लिया जाए और चुनाव खत्म होते ही उतार दिया जाए। हिंदू समाज दिखावे और अवसरवादी राजनीति के बीच का अंतर अच्छी तरह समझता है।
भगवान के दरबार में जाना अच्छी बात है। लेकिन आस्था का मूल्यांकन कैमरों के सामने बैठकर प्रसाद ग्रहण करने से नहीं, बल्कि वर्षों के आचरण, विचार और कार्यों से होता है।
हिंदू समाज को फुसलाने और भ्रमित करने की यह राजनीति अब ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है। जनता जानती है कि कौन आस्था के साथ खड़ा रहा और कौन चुनाव आते ही आस्था की चौखट पर पहुंच गया।
तुम्हारे इस ट्वीट की भाषा और बौखलाहट साफ बता रही है कि समाजवादी पार्टी में चल रही अंदरूनी टूट की खबरों ने तुम्हारी नींद उड़ा रखी है।
दूसरों की सीटों, एडवांस और भविष्य की चिंता छोड़ो । जब तुम्हारे अपने चाचा ही दिल्ली में बागी सांसदों की सूची लेकर सक्रिय हों और पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा हो, तब ऐसी घबराहट स्वाभाविक है।
राजभर जी पर व्यक्तिगत हमले करने से सच्चाई नहीं बदलने वाली। पहले यह बताओ कि तुम्हारी पार्टी के नेता और सांसद लगातार असहज क्यों दिखाई दे रहे हैं? जो व्यक्ति दूसरों के राजनीतिक भविष्य का हिसाब मांग रहा है, उसे पहले अपनी पार्टी के वर्तमान का हिसाब देना चाहिए।
यह गुस्सा राजभर जी पर नहीं है, बल्कि उस डर का परिणाम है जो सपा के भीतर बढ़ती फूट और नेतृत्व पर उठ रहे सवालों से पैदा हुआ है। राजनीति में जब जमीन खिसकने लगती है, तब तर्क कम और तिलमिलाहट ज्यादा दिखाई देती है।
राजभर जी की बातों से इतनी बेचैनी क्यों? तुम्हारे pist का हर शब्द इस आशंका को उजागर कर रहा है कि कहीं तुम्हारे अपने ही लोग तुम्हारा साथ न छोड़ दें। दूसरों पर कीचड़ उछालकर अपनी कमजोरियां नहीं छिपाई जा सकतीं।
पहले अपनी बिखरती हुई टीम को संभलो फिर दूसरों की राजनीति का लेखा-जोखा मांगना ।
12 साल बाद दोबारा तेरी अखियां का वह काजल सपना चौधरी ने फिर से स्टेज पर आग लगा दी है!
इन दिनों सपना चौधरी की शादी टूटने के कगार पर है इन्होंने अपने पति पर डोमेस्टिक वायलेंस का केस लगाया है