अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद - न अफ़सोस, न माफ़ी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है।
उनके शब्द पढ़िए: “अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें।” कोई उल्लंघन “बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
एक आज़ाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा। लेकिन हमारे Compromised PM? चुप। एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं, और आदेश मान लेते हैं।
Compromised PM देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेगा - क्योंकि जो देश का अपमान करते हैं, वो उन्हीं के वश में हैं।
नफ़रत पर ज्ञान दे रहे हैं,जिन्होंने वर्षों तक लोगों को मुद्दों से हटाकर लोगों के खिलाफ खड़ा किया।जिनके स्टूडियो सालों से समाज को खाँचों में बाँटकर बहसें बेचते रहे हैं|
क्या विडंबना है?
जब शिक्षा, पेपर लीक और युवाओं की बात हैं, तो उसे नफ़रत कहा जा रहा है।
अमेरिका ने हमारे 3 नागरिकों को मार डाला
और आधिकारिक बयान का लब्बोलुआब ये है कि तुम कुछ नही उखाड़ सकते, हम फिर से मारेंगे।
डरपोक प्रधानमंत्री जी... लानत है!!
Deeply shocking to read this official US statement, which contains absolutely no expression of regret or condolence for the loss of innocent Indian lives. How can a “friend” and strategic partner be so deeply insensitive?
Why couldn’t a non-compliant commercial vessel have been stopped using other, non-lethal means? Is it not possible to disable a ship's propulsion or steering without firing missiles targeted to kill civilian crew members?
Practically every merchant ship navigating these crucial waters has Indian crew on board. Are they all considered fair game for US missiles now?
This approach is unacceptable and I hope @DrSJaishankar had said so to @marcorubio.
जो बेशर्म फट्टू दलाल, ट्रंप के डर से हगना और मूतना भी छोड़ देता है।
वो बेशर्म फट्टू दलाल अपनी भांड मीडिया में प्रोपेगैंडा चला रहा है,
अपने 56 इंची पिछवाड़े से तोप का गोला छोड़ने की।
😆😆😆
@narendramodi@News18India
कई साथियों ने INDIA गठबंधन की बैठक में मेरे भाषण का हिंदी अनुवाद मांगा था - यह रहा, ज़रूर सुनें।
8 जून को INDIA गठबंधन की बैठक में 20 से भी ज़्यादा नेताओं के भाषणों और बातों को सुनने के बाद आखिर में मैंने इस भाषण से उन्हें संबोधित किया।
जब भारत की सोच, देश की आत्मा पर संकट हो... जब संस्थाओं पर कब्ज़ा हो... जब जनता की आवाज़ दबाई जाए...तब सिर्फ़ एकता के साथ प्रतिरोध काम आता है।
मैं फिर से कह रहा हूँ - 2024 का चुनाव हम हारे नहीं थे और 2029 का चुनाव हम जीत चुके हैं।
हम एकजुट रहेंगे, जन-जन को संगठित करेंगे और प्रतिरोध की ताकत से BJP और उसके भारत के संस्थानों पर कब्ज़े को हराएंगे।
https://t.co/JkKgow6pi7
अमरीका ने चार दिन में हिंदुस्तान के तीन जहाज़ों पर हमला किया, बिना चेतावनी दिए, और हमारे कई नागरिकों को मार दिया। फिर भी मोदी सरकार चुप्पी साधे हुए हैं!
असम में वायुसेना की विमान दुर्घटना में हमारे पाँच वीर जवानों के शहीद होने का समाचार अत्यंत दुःखद है।
इस दुख की घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं शहीदों के शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। देश इन बहादुर जवानों का सर्वोच्च बलिदान हमेशा याद रखेगा।
एक लड़के ने बताया कि वह अपने परिवार को ट्रेन में बैठाने के लिए महाराष्ट्र के कल्याण रेलवे स्टेशन गया था। ट्रेन दोपहर 12 बजे की थी लेकिन बाद में बताया गया कि वह 2 बजे आएगी।
लड़के ने प्लेटफॉर्म टिकट ले लिया था और परिवार के साथ इंतजार करता रहा। लेकिन ट्रेन लगातार लेट होती रही। शाम करीब 5 बजे वह परिवार को ट्रेन में बैठाकर वापस जाने लगा
तभी टीटी ने उसे रोक लिया और प्लेटफॉर्म टिकट दिखाने को कहा। उसने टिकट दिखाया तो टीटी ने कहा कि प्लेटफॉर्म टिकट 2 घंटे बाद एक्सपायर हो जाता है। इसके बाद उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगा दिया!
वीडियो में लड़के ने सवाल उठाया कि जब ट्रेन रेलवे की वजह से कई घंटे लेट हुई थी तो उसके इंतजार की जिम्मेदारी कौन लेगा??
उसने कहा कि उसने परिवार को छोड़ने के लिए वैध प्लेटफॉर्म टिकट लिया था, फिर भी उसे जुर्माना भरना पड़ा!
ये भी सवाल जायज है कि जब देरी रेलवे की तरफ से हुई थी तो उसकी सजा यात्री को क्यों मिली..?
अभिनय सर,
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि ईरान को लेकर चलाई गई खबर का खंडन करने के लिए खुद ईरानी दूतावास को सामने आना पड़ा।
सोचिए, एक विदेशी दूतावास भारतीय मीडिया को पत्रकारिता का पाठ पढ़ा रहा है!
जब न्यूज़ रूम में तथ्य हार जाएँ और नैरेटिव जीत जाए, तब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मज़बूत नहीं, कमज़ोर होता है।
मीडिया को विशेषाधिकार नहीं, जवाबदेही चाहिए।
जनता अब सवाल पूछेगी।
जिस खबर का जवाब एंकर नहीं, विदेशी दूतावास दे रहा हो... वहाँ जनता को सवाल ज़रूर पूछने चाहिए।