उत्तर प्रदेश के ललितपुर के सिलावन गांव के रहने वाले विष्णु तिवारी को रेप और SC/ST एक्ट के मामले में करीब 20 साल जेल में ��हने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। विष्णु तिवारी के मुताबिक, साल 2000 में जमीन के विवाद को लेकर पड़ोसी परिवार से झगड़ा हुआ था। इसके बाद उन पर मारपीट, SC/ST एक्ट और पड़ोसी की बहू से रेप का मुकदमा दर्ज कराया गया। वर्ष 2003 में ललितपुर की अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसके बाद उन्हें आगरा सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
विष्णु तिवारी का दावा है कि मुकदमे के दौरान उनके परिवार की करीब 5 ए���ड़ जमीन बिक गई और परिवार पूरी तरह बिखर गया। जेल में रहने के दौरान उनके पिता की 2013 में मौत हो गई। इसके बाद 2014 में एक भाई और 2015 में मां की मौत हो गई। 2017 में एक और भाई की मौत हो गई। विष्णु तिवारी का कहना है कि वह 20 साल जेल में रहने के कारण अपने माता-पिता और भाइयों के अंतिम दर्शन तक नहीं कर सके और न ही उनकी अर्थी को कंधा दे पाए। एक भाई ��रिवार में लगातार हुई मौतों के बाद सदमे में मानसिक रूप से बीमार हो गया।
विष्णु के मामले में 2017 में एक NGO की टीम को जानकारी मिली, जिसके बाद एक वकील ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनका मुकदमा लड़ा। 28 जनवरी 2021 को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने दलील दी कि रेप का आरोप मेडिकल साक्ष्यों से पुष्ट नहीं होता और FIR भी घटना के तीन दिन बाद दर्ज हुई थी। हाईकोर्ट ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास समेत ��ामले के कई पहलुओं पर गौर करते हुए विष्णु तिवारी को दोषमुक्त कर दिया और उनकी रिहाई का आदेश दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 3 मार्च 2021 को विष्णु तिवारी को आगरा सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। करीब 20 साल बाद जब वह अपने गांव पहुंचे तो उनका पुश्तैनी घर जर्जर हालत में था और परिवार के अधिकांश सदस्य दुनिया में नहीं थे। रिहाई के बाद भी उन्हें रोजगार पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। विष्णु का कहना ह��� कि लोग उनके 20 साल जेल में रहने की बात जानने के बाद उन्हें काम पर रखने से बचते हैं और वह फिलहाल लखनऊ में खाना बनाने का काम कर रहे है।
विष्णु तिवारी का मामला लंबे समय तक जेल में रहने और बाद में अदालत से बरी होने के बाद उनके परिवार पर पड़े असर को लेकर चर्चा में रहा है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद वह जेल से तो बाहर आ गए, लेकिन उनके मुताबिक 20 साल की कैद के दौरान उनका परिवार और घर दोनों उजड़ चुके थे। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार को जांच के आदेश दिए थे और विष्णु तिवारी को मुआवजा देने की सिफारिश की थी।
When I met @ajeetbharti Sir recently, I told him:
“Sir, social media pe sab aapko communist samajhte hain. I think you should clear your stand that you’re not.”
He specifically said:
“Vedansh, ye log nahi hain. Ye BJP ke woh supporters hain jinko har BJP/Modi criticism leftist lagta hai.”
I asked him, “So should we try targeting BJP in the UP elections?”
He categorically said:
“Yaar, humari aapas ki ladai mein saala woh Akhilesh na jeet jaaye, mujhey bas ye dar hai, vo toh bolna bhi mushkil kr dega.”
But he has plans , bigger plans which ofcourse can't be tweeted, but trust him. He is more right wing than any of us!
Some things people may never say out loud, but I think you should know.
यूपी गोरखपुर में पत्रकार मनीष मिश्रा के छोटे भाई कार्तिकेय मिश्रा की अपराधियों ने नृशंस ह-त्या कर दी है
बताया जा रहा है कि कार्तिकेय मिश्रा के परिवार को सुरक्षा की जरूरत थी। पहले उनके परिवार के पास सुरक्षा थी, लेकिन बाद में उसे हटा लिया गया। पुलिस विभाग से सुरक्षा मुहैया कराने का अनुरोध भी किया गया, लेकिन आरोप है कि कोई कार्रवाई नहीं की गई। हमारी मांग है कि पुलिस आरोपियों क�� तुरंत गिरफ्तार करे, पीड़ित परिवार को सुरक्षा मिले और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
Blinkit is delivering ambulances. YouTubers are teaching children. Influencers are cleaning rivers and streets. Food creators are testing products and exposing food-safety failures.
So what exactly are citizens paying taxes for?
इन नीले आतंकियों ने सवर्ण समाज को खासकर राजपूत समाज को निशाने पर ले लिया है। बिहार में संतोष सिंह जी और आज अलीगढ़ में सचिन राजपूत जी के साथ हुई घटनाएँ इसका उदाहरण हैं।
अब भी समय है सवर्ण समाज आपस में न बंटे। एकजुट होकर अन्याय का मुकाबला करें।
🚨 Ajeet Bharti on the SC/ST case against him:
Even if I get bail or not, both outcomes are good for me. If I don’t get bail, I will go to the Supreme Court.
You can put me in jail for abusing someone but you can’t put me in jail for casteist abuse. I will not apologize.
The High Court has directed that admissions under the challenged reservation will remain subject to the final outcome of the case.
The matter raises important questions about reservation, constitutional limits and fairness in medical admissions.
#NEET#MBBS#Reservation
⚖️ 91% Reservation in UP Medical Colleges Under Court Scrutiny
The Allahabad High Court is examining the reservation policy followed for MBBS admissions in four government medical colleges — Ambedkar Nagar, Kannauj, Jalaun and Saharanpur.
The petitioners have challenged the reservation, arguing that it exceeds the 50% ceiling recognised in Supreme Court jurisprudence. They have also raised concerns about the State allegedly acting contrary to an earlier undertaking given before the Court.
But then why don’t BJP leaders and supporters conduct similar audits of government schools and hospitals in non-BJP-ruled states?
At the end of the day, better accountability and better public services will benefit the common man—who is giving tax to gov directly or indirectly.
Seeing the massive success and support for the #Schoolthikkro movement, I believe it’s time to start a similar “Fix Government Hospitals” movement.
People of this country at least deserve basic facilities in government schools and government hospitals.
And this responsibility shouldn’t be limited to the Cockroach Janta Party. Every citizen should question the government and demand accountability for basic public services.
Some people argue that the Cockroach Janta Party only conducts audits in BJP-ruled states.
ब्राह्मण परिवार की नाबालिग लड़की को शोषित वंचित पीड़ित वर्ग के लड़के अगवा करके ले गए हैं!
पिता प्रशासन से गुहार लगा लगाकर थक गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही!
अब इस घटना में जाति उलट होती, तो सारे नेता, पुलिस, सामाजिक न्याय कार्यकर्ता, यहाँ तक कि NHRC, NCW सब एक्टिव हो गए होते!
@gondapolice नाबालिग लड़की गायब है, ये केस आपको ज़रूर�� नहीं लग रहा??
प्रिय @bihar_police आप लोग नकारे तो हो ही, पर यह व्यक्ति स्पष्ट रूप से धमकी दे रहा है। इसको पहले पानी पिलाओ और चिकित्सा कराओ। हाँ, यदि @samrat4bjp ने इसी चूतिए को DGP मान लिया है, तो ठीक है। हम भी ऐसे लोगों को समेटना जानते हैं।
शर्मिष्ठा पनोली को मुहम्मद पर सच्चाई बोलने के आरोप में पुलिस ने उठा लिया, निशु आजाद रामजी, दुर्गा माता और रामायण को मिथक बताकर गालियाँ दे रही है फिर भी आज़ाद घूम रही है।
पोस्ट में एक तरफ शर्मिष्ठा को पुलिस गाड़ी में ��सीटते हुए दिखाया गया है, दूसरी तरफ निशु की तस्वीर फर्क साफ़ दिख रहा है कि किसके धर्म की भावनाएँ जल्दी आहत होती हैं।
यही है वोक सेकुलरिज्म का असली चेहरा हिन्दू देवताओं की बेइज्जती पर चुप्पी, इस्लाम पर सवाल उठाने पर तुरंत गिरफ्तारी। इस दोहरे मापदंड ने देश को खोखला कर दिया है।
मोदी एक्ट का चूतियापा हर पुलिसकर्मी को ऐसे अनपढ़ नेताओं के हाथों जलील होने को बाध्य कर दिया है। दिल्ली पुलिस भीड़ देख कर धाराएँ लगा रही है। @narendramodi अपने निकम्मे सांसदों, मंत्रियों से ‘औरामैक्सिंग’ के वीडियो चलवा रहे हैं, यहाँ पुलिस के लौवे लग रहे हैं।
बिहार पुलिस ने आज शिवम मिश्रा को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। उनपर आरोप है कि उन्होंने मुसलमानों के आदर्श मोहम्मद पर अभद्र टिप्पणियां की थी।
बिहार पुलिस रुद्र कुशवाहा और गोल्डन दास पर कार्रवाई कब करेगी? अगर एक बयान पर तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है, तो दूसरे मामलों में क्यों नहीं?
“मोदी एक्ट में फैक्ट नहीं चलता। इसमें सिर्फ़ दलितों की बातें चलती हैं; सही होने का लोड भी नहीं लेना है। 75% रुपया तो पुलिस कमीशन-वमीशन लेकर दिलवा देगी, बाद में फर्जी साबित हुआ तो कौन-सा मोदी जी की जेब से गया!”