जो खाकी कच्छे को तीली से सुलगा कर रखता है
जो राष्ट्रवाद के खोखले नारों के पीछे छुपे सत्ता की घृणित लालसा को पहचान लेता है
जो पुलिस के लाठी डंडे खाकर भी अपनी आवाज उठाता रहता है
जो मीडिया मालिकों और सरकारी पिस्सुओं की सांठ गांठ की पोल खोलता है
जो बूढ़े तानाशाह का कुर्ता खींचकर सवाल पूछता है
हर वो शख्स जो आजाद रहने का प्रयास करता है, वो सरकार की नजरों में दिमागी नक्सल है।
Thank you PM for NOT firing Pradhan ji two weeks ago.
It gave us enough time for:
1. The end of godi media
2. A million funny memes
3. A thousand pictures of courage
4. The rise of a dozen new young political leaders
5. “56 inch ka chhota bandar”