बिग ब्रेकिंग 🚨
महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी और मनसे की रैली🔥🔥
महाराष्ट्र में शिवसेना के उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपने समर्थकों के साथ एक बड़ी पब्लिक रैली की।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खुशी में यह पब्लिक रैली छत्रपति शिवाजी पार्क दादर में आयोजित की गई थी।
बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों पर FIR की जा रही है।
मैंने ये भी सुना है कि जो लड़कियां प्रोटेस्ट में गई थीं, उनके घर फोन कर उनके परिवार को धमकाया जा रहा है।
बच्चों के ऊपर पैलेट गन और AK-47 चलाई जा रही है- वो छात्र हैं, आतंकवादी नहीं।
: कांग्रेस महासचिव और सांसद @priyankagandhi जी
महिला - अब हमें उनका इस्तीफा लेना है जो पेट्रोल में एथनॉल मिला रहे है , क्या नाम है उनका .
पत्रकार - नितिन गडकरी
महिला - हा, नितिन गडकरी पेट्रोल में गन्ने का रस मिलते है । 😂
लगता है बहुत जल्द दूसरा इस्तीफा भी होने वाला है?
आज छात्रों को बहुत बड़ी जीत मिली है।
याद रहे, प्रदर्शन में जिन छात्रों पर घातक हमले हुए - किसी का हाथ टूटा, किसी का पैर, किसी की पसली, पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियार का इस्तेमाल किया गया, तो कई चोट खा कर critical हो गए - इन सबके सीधे ज़िम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं।
मांग साफ है, इस हमले के organisers से लेकर implementors तक, सभी की जवाबदेही तय हो और उनपर ऐसी कार्रवाई हो जो छात्रों को दिखे - तब जा कर होगा इंसाफ़।
अमित शाह जी, आपको जवाब तो देना ही पड़ेगा।
एक छात्र ने रोते हुए कहा —
“धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा काफ़ी नहीं है। हम चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी इस्तीफ़ा दें।
पुलिस ने हमें कितनी बेरहमी से पीटा, यह सिर्फ़ हम ही जानते हैं।”
युवाओं पर पुलिस की सख़्ती, फिर उन्हीं पर मुकदमे - यह दिखाता है कि सरकार ने असहमति का जवाब संवाद से नहीं, दमन से देने का रास्ता चुना है।
ऐसे समय में पूरा विपक्ष युवाओं की आवाज़ के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। यह संघर्ष केवल छात्रों का नहीं, बल्कि शिक्षा, जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का भी संघर्ष है।
''अमित शाह जवाब दो - लाठी का हिसाब दो''
विपक्ष के सांसदों ने छात्रों पर हुई लाठीचार्ज के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। मोदी सरकार को छात्रों पर किए गए जुल्मों का हिसाब देना होगा।
📍 संसद परिसर, दिल्ली
7 हत्याओं का आरोपी बिहार का मुख्यमंत्री सड़क छाप अपराधी है जिसने तमाम लोकतांत्रिक परंपराओं को त्याग देश में पहली बार प्रदर्शनकारी छात्रों पर AK-47 से गोली चलवाई है।
छात्रों से समझौते के बाद भी बिहार में हज़ारों छात्रों पर फर्जी केस दर्ज कर हिरासत में लिया जा रहा है, परिजनों को प्रताड़ित किया जा रहा है। अगर छात्रों को रिहा नहीं किया गया तो NDA सरकार को महंगा पड़ेगा।
छात्रों के ख़िलाफ़ पूरा का पूरा सिस्टम ही जानलेवा है।
खबर आ रही है कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर AK-47 से गोलियाँ चलाई गई हैं और सैकड़ों छात्रों को गिरफ़्तार करके उनपर FIR की जा रही है।
मोदी जी, कहाँ गया आपका वादा कि छात्रों पर कोई FIR नहीं की जाएगी और उन्हें रिहा कर दिया जाएगा? उल्टा उनपर घातक हमले और बर्बरता की जा रही है।
दिल्ली में छात्रों पर पेलेट गन चली और बिहार में AK-47। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार हो या दिल्ली - हर जगह पैटर्न एक ही है।
पहले भी कहा है, ये सरकार झूठी है। सुधार इनके बस का नहीं है। अपनी बातों से मुकर जाएगी और हर तरकीब से छात्रों की आवाज़ दबाएगी।
मोदी जी, देश के छात्रों से माफ़ी मांगिए। और जिन्होंने छात्रों पर हमला किया है, उन्हें कुचला है उनपर कार्रवाई कीजिए, छात्रों पर नहीं।
देखिए कैसे बिहार में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मी AK-47 से गोली चला रहा है? संपूर्ण देश में किसी भी छात्र प्रदर्शन में Police Manual का उल्लंघन कर AK-47 से गोली चलाने का यह प्रथम मामला है।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। अगर यही परिपाटी बनी तो आगे से प्रदर्शन करने वाले वकीलों पर, डॉक्टर्स पर, शिक्षकों पर, जजों पर, हक-अधिकार के लिए लड़ रहे छात्रों-युवाओं, महिलाओं और किसानों पर भी क्या बीजेपी सरकारें AK-47 से गोलियां चलवायेंगी?
कल को कोई भी पुलिसकर्मी किसी भी नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री पर भी कभी भी कहीं भी अकारण गोली चला सकता है? क्या ऐसे मामलों में सिर्फ गोली चलाने वाला ही दोषी होगा? उस जिले के SP और उच्च अधिकारियों को अविलंब सस्पेंड करना चाहिए? गृहमंत्री की जवाबदेही तय होनी चाहिए अन्यथा प्रदेश में अराजक स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। अपराधी प्रवृति के व्यक्ति को जनता ने बिहार का मुख्यमंत्री नहीं चुना था। यह Elected नहीं Selected CM है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत!
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद भी यह लड़ाई ख़त्म नहीं हुई है। इस युवा की बात ध्यान से सुनिए।
मुद्दा सिर्फ़ एक मंत्री का नहीं, बल्कि उस पूरी सोच का है जिसने BJP और RSS के शासन में शिक्षा व्यवस्था को लगातार संकट में धकेला। लाखों युवाओं को लगता है कि उनकी मेहनत, उनकी डिग्रियाँ और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। बंद होते सरकारी स्कूल, महँगी होती शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं पर उठते सवाल और बढ़ती बेरोज़गारी - युवा इन्हें भूलने वाले नहीं हैं।
अब देश का युवा डरकर चुप बैठने वाला नहीं है। वह सवाल भी पूछेगा, हिसाब भी माँगेगा और लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता को जवाबदेह भी बनाएगा। याद रखिए, जब युवा बदलाव का संकल्प ले लेते हैं, तब तानाशाही सत्ता का अहंकार भी ज़्यादा देर टिक नहीं पाता।
"मैं बिहार सरकार को चेतावनी देता हूं कि यदि कल तक आंदोलन के दौरान जिन लोगों पर FIR दर्ज की गई है, उन्हें वापस नहीं लिया गया, तो हम बड़ा आंदोलन करेंगे।"
~तेजस्वी जी
सम्राट जी, संभव हो तो बुद्धि ठीक कर लीजिए वरना इस बार आंदोलन का गवाह बिहार बनेगा!