समाचार पत्रों का विपक्ष के प्रति रवैया समझना हो, तो इस एक खबर को देख लीजिए।
खबर सिर्फ़ इतनी थी कि संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर एक नाटक किया।
लेकिन खबर का असर कम करने के लिए उसमें जोड़ दिया गया, "संतों ने इसे सनातन का अपमान बताया।"
दिलचस्प बात है। सनातन का अपमान तब नहीं हुआ, जब राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे। लेकिन उन आरोपों पर नाटक हुआ, तो सनातन का अपमान हो गया।
अब ज़रा इन "संतों" को भी देख लीजिए।
पहले हैं विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी। विहिप, भाजपा और आरएसएस के रिश्तों से कौन अनजान है?
दूसरे हैं अखिल भारतीय संत समिति के पदाधिकारी। यह भाजपा या आरएसएस की कोई औपचारिक इकाई नहीं है। लेकिन मुझे याद नहीं पड़ता कि इस संगठन ने किसी बड़े राजनीतिक या सामाजिक मुद्दे पर कभी ऐसा रुख़ लिया हो, जो आरएसएस की लाइन से अलग या उसके ख़िलाफ़ हो। इसके नेता अक्सर आरएसएस और भाजपा के नेताओं के साथ मंच साझा करते दिखाई देते हैं और उनके सार्वजनिक बयान भी प्रायः उसी वैचारिक दिशा में होते हैं।
इसलिए सवाल यह है कि यहाँ संत कौन है और राजनीति कौन कर रहा है?
और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि पत्रकारिता कौन कर रहा है?
आज के दौर में अख़बारों का एक बड़ा काम सिर्फ़ खबर छापना नहीं रह गया है। खबर की धार कुंद करना, उसके साथ सुविधाजनक प्रतिक्रियाएँ जोड़ देना, और सत्ता के लिए एक सुरक्षात्मक नैरेटिव खड़ा करना भी उनकी भूमिका का हिस्सा बनता जा रहा है।
शायद इसी को अलिखित सेंसरशिप का दौर कहते हैं। इसमें खबरें दबती नहीं हैं, बस इस तरह लिखी जाती हैं कि उनका असर ही खत्म हो जाए।
मोदी सरकार को यह समझना होगा कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने का फैसला करोड़ों भारतीयों की भावनाओं से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
नीला सिर्फ जर्सी का रंग नहीं, बल्कि भारतीय खिलाड़ियों के लिए उनका इमोशन है, खेलों से जुड़ी विरासत है।
हमारे खिलाड़ी विश्व भर में 'Men in Blue', 'The Blue Tigers' के नाम से जाने जाते हैं। ऐसे में सवाल है 👇
⦿ इस ऐतिहासिक पहचान को बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
⦿ मोदी सरकार साफ करे कि ये जरूरी फैसला बिना हॉकी इंडिया के Executive Board की जानकारी और सहमति के कैसे लिया गया?
मोदी सरकार खेल और खिलाड़ियों को अपने संकीर्ण राजनीतिक प्रयोग का जरिया न बनाए। ऐसी गंदी राजनीति न करे।
चंदा चोरी मुद्दे पर विपक्ष की क्रिएटिविटी बढ़ती जा रहा है!
संसद प्रांगण में दान पात्र, दानकर्ता, चंदा चोर… सारे पात्र जुटे! चंदा चोरी CCTV के साथ साथ मोबाईल कैमरे में भी क़ैद हुई। 😅
Video posted by @pandeypoonam20
If a Dalit owns $100 million, 1,000 acres of land, 5 Rolls-Royces, or lives in a $50 million mansion, they are still constitutionally entitled to reservation. Reservation is about historical and continuing social discrimination, not personal wealth.
Period.
दो ही ऑप्शन हैं 👇
1. गृह मंत्री ने छात्रों को मारने का ऑर्डर दिया: तो वह दोषी हैं
2. गृह मंत्री को मालूम नहीं था कि छात्रों पर फायरिंग होगी: तो वह incompetent हैं
गृह मंत्री संसद क्यों नहीं आ रहे हैं?
@RahulGandhi
नितिन गडकरी अब
(ऑन 27.06.2026)
“पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से मेरा कोई लेना देना नहीं”
नितिन गडकरी तब
(ऑन 14.06.2026)
“मेरे लिए आज ख़ुशी का दिन है कि कल रात 8 PM बजे, मैंने 100% इथेनॉल के इस्तेमाल को क़ानूनी तौर पर मंज़ूरी देने के लिए नियमों को फ़ाइनल करते हुए फ़ाइल पर साइन किए…”
माउंटेन ड्यू ऐड : डर सबको लगता है, गला सबका सूखता है
Video Courtesy @ANI
धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और भारत की बर्बाद education system के प्रतीक हैं और हमेशा रहेंगे।
उसी system ने 26 बच्चों की जान ली, और लाखों युवाओं को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया।
इस्तीफ़ा भी नैतिकता से नहीं - युवाओं के आक्रोश से डरकर देना पड़ा।
और आज उसी व्यक्ति को संसद में BJP माला पहना रही है। यह कोई सम्मान नहीं - लाखों बच्चों के भविष्य की बर्बादी का जश्न है।
देश का हर छात्र ये देख रहा है। और इसमें शामिल हर चेहरा याद रखेगा।
RSS ideologue advocates for mass slaughtering of students and also called for mass rape of women!
He said, “Women at Jantar Mantar won’t complain even if mass rape happens”
This is a sanskar and training of RSS!
यूपी की फैक्ट्रियों में गेहूं के साथ पत्थर की पिसाई: फैक्ट्री का ऑपरेटर बोला- 'मालिक ज्यादा मुनाफे के लिए आटे में सफेद पत्थर का चूरा मिलाते हैं', आटा देशभर में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बिक रहा; रिपोर्टर ने मजदूर बनकर आटे की फैक्ट्री में 25 दिन गुजारे, जानें कैसे एक्सपोज हुआ यह खेल
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लोकसभा में आज पेपर लीक से जुड़ा कानून आएगा। 10 साल सजा और 10 करोड़ रुपए जुर्माने का प्रावधान है !!
> UP में NDA के सहयोगी दलों के 2 विधायक पेपर लीक में फंसे हैं।
> 2006 में रेलवे ग्रुप D परीक्षा में निषाद पार्टी के विधायक विपुल दुबे का नाम आया था। विपुल पर गैंगस्टर एक्ट भी लगा है।
> OP राजभर की पार्टी के MLA बेदीराम के खिलाफ पेपर लीक के 8 केस दर्ज हैं।
> दोनों विधायकों पर कोर्ट में केस पेंडिंग हैं। नए कानून का ट्रायल इन्हीं दोनों से शुरू हो, तब शायद जनता का भरोसा और कायम हो...