कैप्टन योगेन्द्र सिंह ठाकुर को देश के प्रतिष्ठित वीरता सम्मान शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है
कैप्टन योगेंद्र हिमाचल,मंडी के जोगिंद्रनगर के रहने वाले हैं
राजपूतों में ज्यादा को ज्यादातर बदनाम किया जाता है की अहंकारी लोग हैं जातिवाद करता है लेकिन ऐसा नहीं है।
सबसे ज्यादा इनका बेड़ा गर्ग बॉलीवुड ने किया है जो विलेन के तौर पर दिखाकर,
राजपूतों में बहुत से राजपूत विश्वनाथ प्रताप सिंह और उमाशंकर सिंह जैसे भी होते हैं जो न्याय प्रिय है सबको साथ लेकर चलते हैं,
मैं अपने यहां का ही बता देता हूं मेरी दादी हमें बताती थी,
हमारे दादाजी तीन भाई थे दो लोग CRPF में और एक घर पर रहते थे मेरे दादाजी घर पर रहते हैं मेरे पिताजी सीआरपीएफ में पहली बार दादा जी के छोटे भाई का बलिया जिले में सीआरपीएफ की भर्ती चल रही थी उस टाइम हम लोग का परिवार बेहद गरीब था तो किसी गांव के लड़के के साथ गए और बहुत दुबले पतले थे लोग क्योंकि खाने को ढंग से मिलता नहीं था,
दादा जी का हाइट अच्छा था तो उनका सिलेक्शन हो गया लेकिन वजन कम हो रहा था सिलेक्टर्स ने बोला जो कुछ खा पी करो वजन हो जाएगा जितना चाहिए,
पैसे तो था नहीं उन लोगों के पास की कुछ खा कर वेट बढ़ा ले तो दादाजी बताते थे कि उस टाइम गुड़ लिया तीन-चार लीटर पानी पी गया तब जाकर उनका वेट हुआ और सिलेक्शन हो गया फिर घर आए तो ट्रेनिंग में जाने के लिए ₹200 चाहिए था गरीब परिवार था तो पैसे थे नहीं तो घर में पहले पीतल का बाटुला होता था पीतल का बर्तन उसको ले जा रहे थे बेचकर या गिरवी रखकर ₹200 लाने के लिए तभी एक रास्ते में राजपूत समाज के व्यक्ति दादा जी से मिलते हैं पूछते हैं कहां लेकर जा रहे हो तो उन्होंने बताया कि ऐसा ऐसा है वह बोले ले जाओ मत रखो गिरवी ना बेचो घर से आकर ले जाना₹200 में जब भाई ट्रेनिंग से आएगा लौटकर तब लौटा देना,
दादाजी वापस आ गए और उनके घर से ₹200 लाकर छोटे दादा जी को दिया तब जाकर वह ट्रेनिंग पर गए और 6 महीने बाद आए तब उनका पैसा रिटर्न किया छोटे वाले दादा जी के वजह से मेरे पिताजी का भी नौकरी लगा और एक और छोटे दादा जी का फिर उसके बाद परिवार गांव में संपन्न हो गया,
ऐसे भी नेक दिल भी राजपूत है हमारे यहां ऐसा कुछ नहीं है हमारे यहां ज्यादातर लोग एक दूसरे के।।
यह सब कहानी बस गांव तक सीमित रह जाती है कुछ परिवार तक लेकिन यह भी सबको बताना जरूरी है।।
थार की अपणायत का नारा देकर जाट, मेघवाल और मुस्लिम समाज से वोट लेने वाले नेता आज गिरल के मजदूर जैसाराम की मौत पर कितने दिखाई दिए? चुनाव के समय समाज याद आता है, लेकिन संघर्ष और दुख की घड़ी में खामोशी क्यों?"
@UmmedaRamBaytu@Barmer_Harish@Hemaram_INC@dineshbohrabmr
खून तो सबका ही लाल होता है लाला पर #ठाकुरों का DNA सब में नहीं होता सिंघो के बच्चे आज भी शेरों पर भारी पड़ते हैं
#सत्यम_ठाकुर 13 साल के बच्चे ने गर्दन मरोड़ दी तेंदुए की डर के भागा नहीं ... 🦁🚩
ex-royals westerno ke agent bane huye hain. Isliye desh aage nahi badh pa raha🥲🤣
Same as sanghis blaming lehru for evrthng, these lehruchvds blame royals. Same people jo thahre.
muhh deserve. romanov hua kyonki karne ki aukat thi .Linduo ki naa kal thi naa aaj hai.
>From the times of Shah Alam to 1857 when Gangadhar lost everything, Nehrus worked as Kotwal for emperor.
>Nandlal Nehru (elder brother of Motilal) moved to Khetri thikana of Shekhawats under Jaipur in 1861, the family survived on the generosity of Raja Fateh Singh of Khetri.
क्षत्रिय समाज का कहना है कि कोई दोषी बचे न और निर्दोष फंसे न।
राज सिंह की माता जी कहना है कि राज सिंह सुवेन्दु अधिकारी के पीए की हत्या वाले दिन उनके साथ लखनऊ में था। जानबूझकर राज सिंह को फंसाया जा रहा है। सीसीटीवी फुटेज में राज सिंह लखनऊ में देखा जा गया।
शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्या के मामले में राज सिंह को बलि का बकरा बनाया जा रहा है
जबकि CCTV फुटेज में साफ़ दिख रहा है कि हत्या वाले दिन राज सिंह घर पर ही था उसके बाद लखनऊ में था
इस तरह बेगुनाह को प्रताड़ित करना बिल्कुल बर्दास्त नही किया जाएगा
Piche se wah wah karne wale log 2 din me bhul jayenge par vivad permanent reh jayega.
Dono taraf ke bade budhe logo ko aapas me sulah karwa dena chye .
हमीर सिंह गोहिल, खाना खाने बैठे थे जहाँ भाभी ने ये कह दिया कि भारत में कोई मर्द नहीं बच्चा जो सोमनाथ को बचाने के बारे में सोचे, म्लेच्छो की बहुत बड़ी सेना सोमनाथ लूटने बढ़ती आ रही है।
१६ वर्ष के हमीर को ये बात खटक गयी और वह थाली छोड़ कर ये कहकर निकल गया कि अब घर का खाना तभी खाऊंगा जब सोमनाथ को तोड़ने वाले का सर तोड़ दूंगा, या फ़िर वहीं लड़ते हुए इस शरीर को त्याग दूंगा, पर नामर्दी का दाग़ नहीं लगने दूंगा।
वह अकेला ही लाखों की सेना से लड़ने निकल पड़ा था, मार्ग में लोग जुटते गए और सेना बनती गयी।
भारत में अपने पूर्व राजघरानों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने के लिए कुछ लोग किसी भी हद तक गिर सकते हैं। देखिए कैसे फर्ज़ीवाड़ा कर रहे हैं। साफ़ समझ आ रहा नक़ली बनाया हुआ है। सरकार को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए, देश की एकता और अखंडता के लिए ऐसे लोग ख़तरनाक हैं, देश विरोधी ताकतों का काम आसान कर रहे हैं।
Jodhpur>>>>
No City in rajasthan comes close to Jodhpur in any way
Jodhpur is what udaipur wants to be
Only Jaipur gives competition to Jodhpur in terms of architecture other than that Jodhpur is GOAT in every way.
Story time:
‘Rajju Bhaiya’ (Rajendra Singh Tomar) was a distinguished physicist, hailed as an exceptionally brilliant scholar by Nobel Prize winning Physicist C. V. Raman during his MSc examination and even offered him a fellowship in advance nuclear physics. He later taught spectroscopy at Prayag University, rising to Head of Physics, and became the first non-Brahmin, non-Marathi Sarsanghchalak of the Rashtriya Swayamsevak Sangh. In 2020, the Uttar Pradesh govt renamed Allahabad State University as Prof. Rajendra Singh (Rajju Bhaiya) University in his honour.
योगी सरकार के मंत्रिमंडल में एक भी राजपूत समुदाय का मंत्री शामिल नहीं है।
राजपुतों का वर्चस्व दिन प्रतिदिन बीजेपी ओर आरएसएस दोनों मिलकर ख़त्म कर रहे हैं। हमारे राजपूत समाज की आँखे पता नहीं कब खुलेंगी।
On this day, in the year 1540 CE, Mewar was blessed with the birth of Hindua Suuraj Ekling Diwan Maharana Pratap Singh — the immortal symbol of courage, honour, and unyielding resistance.
Remember the Blazing Sun of Hindus and the Pride of Sisodiya Rajvansh on his Jayanti 🙏⚔️🌞