जैसा गृहमंत्री! वैसा उसका संतरी!
बख्तियारपुर फोर लेन पर चाय वाले ने सम्राट चौधरी की @bihar_police के कर्मी से चाय के कुल बिल ₹100 का भुगतान करने को कहा तो यह व्यवहार हुआ!
"मा&₹¢$ चिन्हता है रे? हमसे पैसा मांगेगा?
हमसे कोई पैसा नहीं मांगता!"
चाय वाले ने कहा कि ₹100 नहीं तो कम से कम ₹40 ही दे दीजिए!
पर जिनको मुफ्त का खाने का आदत पड़ गई हो, जिनका मंत्री ही अपराधी हो, वह लोग पैसा क्यों देने लगे?
अगर सम्राट चौधरी में कुछ भी शर्म हो और जरा सी भी हिम्मत हो तो इस पुलिस कर्मी को "उनके AI कैमरे" से पकड़ कर, 10 दिन बाद ही सही, कार्रवाई करके दिखाएं!
नहीं तो बिहार की जनता भी समझ लेगी:
"जैसा संतरी, वैसा मंत्री"!!
@yadavtejashwi #RJD #Bihar
#Crime
सूरत के उत्राण रेलवे स्टेशन पर एक महिला तत्काल टिकट के लिए लाइन में खड़ी थी। स्टाफ ने टिकट नहीं दिया। जब उसने शिकायत बुक मांगी तो स्टेशन मास्टर मनोज ने मना कर दिया।
महिला ने सबूत के लिए वीडियो बनाना शुरू किया तो स्टेशन मास्टर भड़क गए। फोन छीन लिया, ओर दो-तीन थप्पड़ मारे, गालियाँ दीं और धमकाया – पुलिस बुलाकर जेल भिजवा दूँगा।
बाद में जब RPF और रेलवे में शिकायत की महिला ने तो स्टेशन मास्टर का बचाव करते हुए एक हफ्ते का समय मांग लिया गया।
एक महिला यात्री अपनी शिकायत दर्ज कराने गई और बदले में मारपीट और धमकी मिली। तो उसके मन में व्यवस्था को लेकर क्या भरोसा बचेगा?
समाजवाद का झंडा उठाते-उठाते कब परिवारवाद हो जाता है, पता ही नहीं चलता।
नेताजी लोकसभा चुनाव हारे। चिंता नहीं राज्यसभा का दरवाज़ा खुल गया।
बेटवा मंत्री बने। फिर MLC भी हो गए।
न मेरिट की ज़रूरत। न जनता का जनादेश। बस सही घर में पैदा होना काफी है।
जिस समाजवाद ने कहा था "हर हाथ को काम, हर खेत को पानी" उसी की छाया में आज का नारा है :
"हर बेटे को पद, हर दामाद को टिकट।"
Gen Z देख रही है। समझ रही है। और याद रख रही है।
जय परिवारवाद। जय समाजवाद। 🙏
- मदन मोहन झा, राजनीतिक विश्लेषक
#परिवारवाद #DynasticPolitics #Socialism #IndianPolitics #GenZ
@jansuraajonline Rajya Main 3.40 Lakh Niyojit Teachers hain . Kripya unka Mudda aap Uthaye. AAPKO support bhi milega or shiksha ke kshetra mai bahut bara badlav bhi aayega .
1952 में 600-700 जातियाँ दलित थी, बाबा साहेब के संविधान ने 600 और जोड़ दिया, यानी 5000 वर्ष के मनुवादी, ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने 600 अछूत जातियाँ दी, 70 साल के बाबा साहेब संविधान ने 600 और जोड़ा। तार्किक रूप से सुधीजन ये बताएँ कि आरक्षण से जातियों का उत्थान हो रहा है या पतन?
SC के 135-145 IAS ऑफ़िसर्स हैं, 50-62000 क्लास 1 ऑफ़िसर्स, डेढ़ से पौने दो लाख क्लास 2 ऑफ़िसर्स हैं इस देश में। अंबेडकर को उनके शिक्षक ने और तत्कालीन महाराज सयाजीराव गायकवाड ने उन्हें विदेश भेजा, फिर छत्रपति शाहूजी महाराज ने उनकी लंदन की पढ़ाई पूर्ण करवाई।
अब प्रश्न यह है कि ऊपर के IAS, क्लास 1 और 2 के लगभग 2 लाख अफ़सरों में से कितनों ने अपनी ही जाति समूह के बच्चों को स्पॉन्सर किया है?
मीना समाज 1000% अधिक ओवर रिप्रिजेंटेड है, जाटव का भी प्रतिनिधित्व SC वर्ग में अधिक है, यादव, कुर्मी, जाट, गुर्जर को OBC में देख लीजिए! तो प्रश्न यह है कि असली आदिवासी, भील कहाँ हैं ST में?
मुसहर, माँझी, वाल्मीकि, सुदर्शन, बहेलिया, बंतार, डोम, हलालखोर, तुरी, पासी, भंगी और मदारगी के बच्चे स्कूल भी पहुँच पा रहे हैं? OBC की लगभग 1,000 जातियों की सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी शून्य या नगण्य है, जैसे कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, राजभर, पाल, बघेल, बढ़ई, कुम्हार, लोहार, तेली, चौरसिया, नाई (सैलानी) और नोनिया!
फिर कहा जाता है कि आर्थिक आधार पर रिजर्वेशन नहीं होना चाहिए, क्योंकि जो दो-चार जातियाँ सारा आरक्षण खा रही हैं, उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक है, पर उन्होंने स्वयं को इन जाति समूहों में राजनैतिक रूप से ब्लैकमेलिंग करके घुसा रखा है, इसलिए वो कभी भी अपनी ही जाति समूहों में आरक्षण नीचे तक नहीं जाने देंगे।
इसीलिए, Reservation पर ReThink, Rationalise, Reform और अंततः Remove करने के लिए हमें चर्चा करनी चाहिए।
दुनिया में कितना ग़म है, मेरा ग़म कितना कम है।
इस दुनिया में इंसान कितना दुख झेल रहा है।
भगवान की कृपा से हम में से ज़्यादातर लोग ऐसे दुखों से बहुत दूर हैं। फिर भी हम अक्सर भगवान से शिकायत करते रहते हैं।
असल में इंसान अपने दुख से उतना परेशान नहीं होता, जितना दूसरों की खुशी देखकर हो जाता है।
अब इस मामले को ही देख लीजिए।
इंदौर में "महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी" के नाम से एक वृद्ध आश्रम चल रहा है। वहाँ एक नाबालिग लड़का अक्सर बुजुर्गों के साथ मारपीट करता है और बेचारों के पास सब कुछ सहने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
क्या आप कभी सोच सकते हैं कि अपने ही जीवन में ऐसा दुख झेलना पड़े, जैसा ये बेबस बुजुर्ग झेल रहे हैं?
इस वीडियो को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिए, ताकि इस नालायक को उसके किए की सज़ा मिल सके।
A person I know earned ₹48 lakh last financial year and paid close to ₹9.4 lakh in income tax.
He lost his job in December and now has to pay taxes at one of the most vulnerable times of his life.
India has almost no social security. No matter how much tax you pay, the moment you lose your job, the government won't support you.
Instead, the same tax money is redirected into freebie schemes where the priority is distributing ₹2,000 or ₹4,000 to different voter groups.
No wonder brain drain is at its highest.
Manoj Madhusudhanan took a ₹1.86 crore home loan from ICICI Bank.
As collateral, he handed over his original property documents. Every homebuyer does this. You have no choice.
ICICI Bank sent those documents to their storage facility in Hyderabad via courier. Somewhere on that journey — Bangalore to Hyderabad — the documents vanished.
Gone. Originals. Irreplaceable.
When Manoj found out, ICICI Bank had one answer: it was the courier company's fault. Not ours.
He went to the Banking Ombudsman. They told ICICI to publish a public notice about the loss and pay him ₹25,000 for the trouble.
Twenty-five thousand rupees. For losing the original documents to a ₹1.86 crore property.
Manoj sent a legal notice. ICICI denied any mistake.
He went to the NCDRC.
The apex consumer court looked at the facts. The bank had taken custody of the documents. The bank had chosen the courier. The bank could not hand that liability to a third party and walk away.
ICICI Bank — India's second-largest private bank, ₹9 lakh crore in assets — was held liable. Ordered to obtain reconstructed certified copies, issue an indemnity bond, and pay ₹25 lakh in compensation.
One loan. One lost file. One bank that blamed the courier.
Save this — if your bank loses your original property documents, they cannot blame their courier agent. The documents were in their custody. The liability is theirs. File at your district consumer forum. The law is on your side.
(Source: Manoj Madhusudhanan vs. ICICI Bank Ltd. | NCDRC | LiveLaw, September 2023)
मुंबई दादर स्टेशन पर इस देसी टोपी वाले भाई ने Blue Light Gang से पंगा ले ही लिया!
ट्रेन से दादर स्टेशन उतरते ही जब बाहर निकला। काली पीली इंडिगो टैक्सी वाले इसे तुरंत घेर लिया।
सर, कहाँ जाना है?…पूछा। भाई ने जगह बताई, बार्गेनिंग की और 250 रुपये में फाइनल कर दिया।
इसे दूसरी टैक्सी में बैठाया। अंदर बैठते ही साइड में ब्लू लाइट जल गई। फिर ड्राइवर के पास एक आदमी खड़ा हो गया।
उसने 200-200 के नोट निकाले और बोला, 1000 का दो 500 के नोट दो ना, भाई।
भाई ने 500 का नोट दिया। पर्स संभालते ही वो आदमी चिल्लाया...सर आपने तो सिर्फ 100 रुपये दिया!
भाई तुरंत शॉक हो गया। बोला कि 500 दिया है, क्या झूठ बोल रहा है?
लेकिन गैंग तैयार था। नोट बदलने का पूरा खेल था।
भाई ने डटकर लड़ाई की, बोला...मैंने गांव का पानी पिया है, तुम मुझे नहीं ठग सकते हो।
पुलिस बुलाऊंगा, मीडिया बुलाऊंगा!
गैंग वाले घबरा गए और आखिर में 500 रुपये वापस कर दिए।फिर पूरा गैंग इकट्ठा हो गया था।
बाद में एक बुजुर्ग आदमी ने बताया कि ये Blue Light Gang है।
दादर स्वामीनारायण मंदिर के सामने ये रोज स्कैम करते हैं।
इनके 200 से ज्यादा लोग हैं। तीन बड़े आका हैं। पहले कुछ नहीं था, अब करोड़ों के फ्लैट बना लिए हैं।
भाई सबको अवेयर कर रहे हैं कि दादर या बांद्रा टर्मिनस पर इन ब्लैक-येलो टैक्सी में कभी मत बैठना।
मुंबई जाने वाला हर आदमी को ये बात जाननी चाहिए।
A mother and her daughter were allegedly harassed by a group of men while visiting a hillside.
The men reportedly made inappropriate remarks until the woman took out her phone to record the incident.
As soon as they realized they were being filmed, they covered their faces and quickly tried to leave the area.
A girl had a reserved seat. But when she got on the train, someone else was seating on her seat.
GIRL: This is a reserved coach. Why are unauthorized people sitting here? Why aren’t you removing them?
RPF OFFICER: We can’t do anything about it, talk to TTE 😠
GIRL: I raised the issue twice through Rail Madad but both the complaints were closed without resolving. No one is helping 😳