प्रदेश कांग्रेस सोशल मीडिया डिपार्टमेंट जिला सचिव,
cvs प्रदेश सचिव राजस्थान,
लाडपुरा विधानसभा सेवा मंच उपाध्यक्ष कोटा,
ब्राह्मण कल्याण परिषद जिला सचिव,
भाजपा नेता और प्रवक्ता संसद और डिबेट दोनों जगह झूठ बोलते है।
असल में 1954 में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली पार्टी थी प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी और हिन्दू महासभा(बाद में भाजपा)
कभी तो सच बोलो महोदय
@MahipalMahla@PrateekSinghINC
भाजपा राज या माफिया राज?
भाजपा के शासन में राजस्थान में अवैध खनन, बजरी माफिया और उनका बढ़ता दबदबा साफ़ दिखाई देता है। कई भाजपा विधायक अवैध बजरी खनन को संरक्षण दे रहे हैं। जो पुलिसकर्मी ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाने की कोशिश करते हैं, उन्हें माफियाओं के गुंडों से पिटवाया जाता है और बाद में सस्पेंड तक करवा दिया जाता है।
केकड़ी से एक ASI ने केकड���ी विधायक शत्रुघन गौतम (@ShatrughanMLA) की पूरी पोल खोलते हुए इस सच्चाई को सामने ला दिया। खुद राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री किरोड़ी मीणा यह स्वीकार कर चुके हैं कि प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 7 करोड़ रुपये का अवैध बजरी खनन होता है। इतना ही नहीं, तत्कालीन उपराष्ट्रपति ने भी बजरी माफिया को लेकर चेतावनी दी थी।
राज्य सरकार चला कौन रहा है, चुनी हुई सरकार या माफिया?
@GovindDotasra
@RaghusharmaINC
@News18Rajasthan
@hemantkumarnews
खनन माफिया के आलीशान घरों तक यह बुलडोजर कब ��हुंचेगा? अवैध खनन से पहाड़ खोखले हो रहे हैं, नदियां लूट ली गईं, पर्यावरण बर्बाद हो रहा है, लेकिन बीजेपी सरकार आंखें मूंदे बैठी है।
सवाल उठता है कि क्या माफिया को सत्ता का संरक्षण हासिल है?
और जगह सख्ती दिखाने वाली सरकार खनन माफिया के सामने बेबस क्यों नजर आती है? कानून अगर सच में बराबर है, तो फिर कार्रवाई भी बराबर दिखनी चाहिए।
राजस्थान में बीजेपी सरकार की संवेदनहीनता अब अपराध बन चुकी है। एक मासूम झुलसी बच्ची को “SMS की बर्न नीति” का बहाना बनाकर तड़पता छोड़ देना इस सरकार की अमानवीय सोच का जीता-जागता सबूत है। मुफ्त इलाज के दावे सिर्फ पोस्टर और भाषणों तक सीमित हैं, ज़मीनी हकीकत में गरीबों को इलाज से पहले पैसे की दीवार दिखा दी जाती है।
3:30 घंटे तक तड़पती बच्ची, लापरवाह विभाग और मूकदर्शक सरकार—यह सब मिलकर बता रहे हैं कि राजस्थान में शासन नहीं, सिर्फ सत्ता का अहंकार चल रहा है।
जवाबदेही शून्य है, करुणा गायब है और बीजेपी सरकार पूरी तरह विफल हो चुकी है।
#2साल_राजस्थान_बेहाल
राजस्थान में बीजेपी सरकार के राज में अपराधियों के हौसले आसमान पर है��� और आम जनता गोलियों की गूंज में जीने को मजबूर है। हिस्ट्रीशीटर खुलेआम फायरिंग कर रहे हैं, पुलिस को चुनौती दे रहे हैं और सरकार तमाशबीन बनी बैठी है। बार-बार फायरिंग, फरारी और ढीली कार्रवाई यह साबित करती है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है।
बीजेपी का “सुशासन” सिर्फ नारों तक सीमित है, हकीकत में सड़कों पर डर और अराजकता का राज है। जनता की सुरक्षा से ज्यादा सरकार क�� अपनी कुर्सी की चिंता है।
यह शासन नहीं, बल्कि अपराधियों को मिला खुला संरक्षण है, जिसकी कीमत निर्दोष लोग चुका रहे हैं।
#2साल_राजस्थान_बेहाल
पुलिस थाना केकड़ी सदर (अजमेर) में तैनात ये ASI राजेश मीणा जी हैं, जिन्हें अवैध खनन रोकने पर बुरी तरह पीटा गया, इनाम के तौर पर विभाग से संस्पेंशन मिला... क्योंकि इन्होंने भाजपा नेताओं के संरक्षण में चल रहे अवैध खनन पर हाथ डालने की हिम्मत की है।
ये सिर्फ एक पुलिसकर्मी पर हमला नहीं, कानून के राज पर सीधा हमला है। भाजपा नेता एवं सीनियर पुलिस अफसरों की मिलीभगत से अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा ह���, और कर्त्तव्य का पालन करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रताड़ित और अपमानित किया जा रहा है।
पुलिस की वर्दी रौंदी जा रही है, और सरकार मौन दर्शक बनी बैठी है। क्या भाजपा सरकार अवैध खनन के आगे पूरी तरह समर्पण कर चुकी है?
जवाहर सिंह बेढम जी,
राजस्थान के हितों पर सबसे बड़ा कुठाराघात यमुना जल समझौते में हुआ है। राजस्थान सरकार इसकी समीक्षा करे।
प्रतीक सिंह
प्रवक्ता - राजस्थान प्��देश कांग्रेस कमेटी
@jawaharbedam
राजस्थान में जंगलराज को उजागर करता केकड़ी पुलिस थाने में तैनात ASI राजेश जी मीणा ……
जिन्हें अवैध खनन रोकने पर बुरी तरह पीटा गया व सस्पैंड कर दिया गया , ASI राजेश जी मीणा से गुनाह यह हो गया की इन्होंने भाजपा नेताओं के संरक्षण में चल रहे अवैध खनन पर हाथ डालने की हिम्मत की…….
यह हमला राजस्थान में पुलिस के इक़बाल ��र हमला है व भाजपा नेताओ की सीनियर पुलिस अफसरों की मिलीभगत को उजागर भी करता है ।
कु�� तो शर्म करो @BhajanlalBjp जी, क्या आपकी सरकार अवैध खनन माफ़ियाओ के सामने सरेंडर कर चुकी है ?
पत्थरबाज़ी या किसी भी प्रकार की हिंसा सभ्य समाज के लिए एक नासूर है। ऐसे कृत्यों में शामिल लोगों के खिलाफ सरकार और कानून को बिना किसी ढिलाई के सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
चोमू में तथाकथित पत्थर फेंकने वालों के खिलाफ जैसी कार्रवाई की गई, वैसी ही निष्पक्ष और समान कार्रवाई पूरे राजस्थान में होनी चाहिए। लेकिन दुर्भाग्यवश, सरकार कई बार धर्म और संप्रदाय को आधार बनाकर कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती है, जो पूरी तरह गलत है।
संविधान के अनुसार, किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता—न धर्म के आधार पर, न जाति के आधार पर, न समुदाय के आधार पर, न भाषा के आधार पर और न ही क्षेत्रीय आधार पर।
कानून सबके लिए समान होना चाहिए।
जय हिन्द, जय संविधान 🇮🇳
@RahulGandhi@INCIndia@Pawankhera@GovindDotasra@TikaRamJullyINC@INCRajasthan
अंग्रेजी नव वर्ष 2026 पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं! ....
यह नूतन वर्ष आप सबके जीवन में खुशहाली एवं आनंद लाए, हर घर-आँगन धन-धान्य और सुख-समृद्धि से भर जाए, यही मंगलकामना है।
#HappyNewYear2026
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एवं सोशल मीडिया विभाग के प्रदेश संयोजक आदरणीय @PrateekSinghINC जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें
हम आप के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना करते हैं
100 पहाड़ियों का सवाल है अरावली।
अरावली कोई जंगल नहीं, उत्तर भारत की ढाल है।
अरावली को किसी ऊँचाई के मापदंड में बाँधकर नहीं समझा जा सकता। यह पानी, हवा और जीवन की प्राकृतिक ढाल है। इसे कमजोर करने का मतलब उत्तर भारत के पर्यावरणीय भविष्य से समझौता करना है।
महिला-विरोधी भजनलाल सरकार में प्रतिदिन 17 दुष्कर्म हो रहे हैं, और सरकार का मौन ऐसा है मानो सब “ठीक-ठाक चल रहा हो।” अपराध बढ़ते जा रहे हैं, और सत्ता शायद अब भी उम्मीद कर रही है कि समस्या खुद ही छुट्टी पर चली जाएगी।
#2साल_राजस्थान_बेहाल
1. वह कौन-से भारतीय नेता थे जिन्होंने 1940 के दशक की शुरुआत में बंगाल में उस व्यक्ति के साथ गठबंधन सरकार बनाई थी, जिसने मार्च 1940 में लाहौर में पाकिस्तान प्रस्ताव पेश किया था?
जवाब: श्यामा प्रसाद मुखर्जी।
2. वह कौन-से भारतीय नेता थे जिन्होंने जून 2005 में कराची में जिन्ना की ख़ुलकर तारीफ़ की थी?
जवाब: लाल कृष्ण आडवाणी।
3. वह कौन-से भारतीय नेता थे जिन्होंने अपनी 2009 में प्रकाशित पुस्तक में जिन्ना की प्रशंसा की थी?
जवाब: जसवंत सिंह (अटल सरकार में विदेश मंत्री)
त्याग, धैर्य और नागरिक मूल्यों की जीवंत मिसाल, भारतीय लोकतंत्र को नयी दृष्टि देने वाली कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी जी को जन्मदिन की ��ार्दिक शुभकामनाएं।
राष्ट्र-निर्माण में आपका अद्वितीय योगदान, जनता के प्रति आपकी दृढ़ प्रतिबद्धता और सादगीपूर्ण जीवन हर भारतीय को प्रेरित करता है।
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना करती हूँ।
क्या भारत में तानाशाही की शुरुआत हो चुकी है?
चीन में तानाशाही की जड़ें इतनी गहरी हैं कि वहाँ केवल एक ही राजनीतिक पार्टी मौजूद है, और सत्ता हमेशा उसी के हाथों में रहती है। चीनी सरकार अपने नागरिकों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखती है ताकि किसी भी प्रकार की सरकार-विरोधी कार्रवाई को तुरंत रोका जा सके।
भारत ���ें भी इसी तरह की प्रवृत्तियाँ धीरे-धीरे उभर रही हैं। डेटा प्रोटेक्शन बिल के माध्यम से सरकार पहले ही नागरिकों की निजता पर अधिक नियंत्रण स्थापित कर चुकी है, और अब संचार साथी ऐप लोगों की निजता में हस्तक्षेप का दूसरा कदम हैं।
यदि स��कार वास्तव में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को महत्व देती है, तो ऐसे ऐप्स को वैकल्पिक रखा जाना चाहिए—जो नागरिक चाहें, वे इंस्टॉल करें; और जो न चाहें, वे न करें। सरकार की आलोचना के प्रति बढ़ता असहिष्णुता का भाव भारत को तानाशाही की ओर धकेल रहा है, जहाँ भाजपा सरकार चीन जैसी प्रणाली की ओर बढ़ती हुई दिखाई दे रही है।
आजादी की लड़ाई के खिलाफ रहा है RSS
- 1925 में अपनी स्थापना के बाद से ही RSS ने कभी भी देश की आज़ादी के किसी भी आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया।
- RSS के किसी भी प्रोग्राम में और ��ाखाओं में आज तक वंदे मातरम नहीं गाया।
- सावरकर, श्यामा प्रसाद और गोवलकर ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया।
- आजादी की लड़ाई लड़ने वाले लगभग सभी क्रांतिकारियों ने कांग्रेस को ही चुना, जबकि RSS और हिन्दू महासभा भी मौजूद थी।
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