पूरी दुनियाँ में अपने ज्ञान के लिए गुणगान पाने वाले बिहारी युवा शिक्षक बनने के लिए “गुणवान” नहीं हैं। ऐसा बिहार के भूसकोल, बैकबेंचर और चोरी-डकैती से डिग्री पाने वाले मंत्री-संतरी का मानना है। ये वही लोग हैं जो अपने जमाने में विद्या की अर्थी निकालने वाले विद्यार्थी रहे हैं।
दीघा, पटना में निरंकुश तरीक़े से तोड़े गए मकानों के निवासियों को आज माननीय उच्च न्यायालय ने न्याय दिया है। मुझे इस बात का व्यक्तिगत संतोष है कि हमारे द्वारा 2012-2014 में बनाई गई दीघा बंदोबस्ती योजना आज पीड़ितों के बचाव में काम आई है। अर्बन पॉलिसी की बुनियाद ही अधिकाधिक लोगों को समाहित करने की होती है न कि अपनी असफलता को अतिक्रमण का नाम देकर मनमाने तोड़-फोड़ करने व नागरिकों को प्रताड़ित करने की। नेपाली नगर के निवासियों को बधाई व एक बेहतर आवासन की शुभकामनाएँ।
बिहारी देश में नंबर 1 हो जाते हैं, टॉप करना उनकी आदत है; पर बिहार को किसने दशकों से अंतिम पायदान पर बना रखा है; विकास की हर परीक्षा में यह फेल क्यों है? कब तक तेज बिहारियों का नेतृत्व भूसकोल-भ्रष्ट नक़ली नेता करते रहेंगे? #UPSC#Bihar
आज जनहित याचिका पर सुनवाई का दिन था। सरकारी सेवक की हत्या के मामले में अपराधी की रिहाई संबंधी संशोधन पर माननीय पटना उच्च न्यायालय ने केस एडमिट करते हुए सरकार को आदेश दिया कि एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करें। सुनवाई की गंभीरता से सिद्ध हुआ कि बिहार में न्याय है। सत्यमेव जयते।
लालू-नीतीश राजनीतिक लाभ लेने के चक्कर में हमेशा बिना जाने-समझे निर्णय लेते हैं। पहले शराबबंदी और अब जाति जनगणना। जब क़ानूनी पक्ष समझा ही नहीं गया था तो चुनाव से पहले गणना कराने की हड़बड़ी क्यों थी? जातियों को गिनना ही था तो 30 साल से क्या कर रहे थे? @NitishKumar@laluprasadrjd
नीतीश कुमार जब कुतर्क करते हैं तो उनकी आदत है कि वे नर्वस होकर हँसते हैं और उनके अग़ल-बग़ल के लोग साथ देते हैं। मगर स्वर्गीय जी. कृष्णैया साहब की हत्या हँसने वाला मसला नहीं है।
अब कुतर्क का जवाब -
1. कानूनी जवाब - जब सरकारी कर्मचारी और आम आदमी की हत्या में अंतर नहीं है और सभी हत्याएँ बराबर हैं तो फिर जेल मैनुअल की धारा 481 की क्या प्रासंगिकता है? डकैती और तस्करी के दौरान हत्या ज्यादा संगीन कैसे है? तब पूरी धारा को विलोपित कीजिए। महज एक प्रावधान को हटाना tailor-made प्रयास है ताकि एक अपराधी या अपराधियों के समूह को लाभ दिया जा सके।
2. राजनीतिक जवाब - केंद्र के ऐसे अनेक प्रावधान और गाइडलाइन हैं जो राज्यों पर बाध्यकारी नहीं। और आप हर मामले में तो केंद्र और अन्य राज्यों का अनुकरण करते नहीं। उल्टे आप कहते हैं कि हमारे मॉडल की नक़ल केंद्र सरकार करे। जैसे - जातीय जनगणना, शराबबंदी इत्यादि। अच्छा है कि आप कर रहे हैं पर ये तो केंद्र की गाइडलाइन नहीं है। स्पष्ट है कि यहाँ भी आप अपने कुकृत्य को छिपाने के लिए केंद्र व अन्य राज्यों का दस्तावेज ढूँढ कर ला रहे हैं।
3. व्यक्तिगत जवाब - एक आदमी के पीछे पड़े हैं??? क्या लोग महात्मा गाँधी के पीछे पड़े हैं? क्या गाँधीजी सत्याग्रह के बाद जेल से रिहा किए गए हैं? अगरचे इस पूरे कुतर्क के दौरान आपके मुँह से अफ़सोस का एक शब्द तक उस निर्दोष IAS अधिकारी या उनके परिवार के लिए नहीं निकला। और ऊपर से आप और आपके मंत्री-संतरी ठें-ठें कर रहे हैं।
विनाश काले विपरीत बुद्धि! @NitishKumar
बिहार में सरकारी सेवक की हत्या के मामले में सज़ायाफ्ता अपराधी को जेल से रिहाई में रियायत देने वाले ख़तरनाक संशोधन को चुनौती देते हुए मैंने ‘जनहित याचिका’ माननीय उच्च न्यायालय में कल दायर कर दी है। मुझे उम्मीद है कि इंसाफ़ होगा और क़ानून का राज स्थापित होगा। सत्यमेव जयते।
कोलकाता-लखनऊ गए हैं तो एयरपोर्ट पर ही उतरे होंगे। ध्यान आया कि नहीं कि 17 साल से सीएम हूँ और पटना में एक इज़्ज़तदार एयरपोर्ट नहीं बनवा सका? विदेशी छोड़िए, देशी फ़्लाइटें भी लैंड करती हैं तो नास्तिकों को भी ईश्वर याद आ जाते होंगे। और हालात रेलवे स्टेशन से भी बदतर! @NitishKumar
एक तो बिहार के स्कूलों में पहले से ही शिक्षक नहीं, जो थे उनको भी जनगणना में लगा दिया गया, तो फिर स्कूल बंद ही क्यों नहीं कर देते? इतना ढोंग क्यों? @NitishKumar
बोधगया का ‘मगध विश्वविद्यालय’! ज्ञान की धरती! अज्ञानी नीतीश कुमार ‘इंटरनेशनल’ बनने के लिए यहां फ़ोटो खिंचाने जाते हैं। पर वे विश्वविद्यालय का शासन देखने नहीं जाते। करोड़ों लेकर वीसी की नियुक्ति की, बात ख़त्म! पढ़ाई-परीक्षा क्यों होगी? बिहार में बुद्ध मुस्कुराते नहीं, रोते हैं।
तीन वर्षीय स्नातक की डिग्री छः वर्षों में और दो वर्षीय स्नातकोत्तर की डिग्री चार वर्षों में कब तक ? आपके पास न तो तो नीयत है, न नीति. @NitishKumar@yadavtejashwi
72000 करोड़ का टैक्स नुक़सान हुआ है 6 साल में तुग़लक़ी शराबबंदी से। इतनी राशि में 500000 नये शिक्षकों की भर्ती कर वेतन दिया जा सकता था। पर इसके लिए नीति की समझ चाहिए, और सबसे बड़ी बात नीयत होनी चाहिए। बिहार को मूर्खता और अहंकार के संयोग ने बर्बाद कर दिया है।
स्कॉटलैंड में पूरा सरकारी तंत्र शिक्षकों को मनाने में जुटा है। मुद्दा वेतन वृद्धि का है। अभी वहाँ शिक्षकों का वेतन 2.5 - 3.5 लाख रुपया महीना है।
इसकी तुलना हमारे शासन से करें। बात सिर्फ़ वेतन-राशि की नहीं है। बात संवेदनशीलता की है, शिक्षा की महत्ता की है। यहाँ कोई सुनने वाला है?
“ प्लुरल्स पार्टी जाग रही है
भ्रष्ट व्यवस्था काँप रही है”
RTI एक्टिविस्ट बिपिन अग्रवाल जी की हत्या और 14 वर्षीय पुत्र रोहित द्वारा आत्मदाह के जघन्य कांड की सीबीआई जाँच हो, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और परिवार को 50 लाख आर्थिक मदद दी जाए. @narendramodi@NitishKumar