🪕अद्भुत: भारत का इकलौता मंदिर, जहाँ हाथ में 'वीणा' लिए नजर आते हैं भगवान हनुमान!
हम सबने श्रीराम भक्त हनुमान जी को हाथ में गदा लिए या सीना चीरकर राम-नाम दिखाते हुए देखा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है, जहाँ हनुमान जी वीणा बजाते हुए (वीणा वादक स्वरूप में) विराजमान हैं? 🚩
यह दुर्लभ और ऐतिहासिक दृश्य तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्थित प्रसिद्ध कुंभकोणम के रामास्वामी मंदिर (Ramaswami Temple, Kumbakonam) में देखने को मिलता है।
इस मंदिर की अनूठी खासियत:
• इकलौता स्वरूप: पूरे भारत में संभवतः यही एकमात्र ऐसा प्राचीन मंदिर है, जहाँ गर्भगृह के मुख्य दृश्य में हनुमान जी को वीणा बजाकर श्रीराम और माता सीता के समक्ष संगीतमय राम-नाम का गान करते हुए तराशा गया है।
• संगीताचार्य हनुमान: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी न केवल परम बलशाली हैं, बल्कि वे संगीत शास्त्र के भी महाज्ञानी हैं।
• 17वीं शताब्दी में नायक राजाओं द्वारा निर्मित यह मंदिर भारतीय वास्तुकला, भक्ति और कला का अद्भुत संगम है। बल और बुद्धि के साथ-साथ संगीत के ऐसे अनोखे रूप को नमन! 🙏
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Who got nothing & why?
My @Outlookindia article examines how patronage distorted Akhilesh Yadav's laptop drive & how @myogiadityanath Ji's transparent, technology-driven model delivers targeted benefits directly to students across UP.
Read it here:
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शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो गया, अब चीफ इलेक्शन कमीशनर के इस्तीफे की मांग....शिक्षा व्यवस्था सुधर गई? फुल टाइम प्रोटेस्ट वर्कर जेन जी अब दूसरे प्रोटेस्ट में लग गई...
एक झटके में जावेद अख्तर ने भारत के फेक सेकुलर गैंग को आईना दिखा दिया🔥
भारत में धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि यह सहूलियत के हिसाब से आंखें मूंदता और खोलता है। जावेद अख्तर ने इस कड़वे सच पर सीधे चोट की है कि हमारे देश में सेक्युलर राजनीति और छद्म-उदारवादी वर्ग दोहरे मानकों पर चल रहा है। सनातन समाज की कुरीतियों, पुरानी परंपराओं या सामाजिक कमियों पर सवाल उठाने के लिए बहुसंख्यक समाज के भीतर ही विचारकों, सुधारकों और आम नागरिकों की एक बड़ी कतार हमेशा खड़ी रहती है। यह हमारी संस्कृति की ताकत है कि वह आत्म-समीक्षा से कभी नहीं घबराती।
लेकिन सवाल जब मुस्लिम समाज के भीतर सुधार, कट्टरपंथ और सामाजिक बदलाव का आता है, तो तथाकथित सेक्युलर राजनीति का साहस दम तोड़ देता है। इस अवसरवादी राजनीति का सबसे बड़ा खामियाजा आरिफ मोहम्मद खान जैसे प्रगतिशील और सुधारवादी चेहरों को भुगतना पड़ा। शाह बानो केस से लेकर आज तक, जब भी किसी मुस्लिम नेता ने तर्क और आधुनिकता की बात की, उसे वोट बैंक के समीकरणों की खातिर हाशिये पर धकेल दिया गया। सेक्युलर दल कट्टरपंथी आवाज़ों को ही समाज का असली प्रतिनिधि मानने की भूल करते रहे हैं। जब तक आलोचना और सुधार का पैमाना हर समाज के लिए एकसमान नहीं होगा, तब तक यह सेक्युलरिज़्म सिर्फ एक छलावा रहेगा। असली सेक्युलरिज़्म अपनी ही बिरादरी के कट्टरपंथ से आंख मिलाने में है, उससे मुंह चुराने में नहीं!
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आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीज़ों का बड़ा संकट आ सकता है
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा 👇
खाने-पीने की चीज़ों की बात करें तो आज हम ऐसी स्थिति देख रहे हैं जहां अनाज एक्सपोर्ट करने वाले कुछ बड़े देश अपनी शिपमेंट नहीं भेज पा रहे, खासकर ब्लैक सी के रास्ते.
हम पहले ही फर्टिलाइजर (खाद) की भारी कमी देख रहे हैं क्योंकि इसके मुख्य प्रोड्यूसर मिडिल ईस्ट और रूस में हैं, और वहां फर्टिलाइजर प्रोडक्शन पर असर पड़ा है. इसके अलावा, हम 'सुपर अल नीनो' की स्थिति भी देख रहे हैं.
इसलिए, आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीज़ों का बड़ा संकट आ सकता है.
अगर एनर्जी की भारी कमी हो, और उसके साथ खाने-पीने की चीज़ों और फर्टिलाइज़र की भी कमी हो, और साथ ही फाइनेंस की दिक्कत भी हो तो कुल मिलाकर नतीजा बहुत ही तनावपूर्ण है
@jaypanicker
LPU में अफवाह के बाद बवाल, छात्रों ने कैंपस में की तोड़फोड़!
पंजाब की Lovely Professional University (LPU) में शनिवार देर रात छात्रा के कथित रेप और आत्महत्या से जुड़ी अपुष्ट खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारी हंगामा हो गया।
#trend#LPU#Punjab#LPUProtest
🚨 अमेरिका के न्यू जर्सी में बाढ़ से हालात बिगड़े
अमेरिका के न्यू जर्सी में भारी बारिश के बाद कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। सड़कों पर पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है और कई जगहों पर आवाजाही मुश्किल हो गई है।
बाढ़ के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिनमें जलभराव की गंभीर स्थिति दिखाई दे रही है।
#trending #viral #flood #newjersy
आइआइटी के प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला इस वक्त क्राइम ब्रांच की जांच के घेरे में हैं। कुसूर क्या है? एग्जामिनेशन रूम में नकल करते छात्र को पकड़ना और उसे क्लास से बाहर कर देना। उससे भी बड़ा दुर्योग ये था कि दुल्ला ओबीसी हैं और छात्र दलित था।
यूपी में अपराध की इंडस्ट्री चल रही थी,कट्टा और अवैध तमंचों की इंडस्ट्री लगती थी: अमित शाह
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सपा-बसपा के दौर में यूपी में अपराध की “इंडस्ट्री” चलती थी, जबकि योगी सरकार में कट्टा उद्योग की जगह डिफेंस कॉरिडोर और वाहन चोरी की जगह मैन्युफैक्चरिंग हो रही है।
उन्होंने कहा कि योगी सरकार बनने के बाद गुंडागर्दी पर लगाम लगी और यूपी निवेश का प्रमुख केंद्र बना है।
@AmitShah@BJP4India
'पाकिस्तान का कोई म्यूजिक नहीं है, केवल इंडिया का म्यूजिक है'
गजल सम्राट जगजीत सिंह ने एक इंटरव्यू में पाकिस्तानी गायकी के मिथक को आईना दिखाया था। पाकिस्तान में एक से एक बड़े गायक पैदा हुए लेकिन उनकी गायकी की अपनी कोई विधा नहीं है। जगजीत सिंह ने इंटरव्यू में इस मिथक को तोड़ दिया था कि भारतीय और पाकिस्तानी म्यूजिक में कोई अंतर है। उन्होंने डंके की चोट पर कहा कि केवल भारत-पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में संगीत का जन्म भारत की भूमि पर ही हुआ था। वह भगवान भगवान भोलेनाथ के डमरू का भी जिक्र करते हैं।
जगजीत सिंह भारतीय उपमहाद्वीप के पहले ऐसे गायक रहे जिन्होंने गजल गायकी को आम लोगों तक पहुंचाया। उनके कॉन्सर्ट में किसी भी पॉप स्टार से कम भीड़ नहीं होती थी।
गुलजार साहब प्यार में जगजीत को गज़लजीत सिंह भी कहते थे...
DUSU चुनाव में ABVP का फिर लहराया परचम, छात्र राजनीति में दबदबा कायम
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2026 में ABVP ने एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन करते हुए चार में से तीन केंद्रीय पदों पर जीत दर्ज की। यश डबास ने अध्यक्ष, रिया छाबड़ी ने सचिव और लक्ष्य राज सिंह ने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन विजयी रहे। NSUI इस बार चारों केंद्रीय पदों में खाता नहीं खोल सकी। चुनाव में 40.46 प्रतिशत मतदान हुआ। #DUSUUpdates #DUSUELECTION
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सवाल यह है कि क्या भारत में गांधी जी से जुड़ी हर लोकप्रिय चीज का पूरा इतिहास बताना जरूरी नहीं है?
"बुरा न देखो, बुरा न सुनो, बुरा न बोलो"—भारत में यह संदेश महात्मा गांधी और उनके तीन बंदरों के साथ इतना लोकप्रिय है कि बहुत से लोग इसे गांधी जी की मौलिक देन मानते हैं। लेकिन इतिहास की कहानी इससे कहीं पुरानी और दिलचस्प है।
इन तीन बंदरों का गहरा संबंध जापान से है। जापान के निक्को स्थित तोशोगू श्राइन में 17वीं सदी की प्रसिद्ध नक्काशी में तीन बंदर आंख, कान और मुंह ढके हुए दिखाई देते हैं। इन्हें जापानी भाषा में मिजारु, किकाजारु और इवाजारु कहा जाता है—अर्थात बुरा न देखना, बुरा न सुनना और बुरा न बोलना।
हालांकि इस विचार की जड़ें जापान से भी पुरानी मानी जाती हैं। इसके संबंध चीन की कन्फ्यूशियस परंपरा और बौद्ध विचारों से जोड़े जाते हैं। इसलिए इसे केवल जापान या केवल गांधी जी से जोड़ना इतिहास को अधूरा बताना होगा।
महात्मा गांधी ने इन तीन बंदरों को भारत में लोकप्रिय बनाने और उन्हें सामाजिक संदेश का प्रतीक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1940 के एक लेख में गांधी जी ने स्वयं तीन बंदरों की प्रतिमा का उल्लेख किया था।
गांधी जी ने इस संदेश को लोकप्रिय बनाया, यह अपनी जगह सच है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि संदेश या प्रतीक की शुरुआत उन्हीं से हुई थी।
इतिहास किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं होता। सच यह है कि तीन बंदरों की कहानी चीन और जापान की पुरानी परंपराओं से निकलकर गांधी जी के माध्यम से भारत में लोकप्रिय हुई।
गांधी जी को तीन बंदरों की प्रतिमा जापानी बौद्ध भिक्षु फुजी निचिदात्सु ने भेंट की थी।
1933 में वर्धा आश्रम में हुई इस भेंट के बाद यह प्रतीक भारत में और लोकप्रिय हुआ।
यानी संदेश जापान की पुरानी परंपरा से आया, गांधी जी ने इसे लोकप्रिय बनाया।
अब जरूरत है कि हम इतिहास को श्रद्धा और राजनीति के चश्मे से नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर समझें।
इतिहास जानिए, नैरेटिव नहीं—क्योंकि सच की कोई पार्टी नहीं होती।
Clash of Titans: पश्चिम बंगाल का ऐतिहासिक चेहरा सुवेंदु अधिकारी!🔥
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। अगर भाजपा की टॉप लीडरशिप सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाती है, तो वे राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बनेंगे, जिन्होंने सिटिंग सीएम को चुनाव हराकर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया है। यह कोई साधारण कामयाबी नहीं है। पश्चिम बंगाल के इतिहास में आज तक ऐसा कोई दूसरा नेता नहीं हुआ। न ज्योति बसु, न बुद्धदेव भट्टाचार्य और न ही ममता बनर्जी – किसी के पास यह उपलब्धि नहीं है।
सुवेंदु अधिकारी ने एक बार नहीं, दो बार सिटिंग को हराया है। यह उपलब्धि हासिल करने वाले सुवेंदु संभवत: देश के इकलौते नेता हैं।
सुवेंदु अधिकारी की यह उपलब्धि न सिर्फ व्यक्तिगत जीत है, बल्कि बंगाल की राजनीति में एक मील का पत्थर साबित होगी। तृणमूल कांग्रेस की मजबूत दीवार को तोड़कर उन्होंने जो संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।
ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच हुआ Clash of Titans पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। एक तरफ अनुभवी, दमदार और जिद्दी ममता, दूसरी तरफ युवा, आक्रामक और जन-समर्थन वाले सुवेंदु – यह मुकाबला बंगाल की सड़कों से लेकर विधानसभा तक गूंजता रहा।
यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक युग का अंत और नए युग की शुरुआत है।
#SuvenduAdhikari #BanglaNeedsChange #ClashOfTitan
बीबीसी की काश्मीरी मूल की पत्रकार ग़ाफ़िरा क़ादरी ने दिल्ली में लैंडलॉर्ड और काश्मीरी किरायेदार को लेकर जो स्टोरी की है वह प्रथम दृष्ट्या ही फ़र्ज़ी या प्रोपेगंडा मालूम पड़ रहा था।
मैंने जब कल उस स्टोरी पर पोस्ट एक लिखा तो एक सीनियर महिला पत्रकार की बहन की तरफ़ से संपर्क किया गया। वह बता रही थी की वह ख़ुद सुखदेव विहार में अपनी बहन का वेल फर्निश्ड, जिसमें ज़रूरियात की सारी सामान मौजूद है, घर दिखाने गयी थी। उसे घर पसंद भी था और किराये को लेकर भी किसी तरह का कोई एग्रीमेंट नहीं थी। बल्कि उन्होंने तो आधार कार्ड तक भी नहीं माँगी थी। फिर भी भी ग़ाफ़िरा घर नहीं ली।
सुखदेव विहार तो ओखला का एक पॉश इलाक़ा है जहाँ हिंदू और मुसलमानों की मिक्स आबादी रहती है। बड़े-बड़े एलीट लोग उधर ही रहते है। फिर ऐसी क्या मजबूरी थी की ग़ाफ़िरा ने वहाँ रहना मुनासिब नहीं समझी और पूरी एक स्टोरी बना डाली?
क्या जल्दी मशहूर होने की बेचैनी या बीबीसी द्वारा किसी प्रोपेगंडा के तहत इस तरह की स्टोरी करायी जा रही है या फिर कुछ दूसरा मामला है?
वामपंथी इतिहासलेखन की क्या दुर्गति हो गई है। रुचिका शर्मा की भाषा इसका प्रमाण है। ये बनने चली हैं इरफान हबीब!...Mild Irfan Habeeb in a Saree...😅 @tishasaroyan
My article on the contrasting approaches of Akhilesh Yadav and Yogi Adityanath towards the cultural and religious heritage of hinduism...
https://t.co/PznZqnwpWf
Soumyashree Bisi, 20, a B.Ed student at Fakir Mohan College, Balasore, approached her HoD, Samir Kumar Sahu, for help with her low attendance.
Sahu allegedly demanded sexual favours in return. She got angry and left, but he kept repeating the demand and threatened to lower her marks if she refused.
On July 1, She filed a complaint against Sahu with college authorities. During the internal probe, she realised the college was protecting the HoD.
As an ABVP member, she hoped for help from the BJP govt at the state and centre. She created an X account and tagged the Odisha CM, state ministers, union education minister, NCW and others for help, but no one responded.
On July 10, the internal committee cleared the HoD. Principal Dilip Ghosh offered her “counseling” and told her to withdraw the complaint, warning she could be rusticated.
On July 12, she staged a protest on campus, met the principal and HoD, then poured petrol on herself outside the principal’s office and set herself on fire. She died two days later in hospital.
When alive, she begged and pleaded with everyone, hoping someone would listen. No one did. Once she hurt herself, suddenly everyone woke up for damage control.
HoD Sahu was arrested, and Principal Ghosh suspended. The Higher Education Dept launched an inquiry; NCW and NHRC began probes. President Murmu visited.
The Governor sought a report. NHRC and UGC issued directives; the govt told colleges to ensure ICC compliance. CM Majhi promised strict action and ₹20 lakh compensation.
All students should be equal in the eyes of the rulers. But if a student loyal to your ideology begs your govt for help and still dies like this, it’s betrayal by the very system and party she trusted.
Shame on Odisha govt. Shame on BJP.
Alert: वाल्मीकि समाज पर मंडराते पादरी
ये चंडीगढ़ में रहने वाले रॉकी वाल्मिकी हैं। सोशल एक्टिविस्ट हैं। इनका परिवार ईसाई बन चुका है। लेकिन इनकी लड़ाई कन्वर्जन और वाल्मिकी समाज को भटकाने के खिलाफ है। दमदार व्यक्ति हैं। इनका वीडियो सुनेंगे तो पता चलेगा कि कैसे वाल्मिकी समाज खतरे में हैं। पैसा, पॉवर और पिछड़ेपन का इस्तेमाल करके कन्वर्जन की साजिश लगातार रची जा रही है। @RSSorg@AmitShah@PunjabPoliceInd@amitmalviya
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