भाजपा के गुंडों वाली गाड़ी के मालिक की मिल गई जानकारी: जो दिल्ली पुलिस नहीं कर पाई, वह हमने कर दिया
जिस गाड़ी में डंडे भरकर लाए गए थे, उसे दिल्ली पुलिस ने तो नहीं रोका। लेकिन हमने सोचा, दिल्ली पुलिस काम नहीं करेगी, तो थोड़ी मेहनत हम ही कर लेते हैं, ताकि सच सामने आ सके।
गाड़ी का नंबर आप पिछली पोस्ट में देख चुके हैं: UP 14 HA 4945। UP 14 गाज़ियाबाद RTO का कोड है। RTO रिकॉर्ड के मुताबिक यह गाड़ी 21 जनवरी 2026 को रजिस्टर हुई थी, यानी करीब आठ महीने पहले। रिकॉर्ड में मालिक का पूरा नाम नहीं था, सिर्फ “G****v P****Y” लिखा था, जिससे समझ आ गया कि नाम गौरव पांडे है।
गाड़ी के आगे "नई दिल्ली बार एसोसिएशन" और "पटियाला हाउस कोर्ट" का स्टिकर लगा है। इसलिए हमने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के रिकॉर्ड में "गौरव" नाम खोजा। वहां इस नाम के 6 वकील मिले। इनमें से एक गौरव पांडे का नाम पटियाला हाउस कोर्ट से जुड़ा मिला। उनका BCD Enrollment No., यानी बार काउंसिल ऑफ दिल्ली की ओर से वकीलों को दिया जाने वाला पंजीकरण नंबर, D/2896/2022 है। जब हम उनकी प्रोफाइल में आगे गए, तो पूरी जानकारी सामने आ गई। उनका नाम गौरव पांडे है, पिता का नाम अरुण पांडे है और जन्मतिथि 25 सितंबर 1993 है। उन्होंने 2020 में LLB पास की। वकालत का लाइसेंस उन्हें 13 मई 2022 को मिला, जो 31 मार्च 2032 तक, यानी लगभग 10 साल के लिए वैध है।
बार काउंसिल के रिकॉर्ड में एक मोबाइल नंबर भी दर्ज है, जिसे हम सार्वजनिक नहीं कर रहे। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि यही नंबर गाड़ी खरीदते समय इस्तेमाल हुआ था, और यही नंबर उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल पर भी है। यानी तीनों जगह एक ही नंबर। इससे साफ है कि जिस गाड़ी का इस्तेमाल इस "बड़े काम" में हुआ, वह इन्हीं महानुभाव के नाम पर है।
लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, जहां से तीसरी फोटो में लगी इनकी तस्वीर ली गई है, गौरव पांडे द्वारका ज़िला सेशन कोर्ट और पटियाला हाउस कोर्ट में वकालत करते हैं। ये सिविल मामलों के वकील हैं। प्रोफाइल पर इनकी आठ अलग-अलग स्किल दिखाई गई हैं: फैमिली लॉयर, कॉरपोरेट लॉयर, बिज़नेस लॉयर और न जाने कितने प्रकार के वकील। पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से की है, और गाज़ियाबाद के KAMKUS कॉलेज ऑफ लॉ के छात्र भी रहे हैं।
कुल मिलाकर, वकील साहब एक महान व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपनी गाड़ी इस तरह "दान" कर दी। गौरव पांडे खुद उस दिन गाड़ी में थे या नहीं, यह कौन जाने। लेकिन गाड़ी वही है, जिसमें भाजपा के गुंडे डंडे लेकर बैठे थे, और जिसे दिल्ली पुलिस ने खुलवाया तक नहीं।
हमने दिल्ली पुलिस का काम आसान कर दिया है। अगली बार पत्रकारों को धक्का देने के बजाय दिल्ली पुलिस यह सुनिश्चित करे कि आने वाली गाड़ियों की ठीक से जांच हो, ताकि उनमें डंडे या हाथ में पहनने वाले लोहे के रिंग न आ सकें, जिनसे किसी की जान भी जा सकती है। अगर उस दिन गाड़ी वहीं खुलवा ली जाती, तो आज दिल्ली पुलिस की ऐसी फ़ज़ीहत नहीं होती।
दिल्ली पुलिस को बाबा खड़क सिंह मार्ग और आसपास के सारे CCTV कैमरे खंगालने चाहिए, अगर वे चालू हैं। पिछली बार पुलिस ने दावा किया था कि उसने इन्हीं कैमरों से कई अपराधियों को पकड़ा। तो इस बार भी पकड़ लीजिए। गाड़ी का नंबर, मालिक का नाम, तारीख, जगह, सब हमने आपके सामने रख दिया है।
मैं देश के वरिष्ठ वकीलों, @KapilSibal और @DrAMSinghvi से भी अपील करता हूं कि इस मामले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएं। यह पूछा जाना चाहिए कि जब पत्रकार मौके पर चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे थे कि गाड़ी में डंडे हैं, तब दिल्ली पुलिस ने गाड़ी क्यों नहीं खुलवाई।
धन्यवाद।
@Pawankhera@RahulGandhi@INCIndia@whattalawyer@abhijeet_dipke@Cockroachisback@AshutoshRanka@ashutosh83B@ravish_journo@udayfromearth
500 lawyers, including senior Supreme Court advocates, are joining today’s march to the Supreme Court against Vote Chori.
12 October, 1:30 PM
Connaught Place, Barakhamba Road Junction
Bring the Tricolour. Chalo Delhi! 🔥🇮🇳
यहाँ सुनिए और देखिए पूरा वीडियो
यह वही संघी दरिंदे हैं जिन्होंने एक लड़की को बेरहमी से पीटा
ये आतंकवादी खुद कह रहे हैं, “दिल्ली पुलिस आ गई है, अब नीचे उतरो”
साफ़ है, इन्हें दिल्ली पुलिस का पूरा संरक्षण था
मोगैंबो मोदी ख़ुश हुआ
दिल्ली में बीबीसी संवाददाता राघवेंद्र राव ( @raghvendra_rao ) जब प्रोटेस्ट की रिपोर्टिंग कर रहे थे, तब दिल्ली पुलिस ने दखल देने की कोशिश की.
दिल्ली के कई इलाक़ों से ऐसी रिपोर्ट सामने आई हैं कि पत्रकारों को उनका काम करने से रोका जा रहा है.
दिल्ली प्रदर्शन से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट देखें: https://t.co/Pj12wcqadS
याम मीरा सिंह जो बता रहे हैं उसके लिए भयावह शब्द भी कम पड़ जाए। जब पुलिस ही आपको भीड़ के हवाले कर दे तब क्या करेंगे? यह तो भीड़ पुलिस को चला रही है। फिर कुछ दिनों बाद पुलिस क्या करेगी।
Liar Liar @Radhika_Khera!
Why share an AI generated image while calling others liars? At least get the basic facts right, The bond was signed today, 11 October, not 10 October. And it wasn't signed at the New Delhi District Magistrate’s office either.
Hire someone who can do basic research before churning out fake AI generated images.
ऐसे ही थोड़े इन गुंडो के हौसले बुलंद है ।
इन गुंडो को सत्ता और पुलिस का अथाह समर्थन प्राप्त है जिसके दम पर ये दिल्ली की सड़को पर सरेआम गुंडई कर रहे है ।
पत्रकार साथी @ShyamMeeraSingh अपना धर्म निभा रहा था, फिर BJP के गुंडों ने हमला किया।
Police भी मौके पर मौजूद थी...
सोचिए Police ने क्या किया होगा...?
श्याम मीरा सिंह को उठाकर हिरासत में ले लिया..
और गुंडे? अगले हमले के लिए तैयार हो गए।