@ImHydro45 Are lodu jb PK khud ko bramhin keh ke vote nhi le rha hai to tum kahe usko bramhin banane pe tule hue hoo
asse to bramhin hi leftist hote hai kafi example de skta admi
@Mrsinha bsdk accept kro janta ka matt aur kaam kro apna course correction kro warna gart me chale jaoge iss arrogance se
congress wale already gart me hai
@Mrsinha are gandu kabhi to self realise krna sikho tum jaise gandu ke wajah se party ka vinash hoga.
Bosdiwale 202 seat asse CM ke liye nhi diya tha bihar
UGC bharat tiwari ko bhula nhi hai bihar E20 wali bakloli dikhti hai sbko
to tum apna gyan na chodo gandu sala party naash kr dega
2022: When journalist Saurabh Dwivedi and YouTuber Shubham Gaur had to issue a public apology to Rahul Gandhi for making fun of him.
They were badly hounded by Congress workers.
Today the same Congress ecosystem is justifying abuses towards PM Modi.
Junaid's Neighbour -
"How can someone earning ₹20,000 a month spend ₹12 lakh every day?" 🤯
"Govt & Police have every right to ask him"
"Who gave him money? BIG mystery"
# रफ़ूगर_और_मोदी_समर्थक
_____________________
आप सबने ये मजेदार कहानी बहुत बार सुना होगा, मैंने भी अपने पापा से सुना है।
एक नवाब साहब को लम्बी-लम्बी फेंकने की आदत थी। रोज दरबार लगता था, नई गप्पें लगती थी! दरबारी, सभासद, जनता वाह-वाह करती थी!
समय गुजर रहा था, नवाब साहब खु़श थे ।
लेकिन पता नहीं क्यों, कुछ सभासदों की, कुछ दरबारियों की चेतना जागी, और नवाब साहब की असंभव सी लगने वाली गप्पों पर ऐतराज होने लगा।
अब नवाब परेशान हुआ, लेकिन परेशानी के साथ परेशानी का एक समाधान भी उसी सभा में उसके सामने आ गया, जब उसने देखा कि दूर राज्य से आया एक साधारण सा युवक, उसके पास काम मांगने आया है।
नवाब ने पूछा: तुम क्या कर सकते हो?
युवक ने कहा: हुजुर, मैं बातों का रफूगर हूँ।
नवाब ने कहा: बात तो अजीब सी लगती है, कुछ कर के दिखाओ।
परीक्षा की तैयारी हुई, नवाब ने गप्प मारी,...
"मैं एक दिन पतंग उड़ा रहा था! पतंग उड़ते उड़ते काफी दूर चली गई! इतनी दूर चली गई कि दुश्मन देश के राजा जो छत पर टहल रहे थे, उनकी गर्दन में मेरी पतंग का धागा उलझ गया। मैंने थोड़ा सा ही जोर लगाया, तो दुशमन देश के राजा की गर्दन छत से जमीन पर आ गिरी।"
नवाब साहब जब चुप हुए तो उन्हें लगा कि वाह-वाही होगी। लेकिन सारे दरबारी सकते में आ गए, कि इस पर कैसे विश्वास करें?
नवाब को बडी़ दुविधा हुई, परेशानी हुई, उसने बातों के रफूगर की तरफ देखा।
रफूगर बोला: "हुआ यूं था कि,.. दुश्मन देश के राजा शिकार के लिए समीप की शिकारगाह में रुके थे। जब महामहिम पतंग उड़ा रहे थे तो धागा उनकी गर्दन में उलझने की वजह से दुश्मन राजा, ऊपर से गिर पड़े,... नीचे एक लोहे का धारदार पत्रा लगा था, जिसकी वजह से राजा की गर्दन कट गईं।"
यह बात तो विश्वास करने योग्य थी और दरबारियों के मुंह से निकला वाह-वाह, वाह-वाह। नवाब के चेहरे पर मुस्कान आई और उसने इस युवक को पक्की नौकरी पर रख लिया।
थोड़े दिन के पश्चात नवाब ने फिर गप्प मारी, "एक दिन मैं शिकार खेलने गया था और सामने एक हिरण भाग रहा था। मैंने घोड़े पर से निशाना लेकर एक तीर चलाया। वो तीर हिरण के दाईं तरफ के पिछ्ले पैर से होता हुआ, हिरण के कान के पास सिर में लगा और हिरण वहीं ढेर हो गया।"
दरबारयों को अविश्वास हुआ और उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि, "सरकार ऐसा कैसे हो सकता है कि,.. हिरण के दाईं पैर के पिछले हिस्से के पास से निकला हुआ तीर कान के पास हिरण के सिर में लग जाए?"
नवाब ने फिर रफूगर की तरफ देखा, तो रफूगर बोला,.. "हुआ यूं था कि जिस वक्त नवाब साहब ने तीर चलाया उस वक्त हिरण खड़ा होकर, अपने दाएँ पैर से अपने सिर के पास कान खुजा रहा था।" ये बात सबको जंच गई और बह निकली वाह-वाह, वाह-वाह,... और नवाब भी खु़श।
नवाब ने अगली बार गप्प मारी - "मैं शिकार खेलने गया। जंगल पहुंचा तो वहां आग लगी थी। आग से सभी जानवर भाग रहे थे। शेर भी जंगल से भाग रहा था। मैंने धनुष पर तीर चढ़ाकर उस पर वार किया। शेर आग के बावजूद, जंगल में वापस कूद गया और जलकर मर गया।"
रफूगर बोला – "नवाब साहब, पहले मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं, कि,... अगर आपकी मौत तय हो तो आप अपने राज्य में मरना पसंद करेंगे या बाहर?"
नवाब ने कहा – जाहिर है कि अपनी सियासत में।
रफूगर- "तो हुजूर, जैसे आप अपने राज्य के नवाब हैं, वैसे ही शेर भी जंगल का राजा था। आपके तीर से उसकी मौत तय थी और आग से भी मरना तय था। तो, उसने सोचा कि जब मरना ही है तो अपने राज्य में क्यों न मरा जाए!"
नवाब खुश, और दरबारी फिर वाह वाह किये,.. !!
कुछ दिन और बीते नवाब ने फिर एक किस्सा सुनाया,.. "मैं अपने बाग में टहल रहा था। ...एक फूल मुझे पसंद आया, मैंने उसे तोड़ कर सूंघना चाहा। जैसे ही मैं उसे अपनी नाक के पास सूंघने के लिए लाया, ...मैंने देखा कि उसमें कीड़ा है।. ..यह देख कर मैंने वो फूल फैंक दिया। वो फूल जब फैंका तो फूल चला गया थोडा दूर जंगल में। ...वहाँ से एक हाथी गुज़र रहा था। फूल उसको लगा और हाथी वहीं मर गया।"
अब तो दरबारियों के पास कोई चारा नहीं था कि वो इस पर विश्वास कर पायें।
बिलकुल नीरव सन्नाटा!
नवाब ने फिर से उम्मीद भरी निगाहों से रफूगर की तरफ देखा।
रफूगर ने बिना कुछ सोचे-समझे फौरन हाथ जोड़ लिया, और झुककर बोला–
"गुस्ताखी माफ हो हुजुर। मैं छोटी छोटी बातों (गलतियों) का रफूगर हूँ, इत्ते बड़े पैबंद नहीं लगाता।"
_____________________
भागवत जी... पैबंद लगाने लायक चादर तो बनी रहने दीजिए, प्लीज!!! 🤦🤦