बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारियों के मद्देनज़र जब से अपरकास्ट समाज और उसमें से ख़ासकर ब्राह्मण समाज को, उनके बी.एस.पी. में जुड़ने को ध्यान में रखकर, पार्टी का उम्मीदवार बनाना शुरू कर दिया है, तब से सभी विरोधी पार्टियों में व ख़ासकर समाजवादी पार्टी में उनकी नींद उड़ा देने वाली बेचैनी देखने को मिल रही है, जो कि सन् 2007 की तरह ब्राह्मण समाज के योगदान से बी.एस.पी को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जैसा ही इस बार के आगामी चुनाव परिणाम के रिपीट होने की संभावना के तहत् स्वाभाविक ही प्रतीत होता है।
वैसे भी यह सर्वविदित है कि यूपी जैसे विशाल आबादी वाले प्रदेश में अपरकास्ट में से ख़ासकर ’ब्राह्मण समाज का हित बी.एस.पी. में ही सुरक्षित है’, जिस अपनी इस ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त, नीयत व नीति को बहुजन समाज पार्टी ने पहले पार्टी स्तर पर अमल करके और फिर सरकार बनने पर भी उन्हें भरपूर आदर-सम्मान के साथ-साथ उन्हें हर स्तर पर पूरी-पूरी भागीदारी देकर यह साबित भी कर दिया है, जबकि दूसरी पार्टियों की सरकारों में इस वर्ग के लोग पिछले काफी समय से अपने आपको काफी उपेक्षित, असुरक्षित व ठगा हुआ भी महसूस कर रहे हैं।
इतना ही नहीं बल्कि ’ब्राह्मण समाज द्वारा सामाजिक भाईचारा के आधार पर बी.एस.पी. से जुड़ने की इनकी तैयारियों को ध्यान में रखकर इन्हें पार्टी उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया जारी है तथा इन्हें बी.एस.पी. की आयरन लेडी नेतृत्व पर पूरा यह यक़ीन भी है कि बी.एस.पी. की सरकार बनने पर उन्हें पहले की तरह ही हर स्तर पर भरपूर आदर-सम्मान ज़रूर दिया जायेगा, जो कि इनकी वास्तविक चिन्ता व दूसरी पार्टियों से मुँह मोड़ने का कारण है।
इसके साथ ही, अपरकास्ट में से क्षत्रिय, वैश्य आदि व अन्य समाज के लोगों को भी उनकी बी.एस.पी. से जुड़ने की तैयारी अर्थात् ’जिसकी जितनी तैयारी उसकी उतनी भागीदारी’ के आधार पर चुनाव में उम्मीदवार भी ज़रूर बनाया जायेगा, जिसकी तैयारी हर स्तर पर लगातार जारी है।
बी.एस.पी., दूसरी पार्टियों की तरह कुछ लोगों को ’लॉलीपाप’ थमाने की संकीर्ण व स्वार्थ की राजनीति नहीं करती है बल्कि पूरे समाज के हित व कल्याण की चिन्ता करना अपना संवैधानिक कर्तव्य समझती है और इसीलिये बी.एस.पी. की नीति व कार्यक्रम जनहित व जनकल्याण तथा अपराध नियंत्रण व क़ानून व्यवस्था के मामले में भी देश व जनहित में बेहतरीन होते हैं।
भरत तिवारी हत्याकांड पर सवाल पूछने गए पत्रकार को SP के एक स्टॉफ ने तानाशाही दिखाते हुए गेट पर तैनात सिपाही को सस्पेंड करने के आदेश दे दिए।
बिहार पुलिस मे तानाशाही चल रहीं है ये दो कोड़ी का एक सिपाही को सस्पेंड करने के आदेश दे रहा है किस हक़ से?
ऐसा प्रतीत होता है समस्त यूट्यूबर,छोटे रिर्पोटर शहीद क्रांतिकारी भरत तिवारी के समर्थन में उतर आएं हैं।अब किसी ने शाहपुर थाना जी की स्वर्गीय भरत तिवारी का संबंधित थाना है वहां लगे क्रिमिनल्स की लिस्ट वायरल कर रहा है जिसमें भरत तिवारी का नाम क्रिमिनल लिस्ट में दूर दूर तक कहीं नहीं
भरत तिवारी अपराधी था या माफिया, ये निर्णय करने का अधिकार कोर्ट का था,
कैमरे पर आत्म समर्पण करने के बाबजूद उसका इनकाउन्टर कानून के खिलाफ है, पुलिस वाले हत्यारे हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाए।
बिहार ही नहीं पूरी दुनिया को भरत तिवारी जी का ये कॉल रिकॉर्डिंग - उनकी हत्या के 30 मिन पहले की सुननी चाहिए
और सत्ता के दलालों बताओ शर्म आई की नहीं तुमको ?
देश के सैनिक नमन कर रहे हैं - लेकिन मोदी की चुप्पी है - क्या मोदी जी देश के सैनिक से भी महान हो चुके हैं ?
इनका एनकाउंटर करने की औकात है क्या ?
आरोपी :-
- रामू महतो
- सूरज महतो
- नीतीश महतो
या दुबे, तिवारी , पाण्डेय , त्रिपाठी, मिश्रा , बाजपेयी, पाठक , द्विवेदी सरनेम होने पर ही आरोप साबित होगा ?
📍 शोक संवेदना एवं निष्पक्ष जांच की मांग
ग्राम बेलौटी, जिला भोजपुर (आरा)
ग्राम बेलौटी, भोजपुर निवासी स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी जी केवल इतना चाहते थे कि जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी जनता की समस्याओं का समाधान करें तथा गरीब, वंचित एवं बाढ़ पीड़ित परिवारों को उनके अधिकारों से वंचित न रखा जाए।
भरत भूषण तिवारी जी समाज के लिए संघर्ष करने वाले एक जागरूक एवं संवेदनशील व्यक्ति थे। उन्होंने सदैव गरीबों, असहायों, दलितों एवं जरूरतमंद लोगों की आवाज उठाने का कार्य किया। कोरोना महामारी, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं तथा अन्य कठिन परिस्थितियों में उन्होंने अपने सामर्थ्य से बढ़कर समाज सेवा की। उनके अनेक ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जिनमें वे प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों एवं समाज के लोगों के साथ मिलकर जनहित के कार्य करते दिखाई देते हैं।
आज उनकी मृत्यु की घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना को लेकर अनेक प्रश्न उठ रहे हैं। यदि विभिन्न माध्यमों से प्रसारित जानकारी एवं वीडियो में दिखाई गई परिस्थितियां सही हैं, तो यह आवश्यक है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं न्यायसंगत जांच कराई जाए, ताकि सत्य जनता के सामने आ सके।
लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है। कानून का शासन तभी मजबूत माना जाता है जब हर घटना की जांच निष्पक्ष रूप से हो और दोषी चाहे कोई भी हो, उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
मैं बिहार सरकार एवं संबंधित उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग करता हूँ, ताकि सत्य सामने आए और न्याय सुनिश्चित हो सके। ऐसी घटनाएं समाज में अनेक सवाल खड़े करती हैं और यदि समय रहते सच्चाई सामने न आए तो आम जनता का विश्वास प्रभावित होता है।
स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी जी का सामाजिक योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनकी स्मृति को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ तथा ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि शोक संतप्त परिवार को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
मैं शीघ्र ही पीड़ित परिवार से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करूंगा तथा निष्पक्ष जांच की मांग को मजबूती से उठाऊंगा।
स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी अमर रहें।
आपका अपना
श्री पवन सिंह
बिहार विधान परिषद् सदस्य 🙏🏻
@bihar_police@officecmbihar
I hereby announce that, with the support of @ShridharSewa, we are moving the High Court against the alleged fake encounter of Bharat Tiwari Ji.
We are also raising this matter before the National Human Rights Commission.
I want to assure Bharat Tiwari Ji’s family that justice will be served at any cost.
Enough is enough.
12 सालों में अगर भ्रष्टाचार नहीं खत्म कर पाए तो क्या कर पाए तुम -
1- थानों में भ्रष्टाचार चरम पर है
2- लेखपाल, डीएम, SP, साइबर क्राइम थाना, सब भ्रष्ट हैं
3- तहसील, कचहरी, कृषि भवन, में भ्रष्टाचार भरा पड़ा है
4- प्रधान, बीडीसी, जिलापंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, सांसद, मंत्री , मुख्यमंत्री सब भ्रष्ट हैं।
5- भगवान के मंदिर में आपके नाक के नीचे से चोरी हो गई, ये कैसी चौकीदारी है?
किसी के अंतिम यात्रा के लिए ये भीड़ देखकर आप समझ सकते हैं कि वो अपने गाँव समाज के लिए कितना किया होगा और उसका उनके जीवन में कितना अहम योगदान रहा होगा।
कई नेता जीवन भर चप्पल घिस देंगे अपना तब भी ये भीड़ नहीं जुटा पाएंगे। ये भीड़ उस तथाकथित पागल भरत तिवारी के लिए है जो अपने हक अधिकार के लिए सिस्टम तक को झुका दिया।
भरत तिवारी निसंदेह एक देशभक्त, निर्भीक, क़ाबिल, दूरदर्शी और सम्मान योग्य थे हैं और रहेंगे।
शत शत नमन 🙏
कौन कहता है कि बिहार में सबसे अधिक जातिवाद है…..?
भरत तिवारी के एनकाउंटर पर
- पासवान समाज के लोग रो रहे हैं
- भुइयां-मुसहर सहनी के घर में मातम है
- यादव समाज के लोग न्याय के लिए सड़कों पर हैं
- सामान्य वर्ग पूर्णतः इसे अत्याचार बता रहा है
ये चाचा पासवान समाज के हैं। देखिए कैसे कैमरे पर रोने लगे।
गोली मत चलाइए….गोली मत चलाइए…..
भरत तिवारी के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों में दहशत।
लोकतंत्र के लिए कितनी सुंदर तस्वीर है। धत्त तेरी ऐसे निर्दयी निर्मम सिस्टम की।
ये फर्ज़ी डिग्रियां दी किसने?
सवाल ये है कि सिस्टम में बैठे लोग उसे पकड़ क्यों नहीं पाए?
जांच कौन करेगा?
अगर सालों तक लोग नकली डिग्रियों के सहारे नौकरी, पद और सिस्टम में घुसते रहे,
तो आगे आने वाला भारत क्या होगा ?
हर जगह नक़लीness - नकली अंडा पनीर दूध घी पानी हवा डिग्री डॉक्टर नेता मंत्री etc
अब Supreme Court सिर्फ “अफसोस” जताएगा तो कार्रवाई कौन करेगा ?
महिला की जाति देखकर तय होता है कि छेड़खानी करने वाले को कितनी सज़ा मिले और मुआवजा कितना मिले!
छेड़खानी को भी जाति के चश्मे से देखने वाले हमारे महान नेताओं को सलाम!!