उन्नत कृषि के साथ ही किसानो के जीवन स्तर मे सुधार तथा आत्मनिर्भरता हेतु भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जाता हैं।
#12YearsOfKisanSamriddhi@AgriGoI@SecyAgriGoI
During the ongoing Special Campaign 4.0 under Swachhata Hi Seva 2024, Plant Quarantine Station Kandla, Gujarat, organized a cleanliness drive at their office premises. The aim was to enhance the workspace and preserve office records to boost work efficiency.
#agrigoi #SpecialCampaign4.0 #SwachhataPakhwada2024 #SwachhBharat #10YearsOfSwachhBharat #SwachhtaHiSeva2024
आपसे चार्ली चैप्लिन मिलना चाहते है बापू..
- कौन चार्ली चैप्लिन.. ??
गांधी फिल्में नही देखते थे।
तो किसी ने बताया - जोकर है एक!!!
दूसरे ने टोका - नही बापू, एक्टर है,
बहुत फेमस है...
- ठीक है। मैं अभी नही मिलना चाहता...
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गोलमेज कॉन्फ्रेंस अटैंड करने को बापू लन्दन में थे। तमाम मुद्दे, राजनीतिक सवाल, दिमाग मे उलझ रहे थे। ऊपर से प्रेस वालो, सेलेब्रिटियों, पॉलिटिशियन्स का तांता लगा हुआ था।
कोई "मैडम तुसाड म्यूजियम" वाले बुला रहे थे। अब पता नही कि ये मैडम तुसाद कौन है? कोई एक गौहर जान भी है, कहते है कि मशहूर गायिका है।
मिलने को आतुर है- एक मुलाकात के लिए 12000 रुपये दान देने की चिट्ठी लिखी है। बस, वो अपना गाना सुनाना चाहती है गांधी को..
औऱ गांधी चाहते थे कि समय निकालकर लंकाशायर जायें। वहां के मिल मजदूरों से मिलें।
चार्ली वाली बात आई गयी हो गई।
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किंग्सले हॉल में उनके कार्यक्रम के आयोजक विलियम रिन्ड ने पूछा- आप चार्ली चैपलिन को मिलने समय नही दे रहे ?
गांधी ने अपनी असमर्थता जताई।
"आपको उससे मिलना चाहिए। वो दुनिया का सबसे मशहूर बन्दा है, ऑफकोर्स आपको छोड़कर.. रिन्ड हंसे।
और फिर गम्भीरता से कहा- वो आपके उद्देश्य से सहानुभूति रखता है।उसने गरीबी देखी है, बड़े क्रांतिकारी विचार रखता है। उससे मिलना, आपके कॉज में सहायक होगा..
गांधी ने सर हिलाया
ठीक है फिर..
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चार्ल्स स्पेन्सर चैपलिन, नाइट कमांडर ऑफ द मोस्ट एक्सीलेंट ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश एम्पायर, उर्फ चार्ली चैप्लिन (KBE)...
एपोइंटमेंट लेकर, अपने पैरों चलकर उस फकीर से, जिसे 1982 में पिक्चर रिलीज होने के पहले कोई जानता नही था, मिलने आये।
अपनी ऑटोबायोग्राफी में वे याद करते हैं, ईस्ट इंडिया डॉक रोड में, स्लम एरिया का वह घर, जहां गांधी ठहरे थे।
और गांधी से मिलने के लिए सीढियां चढ़ते समय अपनी नर्वसनेस... वे गांधी से मिलकर क्या कहेंगे??
एक्टर थे, तो मन ही मन अपनी ओपनिंग लाइनें दोहरा रहे थे- "मि गांधी, मैं आपके देश और आपके लोगो की आजादी का समर्थक हूँ"
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मुलाकात अच्छी हुई। ऑटोबायोग्राफी में चार्ली लिखते है- चरखे को देखकर मैनें पूछ ही लिया, मि. गांधी, मैं आपके सारे विचारों से सहमत हूँ, लेकिन आप मशीनों का विरोध क्यो करते हैं?
गांधी बोले- चरखा चलाने का मतलब, सारी तकनीकी का विरोध नही। ये उससे जुड़े आर्थिक और राजनीतिक तंत्र का विरोध है। शोषण की व्यवस्था का विरोध है। गरीबो से समेटकर, चंद जेबें भरने का विरोध है।
इंगलैंड ने भारत के सारे उद्योग नष्ट कर, यहां मशीनों से प्रोडक्शन शुरू किया है। ताकि यहां माल बनाकर भारतीयों को बेच सकें। वहां का धन, यहां लाया जा सके।
हम मशीन से बने कपड़े का नही, उस शोषण के फ़लसफ़े का विरोध करते हैं। इसलिए चरखे से भारतीय खुद कपड़ा बनाये, खुद का उत्पाद पहने, चरखा चलाकर इसका संकेत देता हूँ।
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बातचीत के बाद दोनो ने साथ साथ प्रार्थना की। गांधी ने अपने तरीके से, चार्ली ने अपने तरीके से..
गांधी का भजन जरा लम्बा चला, तो चार्ली भी सुनते रहे। फिर दोनो ने भोजन किया।
ऑटोबायोग्राफी में चार्ली ने "मोस्ट ब्रिलिएंट मैन ही एवर मेट" और "वन ऑफ मोस्ट गॉड लाइक एज वेल" लिखकर गांधी से मुलाकात के अध्याय को समाप्त किया।
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प्रेस और मीडिया से, 45- बेक्टन रोड के दोनो फ्लोर पैक थे। हजारों लंदनवासी , सड़क पर इकट्ठे थे। गांधी और चार्ली की मुलाकात का गवाह बनने के लिए..
वो 2 सितंबर 1931 की शाम थी।
और 2024 की भी एक शाम है, जब पूड़ीपैक और 500 रुपये देकर, टेक्टरों से भीड़ इकट्ठा करवाने वाला नशेड़ी जोकर, गांधी की गुमनामी पर दया बरसा रहा है।
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उसके जैसे ही एक सनकी, आत्ममुग्ध, बौने, अवतारी तानाशाह का मजाक उड़ाते हुए, चार्ली ने अपनी सर्वकालिक महान क्लासिक " द ग्रेट डिक्टेटर" बनाई।
और उसके अंत में अपना सन्देश दिया।
चैप्लिन शांति का, अहिंसा का प्रेम, साहचर्य, की बात करते हैं। जब वे गरिमा औऱ मानवता को लालच, नफरत, अहंकार और मशीनो से ज्यादा जरूरी बताते है..
तो उनकी बात में गांधी से मुलाकात की छाप दिखती है।
और चैप्लिन की जुबान से जब गांधी बोलते दिखाई देते हैं, तब आपका, मेरा, और हिंदुस्तान का सीना..
गर्व से दोगुना हो जाता है।
❤️🙏
आम धारणा है कि कीट-पतंगे प्रकाश की ओर आकर्षित होते हैं, और यही कारण है कि वे रात में कृत्रिम रोशनी के पास इकट्ठा हो जाते हैं। हमारे लेखकों और कवियों की उपमाओं से इस विश्वास को बल मिला है। अक्सर माया और मोह को समझाने के लिए दीपक और पतंगे का उदाहरण अक्सर दिया जाता है। भक्तिकाल के सूरदास, तुलसीदास, कबीर से लेकर सूफी कवियों द्वारा रचित साहित्य हो या आधुनिक शायरी और फिल्में, हर जगह प्रकाश के मोह में पतंगे के जलने का वर्णन किया है। लेकिन नई रिसर्च बताती है कि लेखकों और कवियों की कल्पना की उड़ान वैज्ञानिक कसौटी पर खरी नहीं है। पढ़िये कार्बनकॉपी पर यह लेख
https://t.co/RSRrpfuLuu
@CarboncopyH@carboncopyinfo@mongabayhindi
स्वच्छता ही सेवा 2023 - विशेष अभियान 3.0 के तहत क्षेत्रीय वनस्पती संगरोघ केंद्र कांडला कार्यालय परिसर मे स्वच्छता एवं सौंदर्यकरण किया गया ...#SwachhataHiSeva
“ यह महान दृश्य है...
आजादी की बेला, बरसों का स्वप्न, खुली हवा में सांस, औऱ उपर लहराता तिरंगा. सोचने में आता है कि फहराने वाले के मस्तिष्क में क्या चल रहा होगा?
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वह जो नीचे खड़े हैं, तिरंगे को देख रहे हैं, नेहरू को देख रहे हैं। उनका दृश्य सीमित है. विशाल असलियत दूसरी ओर से दिखती है.
क्योकि ऊंचे किले की प्राचीर पर खड़े होकर, दूर तक दिखता है.
ये विशाल जनसमूह !!
ये वोटर नही, कार्यकर्ता और समर्थक नही, मुग्ध श्रोता भी नही। उन्मादित गर्वीलों का जमावड़ा नहीं है, ये दीन हीन, आर्थिक- सामाजिक रूप से निचुड़ चुका राष्ट्र है.
अंगभंग के ताजे रिसते घाव के साथ, घिसटते हुए भी जश्न मनाने आया है. वो खड़ा होकर तिरंगे की लहरों के संग डोल रहा है. अपने देश, अपने नेता की जयकार कर रहा है.
यह डराता है.
अगर आप मनुष्य हैं, तो डराता है। आशा से भरी लाखों आंखों का केंद्रबिंदु होना आसान नही होता. क्या नेहरू, दबाव महसूस कर रहे थे?
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इस किले से कुछ दूर ही, हथियारों के साथ कुछ लोग, आग लगा रहे हैं, घाव बांट रहे हैं. शिकार खोज रहे हैं. उनकी भी एक विचारधारा है.
या शायद नहीं है….
कुछ का आक्रोश है, कुछ के लिए मौका है. औरों के घाव में अपनी मजबूती देखने की हुनक है.
क्या नेहरू का दिमाग, उस धुएं के गुबार पर गया?
या कैबिनेट की अगली बैठक को सोच रहे थे?
देश ये आजाद हुआ है, बना नहीं है. सीमाएं तय नहीं, देश के भीतर 500 देश हैं. त्रावणकोर, जूनागढ़, हैदराबाद, राजपूताना, कश्मीर.. दर्जन भर दूसरे भी अलगाव चाहते हैं. बाहर और भीतर की सीमाओं पर तनाव है।
पर सेना नहीं है, खुद उसमे बंटवारा चल रहा है. मुट्ठी भर हथियार, दर्जन भर जहाज, और फौजी.. उनका भी रेजीमेंट दर रेजिमेंट बंटवारा होना है…..कुछ पाकिस्तान जाएंगे, कुछ इंग्लैंड.
राज्य नहीं है, पुलिस नहीं है, अफसर भी आधे इंग्लैंड लौट रहे हैं. जहां थोड़ी कुछ व्यवस्था है, अभी पक्की नहीं है…. नियम नहीं बने, कोई विधान नहीं है. चारो ओर धुंधलका, आतुर आंखों की आशायें, धुआं..
और जलते मांस की गंध..
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ऊबे जवाहर ने क्या, ऊपर तिरंगे को देखा होगा?
पिता तो नहीं रहे, तो पितातुल्य के पैरों में बैठकर कुछ सोचा जाये. पूछा जाये- इसकी गिरहें कहाँ से सुलझाना शुरू करूँ, बताओ न बापू.
पर वो निठुर भी इस वक्त पास नहीं …..दूर बैठा है, हजारों मील.. कलकत्ता की हैदर मंजिल. मियांवली की झुग्गी बस्ती में पनाह लिया वो वृद्ध, आजादी से उत्साहित नहीं. दंगे रोकने के लिए एक मुसलमान के घर सोया है.
गांधी दिल्ली आज नहीं लौटेंगे…
कल भी नहीं….अगले हफ्ते भी नहीं….वो दंगाग्रस्त इलाकों जाएंगे. जलती बस्तियों के बीचोबीच, नंगे पैर घूमेंगे.
इसलिए कि जिस धरती पर इतना खून मिला हो, उस पर चप्पल पहनकर कैसे चलें!!
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नेहरू ने फिर तिरंगे की ओर देखा होगा, और ताकत बटोरकर उन टिमटिमाती आंखों के सामने, वे मशहूर शब्द कहे होंगे! रात को जाग कर लिखा भाषण, पढ़ा होगा.
भीतर जलता हुआ दीपक जैसे सामने औरों को रोशन करे.
भाषण खत्म होता है.
सामने खड़े लाखों हाथ उठते हैं. तालियां बजाते हैं….जलसा खत्म, यह तसवीर ले ली जाती है.
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जिसे आज आप देख रहे हैं, पचास, सौ या दो सौ साल बाद भी यह तसवीर देखी जाएगी. जो दिखता है, वो तो सब देखेंगे. जो नहीं दिखता, कुछ ही लोग देख सकेंगे.
आपने देखा??
यह महान दृश्य है.
❤️ “
कब बोलोगे?
आग लग चुकी
शहर जल चुके
लाशों के
अंबार लग चुके
मुंह खोलोगे?
कब बोलोगे?
देशभक्ति का
क्या मतलब है?
लोकतंत्र का
यही सबब है?
दुनिया भर में
तुम डोलोगे
हर भाषण में
मत तोलोगे?
लोग मर रहे
कब बोलोगे?
इसको रोको
उसको रोको
जेल में भर दो
सड़क पे ठोको
दुनिया अब तो
थूक रही है
तुम कब अपना
मुंह खोलोगे?
देखो उनके
चेहरे देखो
दर्द की मारी
चीखें देखो
दया नहीं
आती है बिल्कुल?
कलप नहीं
उठती है भीतर?
उन चेहरों में
बहनें अपनी
माएं नहीं
दिखती हैं एक पल?
अगर नहीं तो
जाने दो फिर
क्यों बोलोगे
क्या बोलोगे
ज़हर तुम्हारा
देश की नस में
धीरे-धीरे
उतर रहा है
तीन रंग के
बीच में बैठा
न्याय का पहिया
सुबक रहा है
सारे रंग उतर जाएंगे
तब बोलोगे?
कब बोलोगे?
A science-based solution for a major challenge - edible oil where our dependency is more on import. This approval will allow for the development of more high yielding mustard cultivars @aks_gene https://t.co/zWaHybYoDq
Indian farmers are feeding the world.
Egypt approves India as a wheat supplier. Modi Govt. steps in as world looks for reliable alternate sources for steady food supply.
Our farmers have ensured our granaries overflow & we are ready to serve the world.
https://t.co/h56oSc3HDC
आज़ादी महान देशों को अनगिनत शहादतों से मिलती है।हमें-आपको मिली है तो इसका आदर करिए और इसे अक्षुण्ण रखने की सोचिए।जिनकी स्वयं की प्रासंगिकता, तात्कालिक-सत्ताओं की ग़ुलामी के कारण बरकरार है उनकी टीका-टिप्पणियों से हमारे महान और गौरवशाली शहीदों के सम्मान पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता🇮🇳🙏
Edible oils sold as kachi ghani, or cold press, aren't so. It's apparently just a brand name and "doesn't represent it's true nature". Most brands do this. Why allow such deceptive marketing to fool consumers? @fssaiindia
The government of India has granted conditional permission to 10 organizations for drone use. Bayer is one of them, got permission to conduct drone based agricultural research activities and agricultural spraying. @Bayer4Crops
https://t.co/wf25HvbRZx
"अज्ञानतिमिरांधस्य ज्ञानंजनशलाकया
चक्षुरून्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः"
जीवन की प्रथम शिक्षक माँ से लेकर आजतक जिन्होंने भी ज़रा भी कुछ सिखाया उन सब "गुरु-चरणों" में मेरा शीश सादर विनत है ! आज 'गुरु-पूर्णिमा' के अवसर पर, संसार के समस्त गुरूओं को सादर प्रणाम ! 🙏🏻
It is such a wonderful contribution. It not only saves foreign exchange on seed imports, bring down the cost of production for the farmers by reducing the sprays required.
https://t.co/LUidImN22F
India became the first Country in the world to use Drones for Locust control after finalising the protocols and standard operating procedure. This added a new dimension to aerial spray capabilities.#AgriBudget21
प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रिया को निर्धारित कर ड्रोन से टिड्डी नियंत्रण करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना। इससे हवाई स्प्रे क्षमताओं में एक नया आयाम जुड़ा। #AgriBudget21
भारत ने प्रत्येक नियंत्रण के स्थल का रणनीतिक तरीके से रेखांकन करके विश्व के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत किया, जहाँ पर पैदा होने वाले हापर्स को उनके मार्ग में ही मार दिया गया और इस प्रकार टिड्डियों की भावी आबादी के विकास को रोका गया। #AgriBudget21