@Prof_Cheems बथुकम्मा से अम्मा और तेलंगाना से गाना लेकर भी ट्रिक बन सकती थी कि अम्मा गाना गाती है या अम्मा बच्चों को गाना सुनाती है।
लेकिन ना, वायरल होना है सबको जल्दी जल्दी।
इन ऑनलाइन वालों ने शिक्षा को मजाक बना दिया है।
Meet Ravish Kumar:
• He claims that YouTubers can’t cover every state because they don’t have the resources.
• He has made more than 100 videos on Gaza.
• He ran an Israel–Gaza series for 70 days.
• He has made more than 20 videos on the Iran–US conflict.
• He has made 7 videos on the New York mayor.
• But he doesn’t have the resources to cover the Jharkhand protest.
भगवान हनुमान जी भक्ति, शक्ति और अटूट समर्पण के अद्वितीय प्रतीक हैं। महाबली की कृपा से उनके सभी भक्तों में साहस और सकारात्मकता का संचार हो।
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि॥
चुनाव आयोग को BLOs पर पड़ते दवाब और कथित रूप से हो रही मृत्यु पर ध्यान देना चाहिए। उत्तर प्रदेश से आ रहा समाचार हृदयविदारक है। शिक्षक ने अपनी आत्महत्या का एक कारण SIR का दवाब भी बताया
है।
मुझे लगता है कि सरकारी शिक्षक सरकारी तंत्र का ‘गधा’ है। उसका दुरुपयोग शिक्षण के अलावा हर तरह के कार्यों के लिए होता है। अतिरिक्त कार्यों के लिए, जो सदैव होंगे, सरकार को संविदा पर या स्थायी रूप से उसी कार्य के लिए लोग रखने चाहिए।
सरकारी शिक्षक हल्दी का भार नापने से ले कर चुनाव के कार्य, जनगणना आदि में लिप्त रहता है। उसका यह कार्य नहीं है। @PMOIndia को इस पर कोई समाधान लाना चाहिए ताकि शिक्षक अपना भी स्तर उठा सके।
शिक्षक तभी शिक्षा में ध्यान दे पाएगा जब ये डिस्ट्रैक्शन हटाए जाएँगे। आप उन्हें इनसे मुक्त करो, तब आप इनसे यह आशा कर सकते हैं कि सरकारीपना त्याग कर शिक्षा पर ध्यान दे।
ST समाज का नाम है यहाँ। इन्हें ब्राह्मणों की बीवी-बेटी और माँ चाहिए। जेनोसाइड से कम पर नहीं मान रहे बेचारे। और ऐसे हैंडलों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
ईरान में लोकतन्त्र नहीं है,मौलवियों का राज है। तुम्हारे जैसे भौंकने वालों को वहां फांसी दे दी जाती है। सुप्रीम लीडर ख़ुद मौलवी है, और यहां का प्रधानमंत्री मंदिर के लिए पूजा में बैठ जाता है तो तुम्हे दस्त लग जाते हैं। खमनई बिना चुनाव के 36 साल से वहां राज कर रहा है। वहां का–बा, का–बा करके फोटो शूट नहीं करवा सकती, औरतों के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य है । शोषण, उत्पीड़न, दमन आम बात है। आतंक के पोषण पर जनता के कल्याण से ज़्यादा पैसा खर्च किया जाता है। अवाम बेहाल है और विरोध में आंदोलन होते रहते हैं, जिन्हें कुचल दिया जाता है।
तुम्हारा हीरो दुनिया में आतंक की फैक्ट्री चलाता है @nehafolksinger
कभी कहते हो सारी संपत्ति पे उनका कब्ज़ा था, फिर कहते हो भीख मांगते थे!
मतलब संपत्ति रखकर भी भीख मांगते थे??
कभी कहते हो निक्कमे थे, फिर कहते हो सारी पढ़ाई खुद ही कर ली!
मतलब निक्कमे होकर भी पढ़ते थे??
कभी कहते हो जाति बनाई, हमपर जबर्दस्ती लागू कर दिया!
मतलब 7-8 हज़ार जातियों और 25-30 हज़ार उपजातियों का flowchart बना के दिया, और तुम नानुकर किये आजतक मान रहे हो, ये जानते हुए की सब ग़लत है??
और तब भी ग़लती उनकी ही है??
तो मनोहर कहानियों के जितेंद्र,
एक बात बताओ-
तुम ख़ुद मूर्ख हो या तुमको बाकी सारे लगते हैं??😂😂😂