10 साल की बेटी रोज़ स्कूल से लौटकर बाथरूम में बंद हो जाती थी, माँ ने नाली में यूनिफॉर्म का फटा कपड़ा देखा और सच निकला—“वो कहते थे, मैं गंदी हूँ”, फिर 7 बच्चों का दर्द सामने आया और पूरा स्कूल कांप उठा
PART 1
10 साल की अनाया हर दोपहर स्कूल से लौटते ही जैसे घर में नहीं, किसी आग से बचकर भागती हुई घुसती थी—बस्ता फर्श पर पटकती, जूते आधे उतरे छोड़ती और सीधे बाथरूम का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लेती।
पहले-पहल मीरा ने इसे बच्चों वाली आदत समझा। दिल्ली की गर्मी, स्कूल की धूल, बस की भीड़—शायद बच्ची को पसीने से चिढ़ होती होगी। मगर धीरे-धीरे वह आवाज़ मीरा के दिल पर हथौड़े की तरह पड़ने लगी—दरवाज़े की कुंडी, पानी का तेज़ बहना, और फिर लंबे समय तक भीतर से कोई जवाब नहीं।
अनाया कभी ऐसी नहीं थी। वह पहले घर आते ही रसोई में झांकती, “मम्मा, आज आलू पराठा है?” कहकर हँसती, फिर अपनी दादी सावित्री के कमरे में जाकर स्कूल की छोटी-छोटी बातें सुनाती। कभी रिबन खो देती, कभी मोज़े गंदे कर लाती, कभी कॉपी पर चटनी गिरा देती। वह सफाई को लेकर इतनी डरी हुई बच्ची नहीं थी।
लेकिन पिछले 2 महीनों से सब बदल गया था।
उस दिन भी वही हुआ। दक्षिण दिल्ली के उनके छोटे से फ्लैट का दरवाज़ा खुला, अनाया अंदर आई, चेहरा पीला, आँखें नीचे। उसने मीरा की तरफ ठीक से देखा भी नहीं। बस्ता सोफे के पास गिरा और वह दौड़कर बाथरूम में घुस गई।
मीरा ने धीरे से दरवाज़ा खटखटाया।
“अनाया, बेटा, पहले कुछ खा ले। सुबह से टिफिन भी पूरा वापस आया है।”
अंदर कुछ सेकंड चुप्पी रही।
फिर आवाज़ आई, “बस 5 मिनट, मम्मा।”
लेकिन वह 5 मिनट कभी 5 मिनट नहीं होते थे। कभी 20, कभी 30, कभी उससे भी ज़्यादा।
शाम को जब अनाया बाल सुखाते हुए बाहर आई, उसकी आँखें लाल थीं। मीरा ने उसके कंधे पर हाथ रखा।
“बेटा, तू रोज़ आते ही नहाने क्यों भागती है?”
अनाया ने तुरंत मुस्कुराने की कोशिश की। मुस्कान चेहरे पर थी, आँखों में नहीं।
“मुझे साफ रहना अच्छा लगता है, मम्मा।”
वह जवाब इतना सीधा था कि किसी और माँ को तसल्ली हो जाती। लेकिन मीरा के भीतर कुछ और गहरा डूब गया। वह जवाब अनाया का नहीं लग रहा था। जैसे किसी ने उसे याद करवाया हो। जैसे उसे बताया गया हो कि यही कहना है।
रात को खाने की मेज़ पर भी अनाया चुप रही। दादी ने पूछा, “स्कूल में किसी से लड़ाई हुई क्या?”
अनाया ने सिर हिला दिया। पिता रोहित उस समय दुकान से लौटे ही थे। लाजपत नगर में उनकी छोटी सी साड़ी की दुकान थी। उन्होंने थकी आवाज़ में कहा, “बच्चे हैं माँ, मूड बदलता रहता है। इतना मत सोचो।”
लेकिन माँ का दिल हिसाब से नहीं चलता।
लगभग 1 हफ्ते बाद बाथरूम की नाली जाम हो गई। पानी फर्श पर रुकने लगा। सुबह अनाया स्कूल गई तो मीरा ने रबर के दस्ताने पहने और नाली की जाली निकाली। उसे लगा बालों का गुच्छा होगा। उसने पतली सी सफाई वाली रॉड अंदर डाली और धीरे-धीरे खींचा।
कुछ नरम सा अटककर बाहर आया।
पहले उसे बाल दिखे। फिर उनमें उलझे बेहद महीन कपड़े के रेशे।
मीरा ने नल के नीचे उन्हें धोया।
मिट्टी और साबुन की परत हटते ही नीले-सफेद चौखाने उभर आए।
मीरा की साँस अटक गई।
यह अनाया की स्कूल यूनिफॉर्म की स्कर्ट जैसा ही कपड़ा था।
उसने काँपते हाथों से रेशों को फैलाया। कुछ हिस्से ऐसे थे जैसे कपड़े को जोर से रगड़ा गया हो, जैसे किसी ने खींचकर नोचा हो। मीरा का गला सूख गया। तभी उसकी नजर एक हल्के भूरे धब्बे पर अटक गई। पानी से फीका पड़ा हुआ, पर अब भी साफ।
यह मिट्टी जैसा नहीं था।
यह सूखे खून जैसा था।
मीरा पीछे हट गई। बाथरूम की सफेद टाइलें अचानक डरावनी लगने लगीं। घर में दादी पूजा के लिए अगरबत्ती जला रही थीं, रसोई में चाय चढ़ रही थी, बाहर सब्ज़ी वाले की आवाज़ आ रही थी—पर मीरा के कानों में सिर्फ पानी की आवाज़ गूंज रही थी।
उसने तुरंत अनाया की अलमारी खोली। यूनिफॉर्म की दूसरी स्कर्ट ठीक से तह की हुई थी, पर पहली वाली नीचे के कोने में दबाई गई थी। उसके किनारे पर हल्की सिलाई नई दिख रही थी, जैसे किसी ने जल्दबाज़ी में फटा हिस्सा छिपाने की कोशिश की हो।
मीरा के हाथ सुन्न हो गए।
उसने कपड़े के रेशे एक छोटे प्लास्टिक पाउच में रखे और स्कूल का नंबर मिलाया।
“नमस्ते, मैं अनाया मेहरा की माँ बोल रही हूँ। कक्षा 5 बी। मैं बस पूछना चाहती थी… क्या स्कूल में पिछले दिनों कोई हादसा हुआ? चोट? गिरना? किसी ने कुछ बताया?”
दूसरी तरफ रिसेप्शनिस्ट कुछ देर चुप रही।
वह चुप्पी सामान्य नहीं थी।
फिर धीमी आवाज़ आई, “मैडम… क्या आप अभी स्कूल आ सकती हैं?”
मीरा का दिल जैसे पसलियों से टकराया।
“क्यों? क्या हुआ है?”
रिसेप्शनिस्ट की आवाज़ और नीचे गिर गई।
“क्योंकि आप पहली माँ नहीं हैं, जो ऐसी बात पूछ रही हैं।”
2 पार्ट कमैंट्स बॉक्स में
@Badasslayqueen I never wanted to shoot pre wedding, but husband did. Never forget the moment they played on wedding reception in front of everyone, it was made on simple punjabi song.. embarrassing till date
@Theholisticpsyc He is there when I need him but he is overprotective & made some important decisions of my life without giving me a choice & after his answer is ,I have asked you...it your choice, like yes....
Dear women,
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@Badasslayqueen I wore light pink on my wedding in 2019 in India, & I was only brides from 9 brides who were getting ready same time in parlor and everyone was like, is it really your wedding days ? Because nobody was wearing pink as bride on wedding day but nowadays celebrities made it trend