भारत की श���क्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है।
ज़रा स��चिए - देशभर के परिवार जितना पैसा सिर्फ़ NEET की तैयारी पर ख़र्च करते हैं, वो भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है।
आज कोटा से, और देश के हर कोने से, लाखों युवा एक सुर में कह रहे हैं - इस व्यवस्था ने हमारे साथ अन्याय किया है।
हर युवा अलग है, पर सबकी कहानी एक - या तो सपने देखने नहीं दिए गए, या देखे हुए सपने तोड़ दिए गए।
‘छात्रों की गूंज’ सिर्फ़ अभियान नहीं - एक क्रांति है। हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी है जो आपको बड़े सपने देखने का हक़ दे और आपकी ज़िंदगी गिरवी रखे बिना, उन्हें पूरा करने में आपका साथ दे।
#ChhatronKiGoonj
पता है, भारत की सिर्फ़ 5 परीक्षाओं - NEET, JEE, SSC, UPSC और RRB की तैयारी पर छात्र और उनके परिवार हर साल कितना ख़र्च करते हैं?
₹3.5 लाख करोड़।
यानी भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट का लगभ��� तीन गुना। शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान और महिला-बाल विकास - इन पाँच मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर।
और बदले में करोड़ों युवाओं को क्या मिलता है? तनाव, अनि��्चितता, बेरोज़गारी, और टूटते सपने।
जो ख़र्च सरकार की ज़िम्मेदारी है, उसका बोझ आज परिवार उठा रहे हैं।
#ChhatronKiGoonj
राहुलगांधी जी ने कोटा में "छात्रों की गूंज" रैली में NEET,JEE और सिविल सेवा अभ्यर्थियों ���े सीधा संवाद कर पेपरलीक, परीक्षा रद्दीकरण और बढ़ती फीस पर चिंता जताई
"देश की शिक्षा व्यवस्था बच्चों पर दबाव डालती है,उन्हें तनाव देती है उन्हें कुचल देती है देशके लिए बिल्कुल भी अच्छा नही है"
म��डिया पर भरोसा क्यों खत्म है?
ईरान भारत के नागरिकों की मौत का बदला क्यों लेगा?
भारत एक संप्रभु देश है। भारत इतना असहाय है? कि उसके नागरिकों का न्याय भी दूसरे देशों के भरोसे लिखा जाए।
अगर भारतीयों की जान गई है, तो सबसे पहले भारत की प्रतिक्रिया और भारत के हित की बात होनी चाहिए, न कि किसी दूसरे देश की कार्रवाई को भारतीयों के बदले के रूप में पेश करना।
तीन भारतीय मारे गए हैं- ओमान के पास एक टैंकर पर अमेरिकी कार्रवाई में|
ऐसे समय में देश को जवाब चाहिए, संवेदना चाहिए|
साहब विदेश जा चुके है । और इधर टीवी स्टूडियो में सवाल यह है कि भारत का मान कितना बढ़ गया, दोस्त कितने बन गए ���र दुनिया हमें कैसे देखती है।
कमाल की देशभक्ति है ?
एक तरफ़ जब भारतीयों की अर्थियाँ उठ रही हों, तब आत्मप्रशंसा आत्ममुग्धता कितनी शोभा देता है ?
राष्ट्र का सम्मान अपने नागरिकों के सम्मान और सुरक्षा से है।
हमारे PM trump को thank you tweet कर सकते है- मगर इसपे सवाल नहीं ? 💔💔💔💔
छुट्टी का अर्थ क्या है?
विदेश यात्राएँ भी, मंदिर दर्शन भी, लक्षद्वीप के समुद्र तट भी देखे गए, समुद्र के भीतर की तस्वीरें भी आईं।
अगर विदेश यात्रा, धार्मिक यात्रा, समुद्र तट पर जाना, प्रकृति के बीच समय बिताना, अच्छा भोजन करना और आराम करना भी छुट्टी नहीं है,
तो फिर मुझे लगता है इस देश में कोई भी छुट्टी नहीं ले रहा।
हर आदमी काम ही कर रहा है - कोई मनाली में काम कर रहा है, कोई गोवा में, कोई परिवार के साथ, कोई दोस्तों के साथ।
2014 से 2026 के बीच प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए। असली बहस यह है कि इन दौरों से भारत को कितना निवेश मिला, कितने रोजगार बने और व्यापार हितों को कितना लाभ हुआ?
देश का आम आदमी नहीं देखता कि नेता ने कितने घंटे काम किया, वह देखता है कि उसके जीवन में क्या बदला।
जिस युवा का पेपर लीक हो गया, जिस किसान को फसल का दाम नहीं मिला, जिस मरीज को अस्पताल म��ं बेड नहीं मिला, जिस परिवार की नौकरी चली गई - उसे 18 घंटे और 20 घंटे के से क्या फर्क पड़ता है?
18 घंटे काम करने का काम का परिणाम क्या निकला? शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और नागरिक सुरक्षा के मोर्चे पर देश कहाँ पहुँचा।
युवा पूछ रहा है कि डिग्री के बाद नौकरी कब मिलेगी?
��म आदमी भी अपनी नौकरी में भी 12-14 घंटे खटता है, मजदूर धूप में पूरा दिन काम करता है, किसान बिना रविवार के खेत में उतरता है।
सवाल यह नहीं कि किसने कितने घंटे काम किया। सवाल यह है कि उस काम का परिणाम क्या निकला।
अगर काम का पैमाना सिर्फ घंटे हैं, तो इस देश का सबसे बड़ा कर्मयोगी शायद वह मजदूर है जो रोज़ दो वक्त की रोटी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देता है।
आदरणीय दैनिक जागरण आपके किस बेवक़ूफ़ पत्रकार ने ये झूठी खबर आपको दी कि @abhijeet_dipke को लखनऊ में बोलने का मौका नहीं मिला?
इको गार्डन में @abhijeet_dipke बोले भी और गोदी मीडिया हाय-हाय के नारे भी लगे।
Hyderabad Let’s Unite On June 14th in a protest at 9:30 AM at Dharna Chowk, Hyderabad to demand the resignation of Dharmendra Pradhan.
కాక్రోచ్ జనతా పార్టీ మన తెలంగాణకి వస్తోంది, ఏకమవుద��ం, కేంద్ర విద్యాశాఖ మంత్రి రాజీనామా అడుగుదాం. జూన్ 14వ తేదీ ఉదయం 9:30 గంటలకి ధర్నా చౌక్ లో కలుద్దాం.