उप्र के फ़र्रूख़ाबाद में जन्माष्टमी उत्सव देखने निकली दो बच्चियों की लाशें पेड़ पर लटकी मिलना, एक बेहद संवेदनशील घटना है।
भाजपा सरकार इस मामले में तत्काल निष्पक्ष जाँच करे और हत्या के इस संदिग्ध मामले में अपनी आख्या प्रस्तुत करे। ऐसी घटनाओं से समाज में एक भयावह वातावरण बनता है, जो नारी समाज को मानसिक रूप से बहुत गहरा आघात पहुँचाता है।
‘महिला सुरक्षा’ को राजनीति से ऊपर उठकर एक गंभीर मुद्दे के रूप में उठाने का अपरिहार्य समय आ गया है।
जंतर-मंतर पर जब दिल्ली पुलिस द्वारा माननीय श्री अखिलेश यादव जी को गिरफ्तार किया जा रहा था, तब उनकी सुरक्षा में तैनात जवानों ने जिस तरह हम सबके नेता के साथ मजबूती से खड़े रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाई, वह देखने लायक था।
आसपास मौजूद बड़े-बड़े अधिकारी भी देखकर चौंक गए कि ऐसे सुरक्षा बल भी होते हैं, जो अपनी ड्यूटी सिर्फ औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाते हैं।
जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी मिली है, उसके लिए अपनी जान की परवाह न करना, चोट लगने या हाथ-पैर टूटने तक की परवाह न करना और जरूरत पड़ते ही जहाँ जरूरत हो वहाँ तुरंत पहुँच जाना—यही सच्चे कर्तव्य और समर्पण की पहचान है।
इन जवानों ने यह साबित कर दिया कि सुरक्षा का मतलब सिर्फ दूर खड़े होकर निगरानी करना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर ढाल बनकर अपने दायित्व के साथ खड़ा होना भी है।
ऐसे सुरक्षाकर्मियों का हौसला बढ़ना चाहिए।
इनकी निष्ठा से सीख लेनी चाहिए और इनके समर्पण पर गर्व होना चाहिए।
माननीय श्री अखिलेश यादव जी की सुरक्षा में तैनात सभी जवानों को दिल से सलाम। 🙏❤️
आज इन लोगों की नींद खुली है और इससे पहले भारतीय जनता पार्टी की आईटी सेल द्वारा किस तरह से गाली गलौज करते थे अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते थे बहन बेटियों को अपमानित करते थे तब किसी की भावनाएं आहत क्यों नहीं हुई?
हरिचंद दत्तनगर, थाना नवाबगंज, जिला गोंडा
जमीन छुड़वाने के लिए एक साल से दर-दर भटक रहा गरीब परिवार।
अरे मुख्यमंत्री जी, एक साल हो गया!
कम से कम इस गरीब की फरियाद तो सुन लीजिए।
जब एक गरीब अपनी ही जमीन के लिए अधिकारियों और दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते थक जाए, तो आखिर वह जाए तो जाए कहाँ?
क्या गरीब को न्याय पाने के लिए भी सत्ता के दरवाजे तक पहुँचना पड़ेगा?
मुख्यमंत्री जी, अगर सरकार गरीबों की है तो इस परिवार की पुकार भी सुनिए और उसकी जमीन का मामला जल्द सुलझाइए।
देखना इस वीडियो के बाद इसी बेचारे करीब पर कार्रवाई कर दी जाएगी आवाज दबाने के लिए
#गोंड #उत्तर_प्रदेश
यूपी सरकार केंद्र सरकार का अनुदान भी अपने प्रचार में खर्च कर रही हैं?
आज आवास आपरेटरो को निकालने का मौखिक आदेश यह कह कर कर दिया गया कि उनके पास तनख़्वाह देने को पैसे नहीं है, फिर ये लाखों नौकरियों की फ़र्ज़ी घोषणाएँ क्यों?
ये एक ऐसे ही कर्मचारी की पीड़ा है जिसने मुझे ये मैसेज भेजा है-@myogiadityanath@ChouhanShivraj@yadavakhilesh
यह जो वीडियो आप देख रहे हैं यह कोई गांव की वीडियो नहीं
यह राजधानी लखनऊ के चारबाग से होकर आलमबाग जाने वाली मुख्य सड़क मार्ग जो की मवैया छत्ते वाला पुल भी कहा जाता है
डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के विधानसभा की यह वीडियो है
जो सड़क गड्ढे में तब्दील हो चुकी है और अत्यधिक जल भराव होने के कारण आने जाने वाले राहगीरों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है उत्तर प्रदेश सरकार जहां गड्ढा मुक्त सड़कों की बात करती है आप देख सकते हैं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कों का हाल क्या है कौन है इसका जिम्मेदार कब तक गड्ढा मुक्त होगी यह सड़क!
@brajeshpathakup जी
माननीय श्री @yadavakhileshजी जिस प्रकार की योजना जिस प्रकार का विकास जिस प्रकार का समाज सेवा करते चले आ रहे हैं
आप तो एक नर्स को किसी अस्पताल में नौकरी नहीं दे पाए
लिखते हो उपमुख्यमंत्री
@brajeshpathakup जी
सो गए क्या?
लगता है रील बनाते-बनाते आप थक चुके हैं।
जरा यह वीडियो भी देखिए और जागो, उठो!
जिला बलरामपुर की यह बहन रात में अपने बच्चों को बचाने के लिए आखिर किसके दरवाजे पर जाए?
रील और प्रचार बाद में भी हो जाएगा,
पहले इस बहन की आवाज़ सुनिए और उसके बच्चों की सुरक्षा की चिंता कीजिए।
सवाल सिर्फ एक है आखिर यह बहन जाए तो जाए कहाँ?
क्या अब इस्तीफा नहीं माँगा जाएगा?
क्या अब “अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश” वाला भाषण नहीं दिया जाएगा?
जब सत्ता से बाहर थे, तब हर अपराध पर सवाल उठते थे, इस्तीफे माँगे जाते थे और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस होती थी।
लेकिन आज वही सवाल सत्ता के सामने खड़े हैं तो आवाज़ इतनी धीमी क्यों हो गई?
क्या अब चित्रा त्रिपाठी, सुधीर कुमार, रूबिका लियाकत जैसे तमाम चेहरे भी कानून-व्यवस्था के सवाल पर उसी तरह आवाज़ उठाएंगे?
सवाल सीधा है—सिद्धांत सत्ता के साथ बदलते हैं या सवाल पूछने का साहस?
जनता सब देख रही है, सब याद रख रही है।
आपका लेवल इससे ज्यादा है कहां इनके चक्कर में पड़े
एक कल भी ₹2 हो पर पोस्ट करने वाले आज भी ₹2 पर पोस्ट करेंगे
इससे ज्यादा इनकी क्षमता नहीं इनको जवाब देकर अपना समय ना खराब करें हमें लगता है सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश ने इन सबको पहचान चुके हैं
यह सिर्फ अपने पेट तक ही सीमित रहेंगे