सबको लगता है कि 2020 हमारी जिंदगी का सबसे बुरा साल था... लेकिन इतिहासकार इससे बिल्कुल सहमत नहीं हैं! 🤯💀
इतिहास के पन्नों में एक साल ऐसा भी दर्ज है जिसे आधिकारिक तौर पर "मानव जाति का सबसे खौफनाक साल" कहा जाता है। न कोई वर्ल्ड वॉर हुई, न आसमान से कोई उल्कापिंड गिरा... फिर भी अचानक एक दिन आसमान काला पड़ गया और दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी खत्म हो गई। 📉🌍
आखिर उस खौफनाक साल में ऐसा क्या हुआ था जिसने बड़े-बड़े साम्राज्यों को मिट्टी में मिला दिया? 🤔
जानने के लिए पूरा वीडियो देखें और सोचें... अगर आप उस दौर में होते, तो क्या बच पाते? 👇
#WorstYearEver #HistoryNerd #HistoricalMysteries #DarkAges #FactsInHindi #FascinatingFacts #ReelsIndia #ViralHistory #DidYouKnow
⭕LIVE NOW
दुनिया तबाह होने में कितने साल?
ये 13 घटनाएं होने पर खत्म होगी दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी!
भविष्य मालिका की वो बात जो आपको किसी ने नहीं बताई
📍 https://t.co/RwcBlzltLC
सूरदास जी की असली भविष्यवाणी. साल 1951 में प्रकाशित पुस्तक से
ओरिजिनल भविष्यवाणी मे 'जग दशा फिरे' या "सुख की दशा फिरे" लिखा है न की 'जगदीशा फिरे' | यानी इसमें विश्व की स्थिति बदलने की बात कही गई है ना की भगवान के आने की!
यह उस समय की बात है जब अष्टग्रह कुट पड़ा था। पुराणों में अष्टग्रह कुट के समय कल्कि भगवान का जन्म होने की बात कही गई है। यह योग कई हज़ार सालों में पड़ता है और 1962 में पड़ चुका है। अब हमारे जीवनकाल में नहीं होने वाला यह!
__________________________________________________________
PROOFS:
https://t.co/ttlEWIn4jc
https://t.co/3cDC9C8mrs
https://t.co/B259UZ7g2h
कलियुग में सम्प्रदाय विहीन मन्त्र निष्फल होंगे - गर्ग संहिता
वामनके अंशसे विष्णुस्वामी और ब्रह्माजीके अंशसे मध्वाचार्य होंगे। शेषनागका अंश रामानुजाचार्यके रूपमें प्रकट होगा तथा सनकादिका अंश निम्बार्काचार्यके रूपमें। ये कलियुगमें सम्प्रदायके प्रवर्तक आचार्य होंगे। ये चारों विक्रम संवत्सरके प्रारम्भिक कालमें ही होंगे और इस भूतलको अपने सम्पर्कसे पावन बनायेंगे। सम्प्रदायविहीन मन्त्र निष्फल माने गये हैं; अतः सभी मनुष्योंको सम्प्रदायके मार्गसे ही चलना चाहिये। इन सम्प्रदायोंमें पापोंका नाश करनेवाली श्रीकृष्ण-कथा होती है। ब्राह्मणोंमें श्रेष्ठ नारायणपरायण वैष्णवजन इन कथाओंका प्रवचन एवं प्रसार करते हैं।
सत्ययुगमें किसीके किये हुए पापसे सारा देश लिप्त होता है। त्रेतामें ग्राम, द्वापरमें कुल और कलियुगमें केवल कर्ता ही उस पापसे लिप्त होता है। सत्ययुगमें ध्यान, त्रेतामें यज्ञोंद्वारा यजन और द्वापरमें भगवान्की अर्चना करके मनुष्य जिस पुण्यफलका भागी होता है, उसीको कलियुगमें केवल ‘केशव’का नाम-कीर्तन करके मनुष्य पा लेता है। सत्ययुगमें जो सत्यकर्म दस वर्षोंमें सफल होता है, वह त्रेतामें एक ही वर्षमें, द्वापरमें एक ही मासमें तथा कलियुगमें केवल एक दिन-रातमें सफल हो जाता है।
सब धर्मोंसे रहित घोर कलियुग प्राप्त होनेपर जो मानव भगवान् वासुदेवकी आराधनामें तत्पर रहते हैं, वे निस्संदेह कृतार्थ हो जाते हैं। नरेश्वर! मनुष्योंमें वे लोग निश्चय ही सौभाग्यशाली और कृतार्थ हैं, जो कलियुगमें श्रीहरिके नामोंका स्मरण करते और कराते हैं। ‘कृष्’ शब्द ‘सर्व’ का वाचक है और ‘ण’कार ‘आत्मा’ का। इसलिये जो सर्वात्मा परब्रह्म है, वही ‘कृष्ण’ कहा गया है। परब्रह्मस्वरूप, वेदोंका सारतत्त्व तथा परात्पर वस्तु ‘कृष्ण’—ये दो अक्षर ही सम्यक् रूपसे जपनेके योग्य हैं।
@ZilleSubhani_1 Because I'm going to share many more things apart from Bhavishya Malika and I need to build trust. Because in past I have shared many wrong Bhavishya Malika interpretations by simply believing people who I used to trust. Now I will share everything only in my name.
भविष्य मालिका में उपाय भी लिखा है और हमने कई बार शेयर भी किया है लेकिन वो कोई देखता नहीं ! मालिका में लिखा है की जो श्री हरी के नाम का आश्रय लेगा एवं सत्य, शान्ति, दया, क्षमा का अवलंबन करके रहेगा वो अवश्य बचेगा | जो मांसाहार मदिरा और व्यसन करेगा, अपशब्द यानी की गालियाँ आदि बोलेगा वो सब नहीं बाख पायेंगे | जो काम क्रोध लोभ मोह मद और मात्सर्य से दूर होंगे वे भक्त अवश्य बचेंगे |
सत्य भांजा जी ने भविष्य मालिका के हवाले से बताई हुई चौकाने वाली भविष्यवाणी
👉 3 मिनट में मौत: [13:17] कोरोना के बाद एक ऐसी खतरनाक बीमारी आएगी, जिससे मात्र 3 मिनट (180 सेकंड) में लोगों की जान चली जाएगी, जिससे विश्व की करीब 75% आबादी नष्ट हो सकती है।
👉 पूर्वी उड़ीसा जलमग्न: [05:32] 2030 तक एक भयंकर सुनामी के कारण पूर्वी उड़ीसा के छह तटीय जिले (बालेश्वर, भद्रक, केंद्रपाड़ा, जाजपुर, जगतसिंहपुर, पुरी, गंजाम) हमेशा के लिए पानी में डूब जाएंगे।
👉 दलाईघाई बांध का टूटना: [06:25] उड़ीसा का दलाईघाई बांध फिर से टूटेगा (जैसे 1982 में हुआ था) और एक भारी जल प्रलय आएगा, जिससे आधा भारत प्रभावित होगा।
👉 वैज्ञानिक यंत्रों का विफल होना: [15:00] भविष्य में ऐसे हालात बनेंगे कि सभी वैज्ञानिक यंत्र काम करना बंद कर देंगे और विज्ञान मनुष्य का साथ छोड़ देगा।
👉 रक्त की नदियां बहना: [30:24] बाहरी शत्रुओं के आक्रमण और भारत के भीतर गृह युद्ध के कारण गंगा से लेकर गोदावरी तक रक्त की नदियां बहेंगी।
👉 भगवान की पूजा का अंत: [30:55] लोगों का भगवान पर से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा और भगवान की पूजा हमेशा के लिए बंद हो जाएगी।
👉 आसमान से शून्य वाणी: [33:53] रामायण और महाभारत काल की तरह आसमान से अजीब आवाजें (शून्य वाणी) सुनाई देंगी, जो कलयुग के अंत का संकेत होंगी।
https://t.co/IcWtJupQmE
पूरी दुनिया में भगवान का सब से प्रिय कौन है? इसका जवाब स्वयं भगवान श्री कृष्ण के द्वारा
जो व्यक्ति इस परम रहस्यमय ज्ञान (गीता के उपदेश) को मेरे भक्तों में फैलाता है या उन्हें समझाता है, वह मेरी परम भक्ति को प्राप्त करता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि अंत में वह सीधे मुझको ही प्राप्त होगा (यानी उसे मोक्ष मिलेगा)।
इस पूरी दुनिया में मनुष्यों के बीच उस व्यक्ति से बढ़कर मेरा कोई प्रिय कार्य करने वाला नहीं है। और न ही भविष्य में कभी इस पृथ्वी पर मुझे उससे बढ़कर कोई और प्रिय होगा।
भविष्य मालिका में वर्णित अणाक्षर मन्त्र क्या है?
भक्ति और आध्यात्मिक मार्ग के गूढ़ रहस्यों में, अनाक्षर मंत्र (या अनाहत मंत्र) उस ध्वनि या अवस्था को कहते हैं जिसकी उत्पत्ति किसी शब्द, वर्ण (अक्षर) या जिह्वा के उच्चारण से नहीं होती। यह शाश्वत और स्वतः स्फुरित ध्वनि (अनहद नाद) है, जिसे केवल आंतरिक चेतना से ही सुना और अनुभव किया जा सकता है। [1, 2]
धार्मिक और आध्यात्मिक रहस्यों में अनाक्षर मंत्र के मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:
प्रणव (ॐ) का सर्वोच्च रूप: वेदों और उपनिषदों में ओंकार को 'एकाक्षर' (एकमात्र अक्षर) माना गया है, लेकिन जब चेतना इस अक्षर के भी पार शून्य (निर्गुण-निराकार अवस्था) में लीन हो जाती है, तब वह 'अनाक्षर' या अशब्द अवस्था कहलाती है।
अनहद नाद: ध्यान और साधना की गहन अवस्था में बिना किसी बाह्य साधन (जैसे शंख, घंटी) के भीतर से सुनाई देने वाली अनवरत दिव्य ध्वनि ही अनाक्षर मंत्र है।
शब्द से परे की अनुभूति: साधारण मंत्रों में शब्दों का उच्चारण करना पड़ता है, लेकिन अनाक्षर का अर्थ है—जहाँ शब्दों की सीमा समाप्त हो जाए और केवल मौन या शुद्ध चेतना (दिव्य ऊर्जा) का स्पंदन शेष रहे।
भक्ति मार्ग में इसका महत्व:भक्त जब प्रभु के नाम या रूप में पूरी तरह लीन हो जाता है (अजपा जाप की स्थिति), तो उसका मन मौन हो जाता है। उस मौन अवस्था में हृदय में जो स्वतः ईश्वर की उपस्थिति और प्रेम का स्पंदन होता है, वही अनाक्षर मंत्र या अजपा गायत्री है। यह साधक को जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाता है।
भविष्य मालिका के बारे में विश्व को कब पता चलेगा इसके बारे में महापुरुष अच्युतानंद दास जी की पंक्तियाँ
लक्षे पञ्चाअशि ग्रन्थ मुहिँ कलि पद पद्य़ाबळी तेर । तिनिश अठर माळिका करिछि रहि नेमाळ बटर |
बरड़ाळ मोर शिररे लागिब कोठधनटि मुकुळा । श्री अच्य़ुती दास भक्त खोजु अछि लगाइण माय़ालीळा ॥
नळिन बन ये से नेमाळ ग्राम अच्य़ुती आश्रम जाण । निर्बिकळ्प पीठ अटइ सेस्थान मणिबेदीटि प्रमाण ॥
अपोड़ा अलिपा निअँइठा स्थान ब्रह्मा न पाइले अन्त । कळि गुप्तगङ्गा चित्रोत्पळा नदी कहइ दीन अच्य़ुत |
- चकड़ा मड़ाण, महापुरुष अच्य़ुतानन्द दास
मैंने (अच्युतानंद दास ने) एक लाख पचासी (1,85,000) ग्रंथों और तेरह (13) पदावलियों की रचना की है। नेमाल ग्राम के वट वृक्ष के नीचे रहकर मैंने तीन सौ अठारह (318) मालिकाएँ (भविष्यवाणियों के ग्रंथ) लिखी हैं। नेमाल स्थित उस वट वृक्ष की शाखाएं मेरे सिर को स्पर्श करेंगी और ज्ञान रूपी यह गुप्त खजाना सबके लिए खुल जाएगा। (यह घटना कुछ साल पहले हो चुकी है) श्री अच्युत दास अपनी माया-लीला रचकर अपने सच्चे भक्तों की खोज कर रहे हैं। इस नेमाल ग्राम को कमल के वन (नलिन वन) के समान पवित्र अच्युतानंद का आश्रम जानो। यह स्थान एक 'निर्विकल्प पीठ' है और भगवान जगन्नाथ की मणिबेदी (रत्नवेदी) के समान ही प्रामाणिक और पवित्र है। यह एक ऐसा शुद्ध और पवित्र स्थान है जो बिना जले, बिना लीपे और बिना जूठा हुए (भौतिक अशुद्धियों से परे) रहता है, जिसकी महिमा का अंत स्वयं ब्रह्मा भी नहीं पा सके। दीन अच्युत कहते हैं कि कलियुग की 'गुप्त गंगा' यहाँ बहने वाली चित्रोत्पला नदी ही है।