पहले रिश्तेदार विदा होंगे
फिर दोस्त कहेंगे विदा
उनके पीछे-पीछे जाएगी तुम्हारी आस्था
प्यार भी अपने पैर खींच लेगा
पीछे की ओर
मृत्यु और बेरोज़गारी चीज़ ही ऐसी है।
- पराग पावन
@RTforIndia_ Inko bihar up se Bahar koi janta tk nhi h . Har jagah brahman ka sahara lete h . Mai bhut sare logo ko janta hun jiske purkhe kbhi janew nhi pehante the . Kuch Salo se ye bhi shuru kr diya.
@ajeetbharti Sarkar saath nhi degi to kuch nhi hoga bhai . Abhi ghaziabad m giraftari ho gyi .wo yogi ki police the . Ye sab political hindu h sabki vote chahiye hindu ka
@Profdilipmandal जयसवाल तो हमेशा से.संपन्न रहा है ,मंडल जी । उनको आरक्षण की क्या जरूरत है । सामाजिक स्टेटस भी बढ़िया रहा है इनका , पुरे बिहार से लेकर उत्तरप्रदेश तक ।
@th_anonymouse@VivekGa54515036@authornilotpal चेले रहे होंगे.वो शुरुआती दौर.था. लेकिन पिछले कुछ सालों से इन्होंने कई टिप्पणी कोंचिग के लूटपाट और दुर्व्यवस्था पर की है. कई बार बिना लाग- लपेट के दिव्यकीर्ति को भी लताडा है .
फोगाट के बहाने, इंडी गई अपनी…
ऑलम्पिक में सर्वाधिक घटिया निर्णय, लम्बे समय से, बॉक्सिंग के होते रहे हैं। इस वर्ष भी निशांत के साथ वही हुआ। सबको पता था कि विजेता वही है, पर रेफरी ने उल्टा निर्णय दिया। किसी मकर द्वार पर कोई सांसद नहीं आया, किसी वामपंथी हलालापुत्र ने IOA को गाली नहीं दी, किसी भी भड़वे मुंजाल, आचार्य आदि ने कार्टून नहीं बनाए कि मोदी के हाथ में कमल है और उसने कुछ नहीं किया।
विनेश के साथ जो हुआ, उसमें उत्तरदायी विनेश ही है, सरकार नहीं। सरकार का दायित्व कोच, प्रशिक्षण, इक्विपमेंट देने तक है, न कि हर घंटे भार मापने का। वह कार्य एथलीट और उसके व्यक्तिगत दल का है। ऐसा कई बार एथलीट के साथ होता भी है। इसमें किसी भी तरह से विनेश अपराधी नहीं है।
विनेश के प्रति जितना प्रेम इंडी समर्थकों का दिख रहा है, उससे अधिक प्रेम भाजपा समर्थकों ने दिखलाया क्योंकि उसकी जर्सी पर भारत लिखा हुआ है। एक खिलाड़ी के रूप में अनन्य सम्मान।
परंतु, यह प्रेम जो इंडी के #%^*& दिखा रहे हैं, वो विनेश या भारत के प्रति प्रेम नहीं, मोदी के प्रति घृणा है जो बिना नियमों को पढ़े, यह कह रहे हैं कि फ्रांस पर हमला कर दो, ऑलम्पिक से वापस आ जाओ। यही हरामखोर पाकिस्तान से भी क्रिकेट खेलना चाहते हैं।
इनका राष्ट्रप्रेम निशांत वाले निर्णय पर दिखता तो समझ में आता, पर उससे राजनीति नहीं चलती। इन्होंने कभी यह बताया कि इसी सरकार ने खेल गाँव में एसी की व्यवस्था न होने पर उसका प्रबंध किया?
मैं इन्हें गाली इसलिए देता हूँ क्योंकि इनके लिए मेरे पास अभिव्यक्ति के और शब्द हैं ही नहीं। ये इसी के रसिक हैं। ये वो लोग हैं जो पिछली बार से कम मेडल आने पर, इस बार वापस मोदी को कोसेंगे। ये चन्द्रयान के फ्लॉप होने के लिए पूजा पर बैठने वाले दोगले हैं। इनकी हर बात में राजनीति है।