#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
600 साल पुराना रहस्य,
कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं। कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ज्येष्ठ पूर्णिमा को सशरीर प्रकट हुए
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं।
2Days Left Kabir Prakat Diwas
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
क्या वेद बता सकते हैं भगवान कौन है?
जी हाँ, और जवाब है कबीर साहेब!
ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा कभी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेता, वह शिशु रूप में प्रकट होता है। वही कबीर साहेब हैं।
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#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते। वे सन् 1398, विक्रमी संवत् 1455 में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमल के पुष्प पर शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे। यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात् परमात्मा का प्राकट्य था।
2Days Left Kabir Prakat
कबीर साहेब प्रकट दिवस वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडो के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओ को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया। जीव उदारन तुम को तारन, सीधा जग में आया।।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
600 साल पुराना रहस्य, आज भी काशी की धरती गवाह है!कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं। कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
"कबीर साहेब प्रकट दिवस" वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्त्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया।
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कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते। वे सन् 1398, विक्रमी संवत् 1455 में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमल के पुष्प पर शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे। यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात् परमात्मा
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#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ,
जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर
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जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है कबीर भगवान आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं।
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#संतरामपालजी_का_वरदान#शुद्ध_जल_पियेगा_हिंदुस्तान
गांव फरमाणा लुजान को मिला नया जीवन - सोनीपत के गांव फरमाणा लुजान में संत रामपाल जी महाराज के शुद्ध पेयजल अभियान और पशुधन बचाओ, शुद्ध जल पिलाओ अभियान के तहत बड़ी सहायता पहुंची। ⤵️ https://t.co/bRO4FQmfdm
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गांव मेहरडा, सोनीपत - संत रामपाल जी महाराज द्वारा नहर के समीप बोरिंग के लिए 130 फुट पीवीसी पाइप, केबल, स्टार्टर, नट-बोल्ट और सभी आवश्यक उपकरण निशुल्क प्रदान किए गए। जनहित के इस कार्य से सोनीपत के पूरे गांव में हर्ष और उत्साह का
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