वक़्त बदलता है....
इतिहास का पहिया घूमता है.... और न्याय के तराज़ू में तौल कर न्याय करता है..
नादिर शाह जब दिल्ली को लूट कर ईरान लौटा..... कोहेनूर सहित इतनी दौलत ले गया कि ईरान की आवाम को पूरी एक पीढ़ी टैक्स नहीं देना पड़ा...
हिंदुस्तान से लुटी दौलत से उसने मशहद शहर को चमकाया.... भव्य बनाया...
तहरान भी उसी दौर में कबीलाई दौर से नगर बना.....
पर आज न वो नादिर शाह की लूटी दौलत है... न उसके द्वारा नगरों को दी भव्यता..
महज़ 300 साल से भी कम वक़्त गुज़रा है..
नगर और दौलत सब मिट्टी...
हालत ये है कि नादिर शाह का वही ईरान QR कोड डाल कर हिन्दुस्तानियों से भीख मांग रहा है.... अपने घायलों के इलाज़ को... अपने बच्चों की भूँख मिटाने को.... नादिर शाह और उसकी फ़ौज के कुनबे वाले हमारे आगे कटोरा ले खड़े हैं....
और में इनके बेशर्म चेहरों पर थू@... क कर इन्हे 14300 ईरानी रियाल जरूर दूंगा...
आज के हिंदुस्तान का एक रुपया....
लुटेरों की भिखारी औलादों 1 रूपया की भीख जरूर दूंगा तुम्हे!!
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगभग धमकी देते हुए कहा है कि “आज या कल बीजेपी दिल्ली से चली जाएगी… फिर जहां भी तुम मिलोगे, मैं तुम्हें जनता के हवाले कर दूंगी… ”
क्या ममता बनर्जी Dog whistling कर रही हैं?
@SP_Pratibha । @SinghRanu18
@Rose_____000 बेचारा रोहन
धर्म भी गया और धन ( किडनी) भी गया।
ऊपर से दोषी भी साबित किया गया।
मोहब्बत करो मगर मोहब्बत में अंधा ना बनो चाहे संबंध जितना भी नजदीक का हो।
पहले आत्मा फिर परमात्मा।
UGC की हालिया गाइडलाइंस से संबंधित संसदीय समिति दिग्विजय सिंह (कांग्रेस) की अध्यक्षता में थी, जिसने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी, और इसके आधार पर UGC ने जनवरी 2026 में नए नियम अधिसूचित किए।
सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स के अनुसार, समिति में लगभग 50% सदस्य भाजपा (BJP) से थे। नीचे दल-वार सदस्यों की सूची है।
कांग्रेस (INC)
दिग्विजय सिंह (अध्यक्ष/Chairman)
वर्षा एकनाथ गायकवाड़
अभिजीत गंगोपाध्याय
डीन कुरियाकोस
अंगोमचा बिमोल अकोइजाम
भाजपा (BJP) — सबसे अधिक सदस्य
संबित पात्रा
रविशंकर प्रसाद
घनश्याम तिवाड़ी
बृजमोहन अग्रवाल
शोभनाबेन बारैया
दर्शन सिंह चौधरी
हेमांग जोशी
डी. पुरंदेश्वरी
करण भूषण सिंह
बांसुरी स्वराज
कामाख्या प्रसाद तासा
रेखा शर्मा
डॉ. भीम सिंह
संगीता यादव
डॉ. सिकंदर कुमार
अन्य दल
TMC: सुष्मिता देव, रचना बनर्जी, कालिपदा सरेन केरवाल
CPI(M): बिकाश रंजन भट्टाचार्य
DMK: टी. सुमथी
NCP: सुनेत्रा अजित पवार, अमर शरद्राव काले
AAP: हरभजन सिंह
समाजवादी पार्टी: जितेंद्र कुमार दोहरे, ज़िया उर रहमान, राजीव राय।
30 में से 17 सदस्य सवर्ण बताए जा रहे हैं।
ब्रेकडाउन:
ब्राह्मण: 8
क्षत्रिय/राजपूत: 2
वैश्य: 1
भूमिहार: 1
कायस्थ: 2
अन्य सामान्य (General/Other): 3
बाकी सदस्य:
OBC: 8 (जैसे Yadav, Jat, Koli, Maratha आदि)
SC: 2
ST: 2
Christian/Muslim/Other: 2
जब सवर्णों के नेता (17/30) ही उनके दुश्मन बने बैठे हैं तो बाकियों की क्यों दोष देना?
🔴 UGC का नया नियम – पूरा सच क्या है?
UGC का पूरा नाम University Grants Commission है।
यह भारत सरकार की वह संस्था है जो देश के कॉलेज और यूनिवर्सिटी के लिए नियम बनाती है।
UGC का मुख्य काम:
• विश्वविद्यालयों की मान्यता तय करना
• शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना
• कॉलेजों को सरकारी अनुदान देना
• छात्रों और शिक्षकों के लिए नियम जारी करना
नया विवाद क्यों हुआ?
UGC ने उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने और समान अवसर देने के लिए नए नियम (Regulations) लागू किए हैं।
इसके तहत हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में:
• Equity / Equal Opportunity Cell बनाना
• भेदभाव की शिकायत की व्यवस्था
• संस्थान द्वारा निगरानी और रिपोर्टिंग
अनिवार्य की गई है।
👉 यह कोई संसद से पास हुआ कानून नहीं है,
👉 लेकिन UGC के नियम मानना सभी संस्थानों के लिए ज़रूरी होता है।
अब विरोध क्यों हो रहा है?
असल समस्या नियमों की भाषा और संरचना को लेकर है।
UGC ने “भेदभाव” की परिभाषा बहुत खुली और अस्पष्ट रखी है।
इससे सवाल उठते हैं:
• भेदभाव तय कौन करेगा?
• झूठी शिकायत का क्या?
• आरोप लगते ही कार्रवाई तो नहीं होगी?
सवर्ण (General Category) नाराज़ क्यों हैं?
क्योंकि पहले से ही:
• प्रवेश में आरक्षण
• नौकरी में आरक्षण
• प्रमोशन में आरक्षण
मौजूद है।
अब अगर शिकायत प्रणाली भी एकतरफ़ा दबाव में चली गई,
तो Merit और Neutrality खत्म होने का डर है।
सवर्णों को लगता है कि
“भेदभाव रोकने के नाम पर कहीं सामान्य वर्ग के साथ ही भेदभाव न होने लगे।”
असली बात क्या है?
✔ भेदभाव होता है — इसे नकारा नहीं जा सकता
❌ लेकिन नियम संतुलित और स्पष्ट होने चाहिए
समस्या नीयत में नहीं,
समस्या नियमों के डिज़ाइन और अस्पष्ट शक्तियों में है।
निष्कर्ष:
UGC का उद्देश्य गलत नहीं है,
लेकिन नियमों में संतुलन, स्पष्टता और निष्पक्षता ज़रूरी है।
समाधान टकराव से नहीं, संतुलन से
अपनी राय अवश्य दे 🙏🙏