इतनी मुद्दत बा'द मिले हो
किन सोचों में गुम फिरते हो
इतने ख़ाइफ़ क्यूँ रहते हो
हर आहट से डर जाते हो
तेज़ हवा ने मुझ से पूछा
रेत पे क्या लिखते रहते हो
काश कोई हम से भी पूछे
रात गए तक क्यूँ जागे हो
मोहसिन नक़वी
मोहब्बत की कमी
लफ़्ज़ों से पूरी कर रहा था मैं
मगर जब आज
मैं सच-मुच में उस को चाहता हूँ
उसे मुझ से शिकायत है ख़मोशी की
कोई बतलाए उस को
ये ख़मोशी ही तो सच्च��� है
वो सारे लफ़्ज़ झूटे थे
- शारिक़ कैफ़ी
#यौमे_पैदाइश
अपनी तबाहियों का किसी से गिला नहीं
ये वारदात सिर्फ मेरा वाक़या नहीं
.
इस शहर के हुजूम में गुम हो गए हैं लोग
आवाज़ दे रही हूँ कोई बोलता नहीं
.
- बरखा रानी • #Dayaar
कभी हम को यक़ीं था ज़ोम था दुनिया हमारी जो मुख़ालिफ़ हो तो हो जाए मगर तुम मेहरबाँ हो
हमें ये बात वैसे याद तो अब क्या है लेकिन हाँ इसे यकसर भुलाने में अभी कुछ दिन लगेंगे
ज़ावेद अख़्तर