#बिरसा_मुंडा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले, आद���वासी अस्मिता के प्रतीक, धरती आबा भगवान #बिरसा_मुंडा जी की पुण्यतिथि पर उन्हे�� कोटि- कोटि नमन जोहार 🌺🙏
#बिरसा_मुंडा_पुण्यतिथि
नैशनल कॉन्क्लेव ऑन स्ट्रेंदनिंग आइटीडीए/आईटीडीपी के दौरान माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी ने जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य एवं विकास के महत्व पर बल देते हुए कहा, "शिक्षा और स्वास्थ्य के बल पर ही किसी भी व्यक्ति या समुदाय का विकास संभव होता है। जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों में सिकल सेल एनीमिया की समस्या ओडिशा में सबसे अधिक है। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत 7 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। लेकिन केवल स्क्रीनिंग करने से काम नहीं होगा। ल��गों को जागरूकता की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में सिकल सेल से संबंधित जीन का प्रसार रुके और यह दूसरों तक न फैले।"
#JanjatiyaGarimaUtsav #JJGU #TribalDevelopment #MoTA #SabseDoorSabsePehle
@narendramodi @PMOIndia @rashtrapatibhvn @jualoram @Dduikey @pibindia @mygovindia @AmritMahotsav
200 tribal scholars. One extraordinary opportunity.
Representing excellence in research, higher education, and global learning, these bright young minds from tribal communities came together for a special interaction with the Hon’ble President of India under Janjatiya Garima Utsav 2026.
Their journeys reflect the transformative power of education and the aspirations of a new generation contributing to the vision of Viksit Bharat.
#BirsaLivesInNewBharat #JanjatiyaGarimaUtsav #TribalScholarships #MoTA
@narendramodi@PMOIndia@rashtrapatibhvn@jualoram@Dduikey@pibindia@mygovindia@AmritMahotsav@nstfdc_in
बस्तर के नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों में करीब 39 वर्षों तक नि:शुल्क सेवा देने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।
महाराष्ट्र से आकर इस दंपति ने अबूझमाड़ और बारसूर जैसे कठिन इलाकों में लोगों का मुफ्त इलाज किया, स्वास्थ्य जागरूकता फैलाई और नशामुक्ति अभियान चलाया।
#PadmaShri #Bastar #GodboleCouple #SocialService #Healthcare
#माता_रमाबाई भीमराव अम्बेडकर कि पुण्यतिथि पर शत् शत् जोहार नमन 🌺🙏🏹🌴🌾
हमारी भाषा, संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान, पूजा-पद्धति सभी धर्मो से अलग है
#वनवासी_नहीं_मुल_मालिक_है
फिर जबरन ये हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, लंगटा-लोग का ठप्पा हम पर क्यू लगा रहें हो भड़वो??
#होटवार_में_हैवानियत
रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल (होटवार) में मुस्लिम महिला कैदी के यौन शोषण और शारीरिक उत्पीड़न को लेकर राज्य की कानून-व्यवस्था और पर कई सवाल खड़े किए हैं;
सीएम हेमंत सोरेन जी की विधायक पत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन महिला सुरक्षा और नारी सशक्तिकरण पर विदेशों में व्याख्यान देती फिरती हैं, होटवार पर चुप्पी क्यों ?
न्यायिक अभिरक्षा (Judicial Custody) तक में महिला सुरक्षित नहीं तो बाकी जगहों का क्या ?
आखिर पीड़ित महिलाओं की गुहार सुनेगा कौन? झारखंड राज्य महिला आयोग पिछले करीब 6 साल से पूरी तरह निष्क्रिय और अध्यक्ष व सदस्यों के बिना ठप पड़ा है। जबसे सीएम हेमंत सोरेन सत्ता में आए हैं l
झारखंड सरकार से कुछ भी उम्मीद करना बेमानी हैl @NCWIndia संज्ञान ले l
@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 (NCM Act, 1992) की धारा 2(c) के अनुसार मुस्लिम, ईसाई, सिक्ख, पारसी, बौद्ध और पारसी समुदाय 'अल्पसंख्यक' (Minority) हैं। 27 जनवरी 2014 को जारी भारत का राजपत्र इसकी पुष्टि करता है। माननीय आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में माना कि 'ईसाई' धर्म में जाति व्यवस्था नहीं होती है। सी.सेल्वारानी बनाम विशेष सचिव-सह-जिला कलेक्टर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ईसाई धर्म अपनाने (धर्मान्तरण) के बाद व्यक्ति 'आरक्षण' और 'जाति प्रमाण पत्र' का हकदार नहीं रहता।
ऐसे में सवाल उठता है कि झारखण्ड में चर्च और ईसाई मिशनरियों के एजेंट किस आधार आदिवासियों को गुमराह करते ह���ं कि ईसाई धर्म में धर्मान्तरण होने के बाद भी जाति नहीं बदलता है जबकि आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में माना कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं होता है। सी.सेल्वारानी बनाम विशेष सचिव-सह-जिला कलेक्टर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ईसाई धर्म अपनाने (धर्मान्तरण) के बाद व्यक्ति 'आरक्षण' और 'जाति प्रमाण पत्र' का हकदार नहीं रहता। फ़िर धर्मान्तरित ईसाइयों का किस आधार पर जाति प्रम��णपत्र बन रहा है?
27 जनवरी 2014 को जारी भारत का राजपत्र स्प्ष्ट करता है कि ईसाई एक 'अल्पसंख्यक' समुदाय है न कि 'आदिवासी' समुदाय। लेकिन दशकों से आदिवासियों के आरक्षण पर कुंडली मारकर धर्मान्तरित ईसाई स्वयं को आदिवासी बताते हैं। और आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों का लाभ उठाते हैं। आदिवासियों का आरक्षण का लाभ उठाकर ईसाई समुदाय सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से शसक्त हो गये हैं जबकि आदिवासी आज भी ह��शिये पर हैं। आदिवासियों का सामाजिक न्याय हेतु धर्मान्तरित ईसाइयों का डलिस्टिंग बहुत आवश्यक है।
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पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सरना एवं सनातन परंपराओं के प्रगाढ़ संबंध, प्रकृति उपासना, तप, आस्था और लोक संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।
इस पूजा में अग्नि पर चलना, भगवान शिव की आराधना, प्रकृति के प्रति श्रद्धा और सामूहिक लोक आस्था स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो आदिवासी सरना संस्कृति और सनातन परंपरा के आत्मीय जुड़ाव को दर्शाती है।
झारखंड की धरती पर सदियों से सरना और सनातन परंपराएं एक-दूसरे के पूरक बनकर सामाजिक समरसता, प्रकृति संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देती रही हैं।
मंडा पूजा इ���ी सांस्कृतिक एकता, श्रद्धा और परंपरा का जीवंत उदाहरण है।
जय धर्मेश 🌿🏳
हर हर महादेव 🚩
जय सरना • जय सनातन • जय झारखंड✊️
#sarna #sanatan