पश्चिम बंगाल में सांसद श्री अभिषेक बनर्जी पर हुए जानलेवा हमले की मैं कड़ी निंदा करता हूँ। लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेदों का उत्तर हिंसा नहीं हो सकता। किसी भी जनप्रतिनिधि पर इस प्रकार का हमला लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना पर सीधा प्रहार है भाजपा देश में लोकतंत्र को कुचलने का कार्य कर रही है । भाजपा हराओं लोकतंत्र बजाओं
योगी सरकार में "आरक्षण की लूट" जारी है🔥
UPSSSC ने अभी थोड़ी देर पहले "सहायक लेखाकार" का विज्ञापन जारी किया है।
जिसका पदवार विवरण निम्न है👇
कुल पद - 609
UR - 536
OBC-09
SC - 04
ST - 00
EWS - 60
संवैधानिक आरक्षण के नियमों के तहत OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से 164 पद मिलना चाहिए था लेकिन मिला केवल 09 पद,
यानी OBC वर्ग के 155 पदों को लूट लिया गई।
वही SC वर्ग को 21 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से मिलना चाहिए था 127 पद लेकिन मिला केवल 04 पद,यानी SC वर्ग के 123 पदों को लूट लिया गया।
जबकि ST वर्ग को 2 प्रतिशत के हिसाब से मिलना था 12 पद लेकिन मिला 00 पद, यानी ST वर्ग के 12 पदों को लूट लिया गया।
सवाल यही है कि OBC,SC,ST वर्ग के छात्रों के संवैधानिक अधिकारों को कब तक लूटा जाएगा??
मैने विगत संसद सत्र में प्रयागराज तथा अन्य शहरों में रहकर तैयारी करने वाले प्रतियोगी छात्रों की आवाज उठाई थी।
चाहे बेरोजगारी रही हो,पेपरलीक रहा हो, आरक्षण रहा हो या फिर NFS(not found suitable)।
अगले संसद सत्र में पंचायत सहायकों तथा प्राइमरी शिक्षक भर्ती का मुद्दा उठाया जाएगा।
#Release_UPPrimaryTeachersVacancy
#अल्प_मानदेय_6000
माता पिता पीछे खड़े हैं बेटी आगे आकर, SDM को फटकार लगाते हुए पानी की समस्या बताई।
दरअसल महू विधानसभा के शेरपुर पंचायत के ग्राम जुलवानिया में पानी की एक एक बूंद के लिए ग्रामीण परेशान हैं, कई बार प्रार्थना पत्र देने के बावजूद अधिकारियों ने समस्या का समाधान नहीं किया।
आज महू तहसील में पहुंचकर ग्रामीणों ने पानी की मांग को लेकर आवाज उठाई, जहां एक लड़की ने पानी की समस्याओं को लेकर SDM साहब से तीखी नोक झोंक की। जब युवा आगे आएंगे तब बदलाव भी आएगा। क्योंकि बूढ़े बुजुर्ग माता पिता को अधिकारी लोग डांटकर भगा देते हैं।
📍इंदौर मध्यप्रदेश📍
भारत में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली से होती है, जिसमें कोई खुली परीक्षा या प्रतियोगिता नहीं होती।
हाल ही में नियुक्त जस्टिस Sheel Nagu, N. V. Anjaria, Sanjeev Sachdeva, Arun Palli और V. Mohana भी इसी सिस्टम से आए हैं।
आरक्षण पर सबसे ज्यादा शोर मचाने वालों को यह कॉलेजियम सिस्टम नजर नहीं आता।
देश का युवा नौकरी के लिए सालों तक परीक्षा, कटऑफ और इंटरव्यू की लड़ाई लड़ता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति बंद कमरों में होती है।
सवाल है कॉलेजियम में SC, ST, OBC और वंचित वर्गों का सामाजिक प्रतिनिधित्व कहाँ है?
मेरिट का पैमाना क्यों सिर्फ आम युवाओं पर ही लागू होता है?
लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता के साथ-साथ पारदर्शिता और सामाजिक जवाबदेही भी जरूरी है।