चार महीने पहले तक नेहा बोरा कोई जानता नही था. आज CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सबसे बड़ा चेहरा नेहा बोरा हैं.
नेहा बोरा दो दिन से लगातार CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रही हैं.
आज उन्हें तीन बार डिटेन किया गया. तीनों बार डिटेन से निकल कर प्रदर्शन करने लग जाती.
कल तक एक्स पर उनके 92K फॉलोवर्स थे. 12 घंटे में 105K फॉलोवर्स हो चुके हैं. नेहा बोरा की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है और उनकी आलोचना करने वालों की तादाद भी बढ़ती जा रही है.
GEN Z के लिए क्रैश हैं तो सत्ता पक्ष के लिए टेंशन बन चुकी हैं. सामाजिक न्याय की समर्थक होने के कारण पूरा बहुजन समाज भी नेहा बोरा को समर्थन कर रहा है.
दुनिया के कीसी भी धर्म में इतनी क्रूर जाति-व्यवस्था नहीं होगी, जितनी टनाठन धर्म में है।
ये कौवे को बाप मानेंगे, गाय को मां मानेंगे लेकिन इन्सान को इन्सान नहीं मानेंगे।
जातिवाद राष्ट्रीय कलंक है। इसको खत्म करने के लिए SC ST act में फांसी की सजा अनिवार्य हो चुकी है।
ये कटिहार के बूथ संख्या 222 पर मकान नंबर 82 है। S.I.R कराने के बाद ज्ञानेश कुमार यहां भी नंगा हुआ है। इस टूटे जर्जर मकान में 197 वोटर रहते हैं।
ये मकान 20 साल से बंद है।
वोट चोर, गद्दी छोड़!
#Arrest_GyaneshKumar
प्रियंका भारती ने अगर मनुस्मृति के पन्नों को लाइव डिबेट में नही फाड़ा होता तो आज हम लोग बहुत सी बातों को जान नही पाते.
मनुस्मृति का पन्ना फटने से HINDU EKTA का नारा बेनकाब हो गया और मैनस्ट्रीम मीडिया में एंकरों चयन प्रक्रिया पर सबसे बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है,
मैनस्ट्रीम मीडिया के अधिकतर न्यूज़ एंकर एक विशेषजाति से क्यों हैं. इन न्यूज़ एंकरों को मनुस्मृति से इतना लगाव क्यों है ?
मैनस्ट्रीम मीडिया अपने संस्थानों में एंकरों और पत्रकारों की भर्ती कैसे करता है. भर्ती करने के लिए कौन सी प्रक्रिया या प्रतियोगिता अपनायी जाती है ?
यह सब इतना गुप्त क्यों है ?
न्यूज़ चैनलों को सरकारी नौकरी की तरह खुली प्रतियोगिता आयोजित होनी चाहिए. पता तो चले कौन कितना पढ़ा लिखा और टैलेंटेड है.
इंटरव्यू में जाति पूछकर नौकरी पर रखने की प्रक्रिया न्यूज़ चैनलों को बंद करनी चाहिए.
कुमार जायेगा
तो पांडे आएगा
पांडे जायेगा तो कुलकर्णी आएगा
कुलकर्णी जायेगा तो जोशी आएगा..
जोशी जायेगा तो भागवत आएगा
भागवत जायेगा तो आगरकर आएगा
आगरकर जायेगा तो तेंडुलकर आएगा
काँग्रेस जाएगी bjp आयेगी
bjp आयेगी काँग्रेस जाएगी
EVM है तो हार्ड ब्राम्हण जायेगा सॉफ्ट ब्राम्हण आएगा
EVM है तो सॉफ्ट ब्राम्हण जायेगा हार्ड ब्राम्हण आएगा
ये खेल जितना जल्दी समज सखे तो समझो
बामसेफ
ज्ञानेश कुमार गुप्ता को हलफनामा देना होगा, अपना जुर्म कबूल करना होगा, तीसरा कोई विकल्प नहीं है।
"लोकतंत्र के कसाई" को लोकतंत्र की हत्या करने की इजाजत नहीं दे सकते!
Gyanesh bro, listen this clear message from united Opposition
जहाँ एकतरफ भारत की मनु मीडिया पत्रकारिता के नाम पर दलित छात्र साहिल वागोड़े का चरित्र हनन कर रही है तो दूसरी तरफ इंटरनेशनल मीडिया सही मायने में पत्रकारिता कर रही है ।
उम्मीद है आप समझ गए होंगे कि क्यों भारत की मनु मीडिया की रैंकिंग 180 देशों में 157 है ।
नीतू मैम @NeetuSingh202 SC/ST से जातिवादी नफ़रत छोड़कर माफ़ी मांग लीजिए, आपका झूठा प्रॉपगेंडा एक्सपोज़ हो गया है।
सच्चाई ये है कि NEET में माइनस में एडमिशन सबके लिए खुला था, निचले कट ऑफ पर सबसे ज्यादा एडमिशन जनरल ने ही लिया था।
Video : @Therajatmourya
आईआईटी में पढ़ने वाले एक एक्स स्टूडेंट ने बताया जैसे ही SC ST और OBC समाज के स्टूडेंट IIT में आते हैं
वो देखते हैं उनके समाज का फैकल्टी में कोई भी प्रोफेसर या अधिकारी नही है.
IIT में सवर्ण प्रोफेसरों का वर्चस्व है. दूसरा सबसे बड़ा डरावना बात है कि IIT के कैंपस में आरक्षण को एक गाली की तरह पेश किया जाता है.
सवर्ण स्टूडेंट आपस में खुलकर आरक्षण के खिलाफ बात करते हैं. SC ST स्टूडेंट यह माहौल देखकर खुद को IIT के कैंपस अलग थलग पाता है.
एक्स स्टूडेंट ने कहा अगर कोई शिकायत है तो SC ST सोचते हैं किससे कहा जाए. कारण IIT का पूरा वातावरण आरक्षण विरोधी नजर आता है.
अभी तक बहुजन समाज का कोई नेता IIT में सवर्ण समाज के प्रोफेसरों के ओवर रिप्रजेंटेशन को मुद्दा नही बना पाया.
किसी भी सेक्टर या इंस्टीट्यूशन में ओवर रिप्रजेंटेशन का अर्थ है अवैध कब्जा. भारत के सभी समुदाय जाति का प्रतिनिधित्व IIT में होना चाहिए. यह केवल डाइवर्सिटी नही, रोजगार का भी मुद्दा है. सभी बड़े रोजगार मुट्ठीभर जातियों को क्यों दिया जा रहा है ?