हे प्रभु न किसी का फेका हुआ मिले न किसी का छिना हुआ मिले , मुझे बस मेरे नसीब में लिखा हुआ मिले, ना मिले भी तो कोई गम नहीं ,मुझे बस मेरी मेहनत का किया हुआ मिले.
@deounion@samrat4bjp@DitBihar उर्मिला क्यों करेगी पैमेंट ये सब इस घठिया संघ के कारण किसी का भला नहीं हो रहा है। उर्मिला द्वारा पैमेंट का मतलब जाल में फँसना।
राज्यभर में @bsedc द्वारा कार्यरत सभी कर्मियों का वेतन पिछले 3 महीनों से लंबित है। #बिहार_सरकार और #बेल्ट्रॉन के वरिष्ठ पदाधिकारी इसके लिए पूर्ण जिम्मेदार है। 20000 अल्प वेतनभोगी परिवार की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ रहा है। यथाशीघ्र नीतिगत फैसले लें।
@officecmbihar@samrat4bjp
पूरा बेल्ट्रॉन में ही खोट है जो भी मुख्यमंत्री बने तो सबसे पहले इसके कर्मचारी का जांच होना चाहिए
हम तो कब से बता रहे है इसमें आधा कर्मचारी 1 डिस्ट्रिक्ट और 1 कास्ट का ही है
#Beltron में खोट तो है. नहीं तो नाराजगी और असंतोष इतना नहीं होता. हमने कल बताया था, बिहार सरकार मैनपावर आउटसोर्सिंग में बेल्ट्रॉन की मोनोपॉली तोड़ने पर विचार कर रही है. विभागों को दायित्व मिल सकता है. बस इस सूचना ने बेल्ट्रॉन से संबद्ध हजारों कर्मियों को खुश कर दिया. कमेंट्स से स्पष्ट होने लगा कि कथित शोषण से ये मुक्ति चाहते हैं. लेकिन, बेल्ट्रॉन का कंपनियों के साथ गड़बड़झाला ऐसा है कि पूछिए मत. आरोप और शिकायतें सुना रहे लोग, सरकार को ध्यान देना चाहिए.
हमने तो कहा ही है बिहार सरकार अभी परिवर्तन की अवस्था में है. इसलिए, नई सरकार के बनने के बाद सच-झूठ / जाल-फरेब सब बयां करेंगे. खैर, कल के पोस्ट पर आई टिप्पणियों के अवलोकन से ये बातें सरकार के संज्ञान में जरुर आनी चाहिए –
1. बहाल कर्मी बेल्ट्रॉन की वर्तमान व्यवस्था से मुक्ति चाहते हैं. वह बेल्ट्रॉन को एसएससी की तरह जरुर मानने को तैयार हैं, लेकिन किसी निजी कंपनी के गुलाम नहीं होना चाहते.
2. कर्मियों की आउटसोर्सिंग की जिम्मेवारी अलग-अलग विभागों को मिले, तो ये अधिक खुश होंगे. वे सरकार को मालिक मानना चाहते हैं.
3. वेतन भुगतान में विसंगति की शिकायत है. लेकिन इसका निपटारा इतना आसान नहीं है, यह हम भी समझते हैं. पर, सरकार से विचार की अपेक्षा सभी रखते हैं.
4. इन्हें गुस्सा तब आता है, जब बेल्ट्रॉन कहता है, कंपनी से बात करो. और, कंपनी इन्हें सुनने को तैयार नहीं होता. कोई रिस्पांस सिस्टम नहीं है.
5. शिकायत है, सरकार को नियमानुकूल जांच करना चाहिए जीएसटी मामले की. वैसे भी मानदेय कम है, फिर 18 प्रतिशत की जीएसटी कटौती इसलिए हो रही, क्योंकि ज्ञात- अज्ञात कारणों से सरकार ने इन्हें निजी कंपनी के हवाले कर रखा है.
6. कम मानदेय, फिर भी बहुत देरी से भुगतान- बड़ा दर्द है. बेल्ट्रॉन कंपनी को पैसा देती है, फिर कंपनी अपनी सुविधा देखती है.
7. बहुतों ने कमेंट्स कर यह शिकायत की है कि फरवरी महीने का पेमेंट अब तक नहीं हुआ है. होली-ईद-नवरात्र सब ऐसे ही. जबकि इन्हीं डाटाकर्मियों ने सरकार के आदेश पर सभी परमानेंट कर्मियों की सैलरी होली के कारण फरवरी माह में ही तैयार की थी. सोचें, दूसरे की सैलरी बना रहे, खुद नहीं पा रहे.
8. बहुत सारे यह भी बता रहे कि उनका यूटीआर मार्च के पहले हफ्ते के बाद ही आ गया, लेकिन पेमेंट अब तक अप्राप्त है.
9. नौकरी की आस लगाए आवेदक बेल्ट्रॉन से इस बात की अपेक्षा भी रखते हैं कि वह 4808 क्वालिफाइड कैंडिडेट्स का पैनल तुरंत जारी करे.
आज के लिए इतना ही. इस पोस्ट के बाबत बेल्ट्रॉन व अन्य किसी भी पक्ष का जवाब मिलता है, तो उसे भी अवश्य अपडेट करेंगे.
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@deounion विगत दो दशक से लगातार आउटसोर्स पर बेल्ट्रॉन डाटा एंट्री ऑपरेटर कार्य कर रही है उनका दुःख पीड़ा शोषण पर आज तक कोई सरकार ठोस कदम नहीं उठाया की डायरेक्ट संविदा नियोजन करते हुए डायरेक्ट मानदेय कर्मी के खाते में मिले जिससे उनका भविष्य उज्जवल हो सके @CMBiharNK@samrat4bjp@NitishKumar