Unable to apply for Fiber connection for my home. I have applied 3 times but the request gets closed. Even though my neighbour has bsnl fiber. Jaipur.
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@Airtel_Presence IVR won't connect me due to a "system update," and after 30 minutes on hold, customer care still couldn't understand that this is a complete outage, not a speed issue.
How is this acceptable? Please explain and fix this. @airtelindia@TRAI@PMOIndia@jagograhakjago
संघ शताब्दी
चरैवेति-चरैवेति, ��ही तो मंत्र है अपना ।
नहीं रुकना, नहीं थकना, सतत चलना सतत चलना ।
यही तो मंत्र है अपना, शुभंकर मंत्र है अपना.
जय माँ भारती 🚩
#RSS100Years
#संघमय_समाज
भगवान स्वय��, अनंत शक्ति और करुणा के स्वरूप, युग-युग में भिन्न-भिन्न रूप धारण करके इस पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। उनका आगमन केवल एक कार्य के लिए नहीं, बल्कि चार प्रमुख उद्देश्यों के लिए होता है:
1. धर्म के मार्ग पर चलने वालों की रक्षा करना।
2. अधर्म में लिप्त और अन्याय करने वालों का विनाश करना।
3. धर्म की पुनः स्थापना और उसे सुदृढ़ करना।
4. और सबसे गूढ़ कारण, अपने प्रिय भक्तों के साथ लीलाएँ करना, उनके जीवन में दिव्य आनंद और मार्गदर्शन प्रदान करना।
यह केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि सनातन परंपरा का जीवंत सत्य है, जिसे भगवद गीता के अध्याय 4 के श्लोक 5 से 9 में स्वयं श्रीकृष्ण ने स्पष्ट किया है। इन श्लोकों में वे बताते हैं कि यद्यपि वे जन्म और कर्म में दिव्य हैं, फिर भी जब-जब संसार में धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, वे पुनः अवतार लेकर संसार के संतुलन को स्थापित करते हैं।
इतिहास और पुराण इस दिव्य सत्य के प्रमाण हैं।
त्रेतायुग में भगवान राम ने रावण और उसके अन्यायी साम्राज्य का अंत कर धर्म की प्रतिष्ठा की।
द्वापरयुग में श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन को धर्म का संदेश देकर न्याय की स्थापना की।
सतयुग में भगवान नरसिंह ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु अत्याचारी हिरण्यकशिपु का अंत किया।
ऐसे अनेकों अवतारों की कथाएँ हमारे शास्त्रों और लोकस्मृति में आज भी जीवित हैं, जो हमें यह विश्वास दिलाती हैं कि जब भी अन्याय और अधर्म अपनी सीमा पार करता है, ईश्वर स्वयं अपनी लीलाओं के साथ पृथ्वी पर अवतरित होकर संतुलन स्थापित करते हैं।
उपनिषद, हिंदू धर्म के पवित्र श्रुति शास्त्र हैं, जो सनातन ��ेदों का दार्शनिक हिस्सा हैं और ये सीधे ईश्वर से प्रेरित माने जाते हैं।
ये आत्मा, ब्रह्म (परम सत्य), और जीवन के उद्देश्य की गहरी व्याख्या करते हैं।
जैसे, छांदोग्य उपनिषद आत्मा और ब्रह्म की एकता बताता है, जबकि कठ उपनिषद मृत्यु और अमरत्व पर चर्चा करता है।
108 से भी अधिक उपनिषद हैं, जिनमें प्रमुख हैं बृहदारण्यक, मुंडक, और ईश। ये हमे ध्यान, योग, और आध्यात्मिक ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं, जो हिंदू दर्���न में अंत में मुक्ति (मोक्ष) का आधार व उत्तर भी बनते हैं।
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बहुत समय पहले, असुर राजा महाबली ��े भगवान विष्णु से वचन लिया कि वे सदा उनके महल में रहेंगे। विष्णु वचन निभाने पाताल लोक चले गए।
लक्ष्मी जी उन्हें वापस लाना चाहती थीं। वे एक साधारण ब्राह्मणी के वेश में महाबली के पास पहुँचीं और राखी बाँधकर उन्हें भाई बना लिया।
भाई का धर्म निभाते हुए महाबली ने विष्णु जी को उनके साथ भेज दिया।
तभी से राखी सिर्फ रक्षा का धागा नहीं, बल्कि प्रेम, भरोसे और वचन की याद दिलाने वाली परंपरा बन गई। रक्षाबंधन के हार्दिक शुभकामनाएं।
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राजस्थान का नया खैरथल-तिजारा जिला अब भर्तृहरि नगर कहलाएगा। राजा भर्तृहरि, उज्जैन के शासक ��र संस्कृत कवि थे, जिन्होंने नीतिशतक, शृंगारशतक, और वैराग्यशतक लिखा।
वैराग्य अपनाकर वे नाथ संप्रदाय के योगी बने। राजस्थान में अलवर के पास सरिस्का में भर्तृहरि मंदिर, जहाँ उनकी समाधि है, एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है। भाद्रपद में अमावस्या के बाद यहाँ वार्षिक मेला लगता है, जो हज़ारों भक्तों को आकर्षित करता है।
उज्जैन की भर्तृहरि गुफा भी काफी प्रसिद्ध है।
अथर्ववेद, चार वेदों में से एक पवित्र श्रुति शास्त्र है, जिसे ईश्वर से प्रेरित माना जाता है। यह दैनिक जीवन से जुड़े मंत्रों और उपायों का संग्रह है, जैसे स्वास्थ्य, सुरक्षा, समृद्धि और रोग निवारण के लिए मंत्र।
इसमें दिव्य शक्ति, त��त्र, और प्राकृतिक उपचार भी शामिल हैं, जैसे बीमारी दूर करने की प्रार्थना।
अथर्ववेद के 20 कांडों में भजन, प्रार्थनाएँ और दार्शनिक विचार हैं।
इसके चार भाग हैं:
1. संहिता (मंत्र),
2. ब्राह्मण (कर्मकांड),
3.आरण्यक (ध्यान), और
4. उपनिषद (दर्शन)।
यह आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन का मार्गदर्शन करता है।
सामवेद, चार वेदों में से एक पवित्र श्रुति शास्त्र है, जिसे ईश्वर से प्रेरित माना जाता है। यह मुख्य रूप से भक्ति भजनों और संगीतमय मंत्रों का संग्रह है, जो ���ज्ञ और पूजा में गाए जाते हैं।
सामवेद के मंत्र अधिकतर ऋग्वेद से लिए गए हैं, लेकिन इन्हें विशेष स्वरों और लय में गाया जाता है, जैसे मंदिरों में भक्ति गीत।
इसमें दो भाग हैं:
1. आर्चिक (मंत्र) और
2. गान (संगीत)।
सामवेद भक्ति, आध्यात्मिकता और कला को बढ़ावा देता है, जो हिंदू पूजा और संस्कृति का महत्वपूर्�� हिस्सा है।
यजुर्वेद, चार वेदों में से एक प्रमुख श्रुति शास्त्र है, जिसे ईश्वर से प्रेरित माना जाता है। यह मुख्य रूप से यज्ञ और कर्मकांड के नियमों का संग्रह है, जैसे हवन, पूजा और बलिदान की प्रक्रियाएँ। इसमें मंत्र (संहिता) और उनके उपयोग के निर्देश (ब्राह्मण) शामिल हैं।
यजुर्वेद दो प्रमुख शाखाओं में बँटा है:
1. कृष्ण यजुर्वेद (मंत्र और व्याख्या मिश्रित, जैसे तैत्तिरीय संहिता) और
2. शुक्ल यजुर्वेद (केवल मंत्र, जैसे वाजसनेयी संहिता)।
यह आध्यात्मिक और सामाजिक कर्मकांडों का मार्गदर्शन करता है, जो हिंदू पूजा और संस्कृति का आधार बनाता है।
ऋग्वेद, चार वेदों में सबसे प्राचीन और प्रमुख श्रुति शास्त्र है, जिसे ईश्वर से प्रेरित माना जाता है।
इसमें 10 मंडलों में 1,028 सूक्त (भजन) हैं, जो अग्नि, इंद्र, वरुण जैसे देवताओं की स्तुति करते हैं।
ये मंत्र प्रकृति, ब्रह्मांड और जीवन की महिमा बताते हैं, जैसे सूर्य की पूजा या यज्ञ के गीत।
ऋग्वेद में आध्यात्मिक और दार्शनिक विचारों का आधार है, जो हिंदू धर्म की नींव रखता है।
इसके चार भाग हैं:
1. संहिता (मंत्र),
2. ब्राह्मण (कर्मकांड),
3. आरण्यक (ध्यान), और
4. उपनिषद (दर्शन)।
यह जीवन और पूजा का मार्गदर्शन करता है।
वेद, हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र श्रुति शास्त्र हैं, जिन्हें ईश्वर से प्रेरित माना जाता है।
चार वेद हैं:
1. ऋग्वेद (देवताओं की स्तुति और भजन, जैसे अग्नि, इंद्र की पूजा),
2. यजुर्वेद (यज्ञ और कर्मकांड के नियम, जैसे हवन की प्रक्रिया),
3. सामवेद (भक्ति भजनों और संगीतमय मंत्रों का संग्रह, जैसे पूजा के गीत), और
4. अथर्ववेद (रोज़मर्रा के उपाय, जैसे स्वास्��्य और सुरक्षा के मंत्र)।
प्रत्येक वेद में
1. संहिता (मंत्र),
2. ब्राह्मण (कर्मकांड),
3. आरण्यक (ध्यान), और
4. उपनिषद (दर्शन) शामिल हैं।
वेद आध्यात्मिक, नैतिक और सामाजिक जीवन का मार्गदर्शन करते हैं।
श्रुति, यानी "जो सुना गया," हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और प्रामाणिक शास्त्र हैं, जिन्हें प्राचीन ऋषियों को ईश्वर से प्राप्त माना जाता है।
इसमें 1. वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) और 2. उपनिषद शामिल हैं।
वेदों में भजन, कर्मकांड, भक्ति गीत और दैनिक जीवन के उपाय हैं।
जैसे, ऋग्वेद में देवताओं की स्तुति, यजुर्वेद में यज्ञ के नियम हैं।
उपनिषद वेदों का दार्शनिक हिस्सा हैं, जो आत्मा और ब्रह्म जैसे गहरे सवालों का जवाब देते हैं।
श्रुति अनंत, मूलभूत है और हिंदू धर्म में आध्यात्मिकता, कर्मकांड व दर्शन का मार्गदर्शन करती है।
हिंदू धर्म के मुख्य ��ास्त्र दो प्रकार के हैं: 1. श्रुति और 2. स्मृति।
श्रुति में
1. वेद (ऋग्वेद: देवताओं की स्तुति, यजुर्वेद: यज्ञ के नियम, सामवेद: भक्ति भजन, अथर्ववेद: रोज़मर्रा के उपाय) और
2. उपनिषद (आत्मा और ब्रह्म की गहरी बातें, जैसे जीवन का उद्देश्य) हैं।
2. स्मृति में
1. महाभारत (जैसे भगवद्गीता, जहाँ कृष्ण अर्जुन को कर्तव्य सिखाते हैं),
2. रामायण (राम-सीता की भक्ति कथा),
3. पुराण (जैसे भागवत पुराण, कृष्ण की कहानियाँ), और
4. धर्मशास्त्र (मनुस्मृति, नैतिक नियम) शामिल हैं।
आगम-तंत्र मंदिर पूजा सिखाते हैं। ये शास्त्र जीवन का रास्ता दिखाते हैं।
यह BSNL कर्मचारियों के खिलाफ नहीं है। यह भारत के करदाता��ं और युवाओं के हक में है।
सरकार पहले से वोडाफोन आइडिया Vi का 25 प्रतिशत से भी ज्यादा हिस्सा होल्ड करती है।
भारत को BSNL का बोझ अब नहीं उठाना चाहिए। लोगों का पैसा BSNL में नहीं, जनता की ज़रूरतों में लगे।
1. BSNL पिछले 10 साल से घाटे में है। ₹50,000+ करोड़ बर्बाद हो चुके हैं, सिर्फ कर्मचारियों का गुस्सा न झेलने के लिए। ना नेटवर्क सुधरा, ना सेवा। 4G 2012 की जगह अब 2025 में आ रही है।
8. कॉल और डाटा सेवा को Vodafone Idea में मिलाएं, और उसे एक स्वतंत्र देसी या विदेशी बोर्ड से चलवाएं, ताकि Jio-Airtel का डुपोलि न हो।
9. BSNL बचाओ नहीं, भारत बचाओ।
हर साल घाटे वाली PSU को पालना देश के भविष्य के साथ सही नहीं है।