बियर खत्म होकर जब व्हिस्की की खपत बढ़ जाए, तो समझो मानसून शुरू।
व्हिस्की से जब रम की तरफ झुकाव बढ़ जाए, तो समझो सर्दी शुरू।
और रम से वापस बियर चालू हो जाए, तो समझो गर्मी शुरू।
यही असली ऋतु-चक्र है।
बाकी मौसम विभाग
पक्षियों की आवाज़ें,
कौवे का घोंसला,
खिलता हुआ गुलमोहर और गीली मिट्टी की खुशबू ...
ये सब अंधविश्वास है।
😂😂😂😂🍻 🥃🥃
@IndianGems_@narendramodi@nsitharaman This signal the world exploiting native population is ok, if you bring $. This is disgraceful! What this govt is doing is not less than Trump? I wish people have power to remove minister directly by voting rather than with help of representative.
The sun was free. They sold you SPF 50 and a vitamin D deficiency.
Sleep was free. They sold you an app, a pill, and a wearable that tells you your sleep was bad.
Walking was free. They sold you a treadmill, a fitness tracker, and a £180 pair of trainers.
Fasting was free. They sold you meal replacement shakes and the anxiety that skipping breakfast would wreck your metabolism.
Cold water was free. They sold you a £3,000 plunge barrel and a podcast episode about it.
Silence was free. They sold you a meditation app with a premium tier.
Animal fat was cheap. They sold you seed oils, then supplements to replace what the animal fat contained.
Tallow was cheap. They sold you a seventeen-step skincare routine and a clinical trial proving your face needs ceramides.
Meat was cheap. They are currently selling you the idea that you shouldn't eat it.
The 20th century removed access to everything the body needs to function.
The 21st century is selling it back, one subscription at a time.
Your great-grandmother had none of the products.
She had all of the things.
एक मरता समाज
गुरुग्राम में जिम से लौट रहे एक इंजीनियर की स्ट्रीट लाइट के खंभे से करंट लगने से मौत हो गई। कल गुजरात में एक पुल अचानक बीच में टूट जाने से 13 लोग मारे गए। मरने वालों में एक दो साल का बच्चा और उसकी बहन भी शामिल थीं। कल ही नोएडा में पार्क में पानी से भरे गड्ढे में गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई।
कुछ देर पहले एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक ग़रीब आदमी का मोबाइल पानी से लबालब भरी सड़क में गिर जाता है। वह इधर-उधर हाथ मारता हुआ मोबाइल ढूंढ़ रहा है। जब मोबाइल नहीं मिलता, तो वह वहीं सड़क के किनारे बैठकर रोने लगता है। शायद उसने बड़ी मुश्किल से आठ-दस हज़ार का ये मोबाइल ख़रीदा होगा और ये सोचकर उसको रोना आ गया होगा कि वो फिर से इतने पैसे कहां से लाएगा!
एक और वीडियो में, एक चार साल का बच्चा जैसे ही अपने घर के दरवाज़े से बाहर निकलता है, तीन-चार कुत्ते उस पर हमला कर देते हैं। बच्चा वहीं गिर जाता है। उसके बाद क्या हुआ, ये देखने की मेरी हिम्मत नहीं हुई।
कुछ दिन पहले एक ख़बर पढ़ी थी कि एक मज़दूर थक-हारकर सड़क किनारे सो रहा था। तभी कुछ लोग वहां कचरे से भरी ट्रॉली खाली कर देते हैं। वहीं सोया मज़दूर नींद में ही मारा जाता है। दुनिया में इससे बुरी मौत और क्या होगी? एक तो इंसान अपनी नियति से ग़रीब पैदा हो। फिर जैसे-तैसे मज़दूरी करके अपना पेट भरे। मज़दूरी करके जब थक जाए, तो सड़क किनारे ही सो जाए। और वह नींद में ही कोई उस पर कचरे की ट्रॉली उलट दे और वह वहीं मारा जाए! क्या इससे ज़्यादा गरिमाहीन मौत कोई हो सकती है? न ज़िंदगी में सम्मान मिला, न मौत में।
ये ज़्यादातर ख़बरें सिर्फ एक-आध दिन की हैं। ये सारी घटनाएं हिला देने वाली हैं। इनमें से हर एक पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए। आख़िर किसी भी देश में इंसानी जान इतनी सस्ती कैसे हो सकती है? मगर यहां ऐसी किसी ख़बर पर चर्चा नहीं होती। पता नहीं क्यों, हमने इसे अपनी नियति मान लिया है।
पूरे देश में 'सिस्टम' नाम की कोई चीज़ नहीं बची है। कहीं किसी की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है। इसीलिए, मौक़ा मिलते ही लोग पहली फ़ुर्सत में देश से निकल जाते हैं।
किसी भी राजनीतिक पार्टी में न तो कोई राष्ट्रबोध है, न कोई संवेदनशीलता। टीवी पर दिनभर ऐसे घटिया विषयों पर चर्चाएं होती हैं, जिनका देश से कोई लेना-देना नहीं होता। दिनभर राजनीतिक पार्टियां खुद को मसीहा बताते हुए एक-दूसरे को गालियाँ देती हैं। समस्या कोई एक राजनीतिक पार्टी नहीं है। समस्या पूरी की पूरी राजनीति है, जिसमें यह बोध ही नहीं है कि दुनिया कहां की कहां चली गई और हम अब भी हर मामले में पाकिस्तान से अपनी तुलना कर खुश होते रहते हैं। हर वक़्त आंकड़ों की बाज़ीगरी करके अपना दिन बहलाते रहते हैं—"हम इतने ट्रिलियन डॉलर की इकॉनॉमी हो गए", "हमने उसकी बोलती बंद कर दी।"
अरे भाई, हमारी हवा सांस लेने लायक नहीं है। दूध, पनीर, फल-सब्ज़ी—हर चीज़ मिलावटी है। ज़रा-सी बारिश में पूरा सिस्टम जाम हो जाता है। सरकारी स्कूल इस लायक नहीं कि कोई अपने बच्चे को वहां पढ़ा सके। सरकारी अस्पताल इस योग्य नहीं कि कोई अपना वहां इलाज करा सके। पुलिस से लेकर अदालतों तक सब आकंठ भ्रष्ट हैं।
चीन से लेकर अमेरिका तक, सारी दुनिया हम पर चढ़ने के लिए तैयार बैठी है और हम एक-दूसरे को इसलिए पीट रहे हैं क्योंकि उसे मराठी नहीं आती। पीटे कोई, पिटे कोई—लेकिन ज़लील पूरा देश हो रहा है। और ज़लालत की कोई भाषा नहीं होती—वह बस हर जगह दिखती है। और उसे पढ़ने के लिए किसी subtitle की ज़रूरत नहीं होती। ये इस देश के माथे पर लिखा है।
-Neeraj Badhwar
All jokes and awwws aside, Elon Musk having kids (and a nanny) at a diplomatic interaction is quite infelicitous and frankly disrespectful to the delegation.
मैं जितने साल जी चुका हूँ, उससे अब कम साल मुझे जीना है। यह समझ आने के बाद मुझमें यह परिवर्तन आया है :
१. किसी प्रियजन की विदाई से अब मैं रोना छोड़ चुका हूँ क्योंकि आज नहीं तो कल मेरी बारी है।
२. उसी प्रकार,अगर मेरी विदाई अचानक हो जाती है, तो मेरे बाद लोगों का क्या होगा, यह सोचना भी छोड़ दिया है क्योंकि मेरे जाने के बाद कोई भूखा नहीं रहेगा और मेरी संपत्ति को कोई छोड़ने या दान करने की ज़रूरत नहीं है।
३. सामने वाले व्यक्ति के पैसे, पावर और पोजीशन से अब मैं डरता नहीं हूँ।
४. खुद के लिए सबसे अधिक समय निकालता हूँ। मान लिया है कि दुनिया मेरे कंधों पर टिकी नहीं है। मेरे बिना कुछ रुकने वाला नहीं है।
५. छोटे व्यापारियों और फेरीवालों के साथ मोल-भाव करना बंद कर दिया है। कभी-कभी जानता हूँ कि मैं ठगा जा रहा हूँ, फिर भी हँसते-मुस्कुराते चला जाता हूँ।
६. कबाड़ उठाने वालों को फटी या खाली तेल की डिब्बी वैसे ही दे देता हूँ, पच्चीस-पचास रुपये खर्च करता हूँl जब उनके चेहरे पर लाखों मिलने की खुशी देखता हूँ तो खुश हो जाता हूँ।
७. सड़क पर व्यापार करने वालों से कभी-कभी बेकार की चीज़ भी खरीद लेता हूँ।
८. बुजुर्गों और बच्चों की एक ही बात कितनी बार सुन लेता हूँ। कहने की आदत छोड़ दी है कि उन्होंने यह बात कई बार कही है।
९. गलत व्यक्ति के साथ बहस करने की बजाय मानसिक शांति बनाए रखना पसंद करता हूँ।
१०. लोगों के अच्छे काम या विचारों की खुले दिल से प्रशंसा करता हूँ। ऐसा करने से मिलने वाले आनंद का मजा लेता हूँ।
११. ब्रांडेड कपड़ों, मोबाइल या अन्य किसी ब्रांडेड चीज़ से व्यक्तित्व का मूल्यांकन करना छोड़ दिया है। व्यक्तित्व विचारों से निखरता है, ब्रांडेड चीज़ों से नहीं, यह समझ गया हूँ।
१२. मैं ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ जो अपनी बुरी आदतों और जड़ मान्यताओं को मुझ पर थोपने की कोशिश करते हैं। अब उन्हें सुधारने की कोशिश नहीं करता क्योंकि कई लोगों ने यह पहले ही कर दिया है।
१३. जब कोई मुझे जीवन की दौड़ में पीछे छोड़ने के लिए चालें खेलता है, तो मैं शांत रहकर उसे रास्ता दे देता हूँ। आखिरकार, ना तो मैं जीवन की प्रतिस्पर्धा में हूँ, ना ही मेरा कोई प्रतिद्वंद्वी है।
१४. मैं वही करता हूँ जिससे मुझे आनंद आता है। लोग क्या सोचेंगे या कहेंगे, इसकी चिंता छोड़ दी है। चार लोगों को खुश रखने के लिए अपना मन मारना छोड़ दिया है।
१५. फाइव स्टार होटल में रहने की बजाय प्रकृति के करीब जाना पसंद करता हूँ। जंक फूड की बजाय बाजरे की रोटी और आलू की सब्जी में संतोष पाता हूँ।
१६. अपने ऊपर हजारों रुपये खर्च करने की बजाय किसी जरूरतमंद के हाथ में पाँच सौ हजार रुपये देने का आनंद लेना सीख गया हूँ। और हर किसी की मदद पहले भी करता था और अब भी करता हूँ।
१७. गलत के सामने सही साबित करने की बजाय मौन रहना पसंद करने लगा हूँ। बोलने की बजाय चुप रहना पसंद करने लगा हूँ। खुद से प्यार करने लगा हूँ।
१८. मैं बस इस दुनिया का यात्री हूँl मैं अपने साथ केवल वह प्रेम, आदर और मानवता ही ले जा सकूंगा जो मैंने बाँटी हैl यह मैंने स्वीकार कर लिया है।
१९. मेरा शरीर मेरे माता-पिता का दिया हुआ हैl आत्मा परम कृपालु प्रकृति का दान है और नाम फॉइबा का दिया हुआ है... जब मेरा अपना कुछ भी नहीं है, तो लाभ-हानि की क्या गणना?
२०. अपनी सभी प्रकार की कठिनाइयाँ या दुख लोगों को कहना छोड़ दिया है, क्योंकि मुझे समझ आ गया है कि जो समझता है उसे कहना नहीं पड़ता और जिसे कहना पड़ता है वह समझता ही नहीं।
२१. अब अपने आनंद में ही मस्त रहता हूँ क्योंकि मेरे किसी भी सुख या दुख के लिए केवल मैं ही जिम्मेदार हूँl यह मुझे समझ आ गया है।
२२. हर पल को जीना सीख गया हूँ क्योंकि अब समझ आ गया है कि जीवन बहुत ही अमूल्य हैl यहाँ कुछ भी स्थायी नहीं हैl कुछ भी कभी भी हो सकता है, ये दिन भी बीत जाएँगे।
२३. आंतरिक आनंद के लिए मानव सेवा, जीव दया और प्रकृति की सेवा में डूब गया हूँl मुझे समझ आया है कि अनंत का मार्ग इन्हीं से मिलता है।
२४. प्रकृति और देवी-देवताओं की गोद में रहने लगा हूँl मुझे समझ आया है कि अंत में उन्हीं की गोद में समा जाना है।
देर से ही सही, लेकिन समझ आ गया हैl शायद मुझे जीना आ गया हैl🙏😊
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