@puneetsinghlive अगर प्रोडक्ट हिंदुओ के उपवास के लिए है तो क्या वही इसको खा सकते है क्या! खाने की चीज़ है जिसको पसंद होगा वो खायेगा। और कम्पनी अपनी जानकारी किसी भी भाषा मे लिखे ये भाषा कबसे धर्म भ्रष्ट करने लगी है , हमारे विद्वत पूर्वज भी कई भाषाओं का ज्ञान रखते थे। #_मानसिकता बदलो!
नाम गुम जायेगा, चेहरा ये बदल जायेगा मेरी आवाज़ ही, पहचान है गर याद रह��� वक़्त के सितम, कम हसीं नहीं आज हैं यहाँ, कल कहीं नहीं वक़्त से परे अगर, मिल गये कहीं मेरी आवाज़ ही ... जो गुज़र गई, कल की बात थी उम्र तो नहीं, एक रात थी रात का सिरा अगर, फिर मिले कहीं मेरी आवाज़ ही. R.I.P 😓😓