ईश्वर #Dharmendra जी को आत्मा को शांति प्रदान करें 🙏 विश्वास नहीं हो रहा उम्मीद थी कि कुछ दिन और स्वस्थ होकर अपना जन्मदिन मनाएंगे लेकिन ईश्वर को यही मंजूर था 😭
#dharmendra
माननीय मोदीजी की राजनीति में परिवारवाद नहीं होता, बस सत्ता बनाए रखने के लिए परिवारों को ‘सरप्राइज़’ दिया जाता है, ‘अभिभूत’ किया जाता है। बहरहाल, छोटे भाई दीपक को मंत्री पद की शुभकामनाएँ! सही रास्ता पकड़े हैं। वरना अभी आपसे पूछा जाता - “सीधे मंत्री ही बन जाइएगा! अभी संघर्ष करिए! अरे आप तो जींस पहनते हैं! जनता आपसे “कनेक्ट” कैसे करेगी?” हमारे अभिभावक-तुल्य नीतीश जी और उपेन्द्र जी को भी समय की माँग और राजनीति की सही नब्ज पकड़ने के लिए बहुत साधुवाद। 😊🙏
दरभंगा में बूथवार वोट का फॉर्म-20 मिला। जिन मुस्लिम-बहुल बूथों पर 2020 में बीजेपी विधायक को सिंगल डिजिट (1-9) वोट थे, वहाँ 2025 में सैकड़ों वोट कैसे आए? जिन बूथों पर मेरे ��ैकड़ों वोट लोगों ने सत्यापित किए हैं, वहाँ मुझे सिंगल डिजिट में वोट कैसे? कोर्ट और जनता फ़ैसला करेगी। #EVM
आम बिहारी को जनरल डिब्बे में सिट पाने के लिए लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ता है
वही एक नेता का बेटा बिना कोई चुनाव लडे ���िना मेहनत करे मंत्री बन जाता है
#Upendrakushvaha #DeepakPrakashkushvaha
हम कोर्ट भी जा ही रहे हैं, इलेक्शन पिटीशन दायर करेंगे ही - बूथवार EVM में वोटों की डकैती के सबूत के साथ। पर हम राजनीतिक आवाज़ भी उठायेंगे। अगर ये झूठ बोल-बोलकर नैरेटिव गढ़ते रहते हैं तो हमें सच्चाई का हल्ला भी करना पड़ेगा। जनता को सही सूचना देना भी लीडर का ही काम है। #EVM
दरभंगा में मुसलमानों ने भी जो हज़ारों वोट मुझे पारिवारिक लगाव और पसंदगी से दिए, उनके बूथों पर भी वे सारे वोट बीजेपी ने बिना देखे-समझे खुद को ट्रांसफ़र करवा लिए! इस बार जिसका हारना तय था वह रिकॉर्ड जीत गया - कभी न मिलने वाले वोटों से! EVM में पूरी डकैती हुई विरोधी वोटों की भी।
बीजेपी की आँधी में भी एकदम ध्रुवीकृत बिस्फी में बीजेपी विधायक की हार हुई। क्या वहाँ महिलाओं के खाते में 10000 भी नहीं पहुँचे? नहीं। क्योंकि इस बार वहां मेरे जैसा तीसरा लोकप्रिय उम्मीदवार नहीं था जिसको मिलने वाला खूब सारा न्यूट्रल हिन्दू-मुसलमान वोट EVM में 2020 की तरह उसके नाम ट्रांसफ़र हो पाता। उस साल राजद की आँधी थी और उसका एक क़द्दावर नेता अपने गढ़ बिस्फी में हार गया। उस साल भी बिस्फी में दरभंगा की तरह ही मेरे स्वजनों के वोट भी बीजेपी कैंडिडेट के खाते में ट्रांसफ़र करा लिये गए थे। मुख्य विपक्��ी दल/गठबंधन से इतर किसी एक तीसरे लोकप्रिय उम्मीदवार/दल के अधिकतम वोट को अपने नाम कर लेने की यह रहस्यमयी तकनीक है। तब मैं सबूत रहते हुए भी खून का घूँट पी कर रह गई थी। इस बार इन्होंने मेरे घर में ही वोटों की डकैती की है। दुस्साहस है या बाहरी व्यक्ति में जानकारी का अभाव कि दरभंगा मेरा होमटाउन है जहां मेरे हज़ारों नाते-रिश्तेदार रहते हैं? जो भी हो, इस बार EVM से वोट चुराने का पूरा पोल मैं खोल कर रख दूँग���। इस बार इन लोगों से चूक हो गई है। #EVM
प्रिय देशवासियों,
EVM लोकतंत्र के लिए समस्या बना दिया गया है। यह मैं इसलिए नहीं कह रही कि मैं हार गई, या भावुक हो गई या मुझे सदमा लगा है। यह सब ट्रोल की भाषा है। देखिए, मैं विश्वप्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ी हूँ। राजनीति और चुनाव पर बढ़िया रिसर्च किया है, विशिष्टता रही है। राजनीति को क़रीब से देखा है। खूब अनुभव रहा है। परिवार में ही 13 चुनाव देखे हैं।आज भी परिवार में एक व्यक्ति चुनाव जीते हैं। पर मैंने अपनी पार्टी बनाई और दो चुनाव लड़े हैं। मैं अपने पूरे ज्ञान और राजनीतिक अनुभव से पूरी ज़िम्मेदारी से कह रही हूँ कि EVM में वोट मैनिपुलेट हो रहे हैं। साल 2020 में भी मेरे पास बूथवार सबूत थे और आज तो खूब सारे जमा किए हैं। अब चूँकि मतदान-प्रणाली ही गुप्त मतदान पर आधारित है, इसलिए इसे न्यायालय में सिद्ध नहीं किया जा सकता। इसका फ़ैसला राजनीतिक तरीक़े से जनता की अदालत में ही होगा - जैसे भी हो, जब भी हो, जिस रणनीति से हो।
यह EVM मैनिपुलेशन कैसे होता है यह गंभीर शोध का विषय है पर यह होता है ��समें आप कोई संदेह मत रखिए। हाँ, मेरे अनुभव से, तरीक़ा यह है कि मुख्य विपक्षी दल/गठबंधन के उम्मीदवार अर्थात् पेपर पर नंबर दो के वोट को टच नहीं किया जाता। इसका उपयोग किसी नये दल के लोकप्रिय उम्मीदवार पर किया जाता है। और यह एक सीट पर एक उम्मीदवार के साथ ही संभव होता है। इसलिए जहां दो नये लोकप्रिय उम्मीदवार हों वहां एक का ही वोट बुरी तरह प्रभावित होगा। दूसरे का या अन्य निर्दलीय इत्यादि का यथावत रह���गा। इसलिए अन्य सीटों पर या दूसरे राज्यों या अन्य चुनावों में अगर मुख्य विपक्षी जीत रहा है तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। ख़तरे में सिर्फ तीसरा पक्ष रहेगा। पहले नैरेटिव बनाया जाएगा कि ये सब हवा-हवाई हैं, अप्रासंगिक हैं, बस सोशल मीडिया पर हैं, इत्यादि-इत्यादि ताकि चुपके से उनका वोट चुरा भी लिया जाए तो नैरेटिव यही रहे कि हाँ इनकी ज़मीनी पकड़ तो थी नहीं! या मेरे मामले में कि ये तो लंदन से आई हैं इत्य��दि इत्यादि। या ट्रोलों और मीम से आपको डिस्क्रेडिट किया जाए। और इधर अपने वोटरों को लगने लगता है कि हाँ मैंने तो वोट किया पर सामने वालों ने नहीं किया होगा। पर अगर आपने वोट की गिनती की है, हर बूथ पर अंदर और बाहर आपके एजेंट हों तो आपको अच्छे से पता होता है कि 100-200 वोट 2-5 में नहीं बदल सकते। या आपके घर के वोट ग़ायब नहीं हो सकते या धुर-विरोधी बूथ पर सत्ताधारी दल को बंपर वोट कैसे मिले? ये सब आपका वोट होता है।
इसलिए नई राजनीति करने वालों के लिए रास्ता कठिन है। इस दौर की लड़ाई को बहुत धीरज और होशियारी से लड़ना होगा। मैं इसके लिए तैयार हूँ। राजनीति से नैतिकता आदि तो कब का जा चुकी थी, अब फ़्रॉड, ठग और किसी क़ीमत पर जीत लेने की राजनीति है। इससे डटकर दिमाग़ी मजबूती से मुक़ाबला करना होगा, हमें भी और आप सभी जनता को भी।
मैं पराजित हुई हूँ, समाप्त नहीं हुई हूँ। बस अब साम-दाम-दंड-भेद की राजनीति में रणनीति बदलने की ज़रूरत होगी। मेरे पार्टी ��मर्थक और कार्यकर्ता हतोत्साहित न हों, हम वापसी करेंगे। आप सबलोग सपरिवार खुश रहें।
- पुष्पम प्रिया चौधरी
दरभंगा में नामांकन के बाद स्थानीय स्तर पर हमें बताया गया कि EVM में महागठबंधन के उमेश सहनी का क्रमांक 6, मेरा अर्थात् पुष्पम प्रिया का 7 और जनसुराज के आर के मिश्रा का 8 नंबर बटन होगा। पर 24 घंटे के अंदर उसे “ऊपर से” बदलकर 5,6,7 कर दिया गया। मशीन में शायद तय किया जा चुका था कि 6 नंबर के वोट नंबर 2 पर संजय सरावगी को ट्रांसफ़र करने हैं। पर महागठबंधन को 6 नंबर पर रखने से भंडाफोड़ हो जाता। यह जल्दबाज़ी में इनकी पहली तकनीकी चूक थी। मशीन में एक बार ट्रांसफ़र का फॉर्मूला तय हुआ तो बेचारा यह गलती सुधार नहीं पाया कि मुझे अपने हज़ारों नाते-रिश्तेदारों वाले होमटाउन दरभंगा में छोटे-छोटे निर्दलीयों से भी कम वोट आना और मुस्लिम वोटरों वाले बूथ पर रिकॉर्ड वोट बीजेपी उम्मीदवार को मिल जाना राजनीतिक व सांख्यिकीय दोनों रूप से असंभव है। मतगणना के दौरान स्वयं बीजेपी उम्मीदवार के काउंटिंग एजेंट हतप्रभ थे कि जहां से कभी वोट नहीं आया वहां वोट कैसे आ रहा है? पर नियति ने इस बार तय कर लिया है कि इनका पर्दाफ़ाश कर ���ी देना है। इस बार इन्होंने इतनी गलती की है और मेरे पास हर बूथ पर इतने सबूत हैं कि इनका पोल खुलना तय है। #EVM
EVM rigging में इस बार मेरी माँ, घर व हर मुहल्ले में रिश्तेदारों तक के वोट बीजेपी उम्मीदवार को ट्रांसफ़र। हर बूथ पर सैकड़ों वोट मैनिपुलेशन का साफ़ प्रमाण! वोटर हतप्रभ कि वोट कहाँ गए? जहां सैकड़ों वोट मिले उन बूथों पर भी संख्या 0-2 से 5-7 तक! हर बूथ पर एक-सा पैटर्न! सांख्यिकीय रूप से भी असंभव! शायद जिसे EVM मैनिपुलेट करने का काम दिया गया उसे बताया ही नहीं गया कि इस बार मैं अपने गृहनगर से चुनाव लड़ रही हूँ जहाँ मेरे गिने हुए हज़ारों वोट हैं। इस बार आपलोगों ने बड़ी चूक कर दी है। @BJP4India@narendramodi@AmitShah
“दरभंगा के किसी भी बूथ पर आज पेपर बैलेट से चुनाव करा लें। यदि उसका वोट EVM पर आए वोट के बराबर रहा या निकट भी रहा तो मैं राजनीति छोड़ दूँगी। EVM में वोट चुराने से पहले नॉन-बिहारी एजेंट को जानकारी नहीं दी गई कि इस शहर म��ं 50 साल से राजनीति कर रहे मेरे परिवार के ही हज़ारों वोट हैं।”
EVM का पोल खुल चुका है मेरे होमटाउन में। हर दिन दरभंगा के अनेक वोटर फ़ोन कर रहे हैं, मिलने आ रहे हैं। मैं ख़ुद हर बूथ पर आपसे मिलने आऊँगी। पर इस बीच दरभंगा के सभी प्रबुद्ध वोटरों से अपील किया है कि वे मु��े संपर्क कर बताएँ कि किस बूथ, वार्ड या पंचायत में उन्होंनें मुझे वोट किया था। एक फॉर्म सारे वोटर को भेजा जा रहा है। न्यायालय और वैधानिक सारे रास्ते अख़्तियार किए जाएँगे पर सबसे बड़ी अदालत तो जनता की ही अदालत है। चलिए दरभंगा को चोरों से मुक्ति दिलाते हैं और देश का लोकतंत्र बचाते हैं।
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मिथिला के प्रसिद्ध सामा-चकेवा त्योहार के विसर्जन कार्यक्रम में आज अपने मुहल्ले की स्त्रियों के साथ देर रात शामिल हुई। सभी भाई-बहनों को अक्षुण्ण प्रेम बना रहे। मिथिला संस्कृति सबको समाहित करती है चाहे रंग, रूप, भेष-भूषा, जाति-समुदाय कुछ भी हो, पहले आप मैथिल होते हैं फिर कुछ और।
मेरे पास माँ है - एक जन्म देने वाली और दूसरी जन्मभूमि दरभंगा के रूप में। दोनों माँ का आशीर्वाद है तो मैं भी जीतूँगी और दरभंगा की जनता भी। हर तरफ ईवीएम के 6 नंबर का बटन खूब दब रहा है, विकास की “सीटी” जम के बज रही है। 🖖
मैंने पहली बार खुद को अपना वोट डाला है क्योंकि मैं अपने शहर दरभंगा से अपनी द प्लुरल्स पार्टी के अध्यक्ष और प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही हूँ। त्रिकोणी�� मुक़ाबला है पुष्पम प्रिया, उमेश सहनी और संजय सरावगी के बीच। मैं यह मुक़ाबला जीत रही हूँ।
दरभंगा में चुनाव प्रचार एक दिन पहले ख़त्म करवा दिया गया। विधायक के लिए आज रोड शो है और सारे सड़क प्रशासन ने आम जनता के लिए बंद कर दिए। यही गुंडाराज है। अब बाकी उम्मीदवार घर से बाहर ही नहीं निकल सकते, प्रचार तो दूर की बात है। यही फ़ेयर प���ले है? @ECISVEEP @CEOBihar @darbhanga_dm
कल शाम एक ख़ूबसूरत वाक़या हुआ। मोहल्लों में घर-घर जाते हुए मैं एक बड़े मकान में गई। अंदर पहुँची वहाँ मौजूद एक वृद्धा महिला ने पूछा कौन हो तुम। मैंने उनकी उम्र का अंदाज़ा लगाकर उनसे कहा कि मैं प्रोफेसर उमाकान्त चौधरी की पोती हूँ। अचानक वो भावुक होकर कहने लगीं अरे मैं तुम्हारी दादी लगूँगी। तुम बच्ची थी तुम्हें याद नहीं होगा। तब पता चला कि यह दिवंगत नोमानी साहब का घर था जो मेरे बा��ा के खास दोस्त थे। उन्होंने मुझे प्यार से बहुत डाँटा भी कि तुमलोग मिलने नहीं आते। यही डाँट और प्यार दरभंगा में मेरी पूंजी है क्योंकि यहाँ के हर घर की बेटी हूँ मैं।
“बकवास बयान देने के बजाय चुनाव पर फ़ोकस करिए क्योंकि आपकी कुर्सी जनता छीन रही है इस बार।” - द प्लुरल्स पार्टी के कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला करवाने के बाद दरभंगा विधायक श्री संजय सरावगी के हास्यास्पद और धूर्ततापूर्ण स्पष्टीकरण पर पार्टी महासचिव व मुख्य प्रवक्ता का जवाब।