मैं एक हरे-भरे और सुरक्षित कल की दिशा में कदम बढ़ाता रहूँगा!
🌳 'संरक्षण' पहल के साथ इस पौधे को लगाना तो बस एक शुरुआत है। मैं इंसानों और प्रकृति के बीच के इस खूबसूरत रिश्ते को फिर से स्थापित करने के लिए आगे भी काम करता रहूँगा। आइए, मिलकर एक बेहतर भविष्य का निर्माण करें! 🌿
I will continue taking steps towards a greener and more sustainable tomorrow!
🌳 Planting this sapling with the Sanrakshan initiative is just the beginning. I will keep working to restore the beautiful bond between humans and nature. Let's build a better future together! 🌿
दिव्य ज्योति वेद मन्दिर के 'भाषा बोध' कार्यक्रम से मिली शानदार सीख को अब अपने आने वाले डिजिटल अभियानों में उतारने का समय आ गया है! नए प्रोजेक्ट्स में इस ज्ञान का उपयोग करने के लिए बेहद उत्साहित हूँ। 💯🌐
#BhashaBodh#FutureGoals#DivyaJyotiVedMandir
Ready to elevate my content strategy! 🚀 I will be applying the incredible linguistic insights from the 'Bhasha Bodh - Science Behind Language' program to craft deeper, more engaging social media campaigns. Excited to see how this transforms my upcoming projects! 📈✨
#BhashaBodh
राष्ट्र प्रथम के संकल्प और अखंड भारत की चेतना को पूर्णतः समर्पित, अदम्य साहस के प्रतीक वीर सावरकर जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन। 🙏🇮🇳
#VeerSavarkar#VinayakDamodarSavarkar
सकल ब्रह्मांड की शक्तियाँ क्यों न तुम्हारे विरोध में खड़ी हो जाएँ, परंतु तुम्हें केवल वेदांत चुनना है, तुम्हें केवल धर्म चुनना है।
और एक समय आएगा, जब तुम उन शक्तियों को अपने ही समक्ष नतमस्तक पाओगे।
विनाश काले विपरीत बुद्धि।
जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है।अंत निकट हो तो बुद्धि काम करना बंद कर देती है। विवेक साथ छोड़ देता है और मनुष्य पतन की और बढ़ता है।
कर्म का फल तो आवश्य मिलेगा और शीघ्र नहीं अति शीघ्र मिलेगा।
जो बीजा अब वही कटेगा।
सावधान।
दया है, इसलिए दुश्मन अभी जीवित है।यदि दया को वह कायरता समझ रहे है तो उनसे बड़ा कोई मूर्ख नहीं।
उनकी यह मूर्खता अब उनका अंत होगी,काल चक्र के तेज से उनका अंत लिखा गया, उनको उनके कर्म पाताल से भी निकालेंगे और उनकी श्वांसों को उन्ही के द्वारा गिनने को विवश करेंगे।
इसलिए सावधान।
परिस्थितियाँ बदलेंगी,परिवर्तन होगा,युद्ध में विजय-तिलक भी लगेगा।
तुम असमर्थ हो तो क्या हुआ,तुम्हारा सामर्थ्य बनने हेतु स्वयं कृष्ण बैठे हैं।तुम उनको युद्धभूमि में अपना सारथी बनाओ तो सही।
विजय-ध्वज फहराने से तुम्हें कोई रोक दे,सकल ब्रह्माण्ड की किसी शक्ति में इतना सामर्थ्य नहीं।
यदि अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले रॉकेट की दिशा जरा सी भी गलत हो जाए, तो वह कल्याणकारी न होकर विध्वंस का कारण बन सकता है।
ठीक ऐसे ही, यदि राष्ट्र के युवाओं को सही दिशा न मिले, तो वे राष्ट्र की रीढ़ न बनकर राष्ट्र की पीड़ा बन सकते हैं। अधूरा ज्ञान सदैव खतरनाक होता है।
विवेकी बनो..
सुनिश्चित करो कि तुम एक सकारात्मक ऊर्जा से युक्त संगति में हो। यदि ऐसा नहीं है, तो तुम्हारा जीवन नरक के समान हो जाएगा; तुमको शीघ्र ही उस स्थान और संगति का त्याग करना होगा।
यदि तुम श्रेष्ठता के शिखर को हासिल करना चाहते हो तो उचित निर्णय लेना ही होगा।
उत्साह जीवन में कम ना हो। तुम्हें उत्साहित होकर जीवन की बाधाओं से इसलिए नहीं लड़ना की तुम्हारे परिवार का कोई जन तुमपर आस लगाए बैठा है।
तुम्हें जीवन युद्ध इसलिए डटकर लड़ना है क्यूंकि तुम्हारे भीतर के कृष्ण ने तुम्हें इस युद्धभूमि में विजेता बनाने का संकल्प ले रखा है।
केवल डटो।
परीक्षाएं खूब होंगी,तूफ़ान जड़ से उखाड़ने आयेंगे।विपतियाँ तुंम्हे तुम्हारे लक्ष्य से भ्रमित करेंगी।अंधकार की कालिमा गहन होगी,तुम्हें डर भी लगेगा।
यदि जीवन दांव पर लगाना पड़े लगादेना।धर्म ध्वज थाम, इन परिस्थितिओं से लड़ने के अपने संकल्प को मत भूलना।
अंततः परचम धर्म का ही फहरेगा।
परिस्थितियां तुम्हें जड़ से उखाड़ने आयेंगी। हृदय को रौंदते हुए तुम्हारी आत्मा को चोट पहुँचने हेतु बेहद बड़े पर्यास होंगे।
लेकिन तुम्हें घबराना नहीं है, तुम्हें केवल और केवल अपने लक्ष्य को साधना है। एक दिन यह काले बादल हट जाएँगे और एक उत्तम समय आयेगा।वह समय केवल तुम्हारा होगा।
कभी भी वासनाओं के आगे घुटने मत टेकना। वासनायें मनुष्य को अंधा बना देती है।
वासनाओं से हुआ अंधा मनुष्य जीवन को केवल गवाता है। स्वयं के चरित्र का हनन कर और समाज में समाज के दूषित व सड़े हुए अंग की भूमिका निभाता है।
और एक समय ऐसे अंग को काटकर फेंकना आवश्यक हो जाता है।
हो सकता है कि दुष्ट होकर भी तुम संसार में स्वयं को सज्जन दिखाने में खरे उतर जाओ। प्रन्तु तुम स्वयं की आत्मा और तुम्हारी आत्मा के पिता परमात्मा को धोखा कभी नहीं दे सकते।
तुम संसार को क्यों ना जीत जाओ, प्रन्तु अंत में हार ही जाओगे।
सत्य निर्धारित समय के लिए विलुप्त हो सकता है, लेकिन मिटाया नहीं जा सकता। तुम्हारे स्वीकार न करने के बाद भी सत्य, सत्य ही रहेगा; उसका ओज कम नहीं होगा।
समय के साथ कर्म तुम्हारे सामने आएंगे। तब केवल हृदय में पछतावा न हो, इसलिए साथ सत्य का दो, चाहे स्वयं को मिटाकर ही क्यों न दो।