केंद्रीय मंत्री JP नड्डा ने ट्वीट कर लिखा कि जंतर-मंतर के आंदोलन को लेकर उन्होंने मुलाक़ात की:-
- हालांकि हर्ष दुबे कठपुतली है। वो सिर्फ़ वर्षों से संघर्ष कर रहे लोगों के नाम पर क्रेडिट खाने आया था।
- लेकिन सरकार फिर भी अगर सामान्य वर्ग आयोग का गठन, EWS छात्रों के लिए स्कालरशिप को तत्काल प्रभाव से लागू कर देती है
- तो इससे एक अच्छा संदेश जाएगा। समाज से अलग कोई भी नहीं है। सब को इसी देश में रहना है। लेकिन शोषण और अत्याचार सहकर नहीं।
राजस्थान के सिरोही जिले से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। रेवदर स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (इंग्लिश मीडियम) में कार्यरत बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक मुकेश ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका यह मार्मिक त्याग-पत्र अब शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गया है।
अपने इस्तीफे में शिक्षक मुकेश ने दर्द बयां करते हुए लिखा है कि उनकी नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कंप्यूटर साइंस, प्रोग्रामिंग और आधुनिक तकनीकी ज्ञान देना था, लेकिन इसके विपरीत उनसे निर्वाचन, जनगणना, किसान कैंप, मोबाइल वितरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं के गैर-शिक्षण कार्य (डेटा एंट्री) करवाए जा रहे थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि यदि कंप्यूटर शिक्षकों की सेवाओं का उपयोग केवल कंप्यूटर ऑपरेटर या अन्य प्रशासनिक कामों के लिए ही किया जाना है, तो वे इस व्यवस्था में अपनी सेवाएँ जारी नहीं रखना चाहते।
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#Sirohi#रेवदर: कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर ने दिया त्यागपत्र
गैर-शिक्षण कार्यों में ड्यूटी लगाने पर जताई आपत्ति, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय रेवदर का है पुरा...
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#Sirohi#रेवदर : सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल छोड़ सरकारी कार्मिक ने दिया इस्तीफ़ा
महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय रेवदर के बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक मुकेश कुमार ने राजकीय सेवा से दिया त्याग पत्र, स्कूल की जगह सरकारी कार्यालयों में कम्प्यूटर ऑपरेटर का काम करवाने को लेकर जताई नाराजगी, स्कूलों में आधुनिक तकनीकों से विद्यार्थियों को शिक्षण करवाने की बजाय सरकारी कार्यालयों में ऑपरेटर बनकर बैठाने का जताया विरोध, प्रधानाचार्य ने जिला स्तरीय अधिकारियों को प्रेषित किया पत्र
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आज से हमारी #रामायणयात्रा प्रारंभ हुई।
अगले तीस दिनों में यह यात्रा प्रभु श्री राम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों और पड़ावों से होकर गुजरेगी।
इस यात्रा का विचार मन में बहुत पहले से था, लेकिन संयोग ऐसा बना कि करीब दो सप्ताह पहले एक बातचीत के दौरान अचानक इसे करने का निर्णय हो गया।
यह यात्रा किसी बहुत बड़ी आध्यात्मिक उपलब्धि को अर्जित करने के उद्देश्य से नहीं है। बस मन के किसी कोने में हमेशा से प्रभु श्री राम के जीवन से जुड़े स्थानों को करीब से देखने-समझने, राम कथा को एक बार फिर मन में उतारने, उसके प्रसंगों और उनसे जुड़ी लोककथाओं को जानने और उन सबको वहीं जाकर महसूस करने की इच्छा रही है।
इसीलिए इस यात्रा की पूरी प्लानिंग से लेकर आज घर से निकलते समय तक मन बहुत-सी भावनाओं से भरा हुआ है।
बाकी आगे का रास्ता प्रभु ही पूरा करवाएंगे।
समय-समय पर आपसे इस यात्रा का विवरण साझा करता रहूंगा।
जय सियाराम 🙏
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