#MustListen_Satsang
कृपया अवश्य सुनिए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के अमृत वचन।
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सत्संग की आधी घड़ी, तप के वर्ष हजार।
तो भी बराबर है नहीं, कहे कबीर विचार
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#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
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सत्यार्थ प्रकाश,
समुल्लास 11,
- पृष्ठ 297-298 पर
दयानंद सरस्वती ने सिख धर्म के प्रथम गुरु,
#GodMorningSaturday
प्रारब्ध कर्म और रक्षा का विधान
धर्मग्रंथों के अनुसार मनुष्य अपने कर्म भोगता है। केवल धागा बांधने से प्रारब्ध नहीं कटता; पूर्ण परमात्मा की सतभक्ति ही कर्म बंधनों और काल के चक्र से रक्षा कर सकती है।
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कृपया अवश्य सुनिए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के अमृत वचन।
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