पहले माफ़ी, फिर चुनौती…
और ठीक 5 सितंबर के CJP प्रदर्शन से पहले?
ये महज़ संयोग है या सोची-समझी टाइमिंग?
Ruchika Singh x CJP x AAP exposed
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Heartfelt congratulations to Hon’ble PM Shri @narendramodi Ji on being conferred Uzbekistan’s highest state honour, the Order of “Oliy Darajali Do‘stlik”.
This rare distinction is a recognition of his statesmanship, visionary leadership and tireless efforts to deepen India’s engagement with the world. It is also a moment of immense pride for every Indian and reflects the deep bonds of friendship and goodwill between India and Uzbekistan.
🇮🇳🤝🇺🇿
BIG BREAKING 🚨 CM Suvendu Adhikari demands FRONT-PAGE apology from Anand Bazaar Patrika (ABP Group).
He warns - "ABP used 'Saffron Terrorism' headline on the Jadavpur University clashes"
"Thousands of Sadhus are READY to PROTEST"
"FIR has also been filed against 2 ABP journalists"
APOLOGY THEN. DEFIANCE NOW. WHY NOW? 👀
Abusive Ruchika Singh returns with another victim card video just days before CJP’s September 5 protest.
Same AAP CJP ecosystem amplifies it.
Same controversy resurrected.
Perfect timing?
Coincidence or a carefully timed narrative?
I connect the dots. You decide.
#RuchikaSingh #CJP
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लीगल ऑक्शन से क्यों डर रही है झारखंड की हेमंत सरकार?
इसलिए कि-
• जेएमएम सरकार की ‘लूट की दुकान’ बंद हो जाएगी?
• माफियाओं की जेब भरना बंद हो जाएगा?
हेमंत जी, सुन लीजिए… अब ‘लूट की दुकान’ नहीं चलेगी!
झारखंड की खनिज संपदा जनता की संपत्ति है, किसी सरकार या माफिया की निजी जागीर नहीं।
MMDR संशोधन कानून के तहत पारदर्शी और कानूनी ऑक्शन से राज्य को राजस्व मिलेगा, जिससे सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे विकास कार्यों को मजबूती मिलेगी।
लीगल ऑक्शन होगा, सरकारी खजाना भरेगा और झारखंड की जनता का विकास होगा!
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Four years of Mechanical Engineering at IIT Kharagpur. दिल्ली में दस साल CM.
केजरीवाल के बाद भी garbage mountains खड़े रहे।
Now: 216 lakh metric tonnes processed. Okhla, Bhalswa, Ghazipur से nearly 100 acres वापस।
दिल्ली को press conference नहीं चाहिए थी। Engineering चाहिए थी।
You must not have forgotten her, This is Ruchika Singh.
She abused Narendra Modi and his late mother at CJP Protest
Now she is back again and saying Our PM a coward and also said Now she will not step back and blaming PM for everything.
She is speaking like this to the same PM who had requested the people to not say anything against those who abused him, He said that these are our own children who have lost their way.
But look her Language now..
ये आज का न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) अख़बार है। रविवार का संस्करण बहुत महत्वपूर्ण होता है। अमेरिका के अख़बार अब अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डोनाल्ड ट्रम्प से ऊपर रख रहे हैं। ये बड़ी बात है!
NYT इससे हैरान है कि कैसे पिछले एक वर्ष में तमाम उथल-पुथल के बीच पीएम मोदी ने कई देशों की यात्राएँ करके साझेदारियों का दायरा बढ़ाया है। अख़बार का मानना है कि 2025-26 में हुई 20+ देशों की यात्राओं में अधिकतर में बंद कमरों में कारोबारी बैठकें हुईं। केवल मोदी ही नहीं गए, दर्जन भर से अधिक राष्ट्राध्यक्ष भारत भी पहुँचे।
जर्मनी से पनडुब्बी तकनीक, फ्रांस से छात्रों के लिए वीज़ा और ब्रिटेन से सस्ती स्कॉच व्हिस्की शामिल हैं - प्रधानमंत्री के हर दौरे से भारत के लिए कुछ न कुछ निकलकर आ रहा है। अख़बार मान रहा है कि कई देश अब ख़ुद आगे बढ़कर भारत के साथ सम्बन्ध बनाने की पहल कर रहे हैं। जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ सम्बन्ध मजबूत हुए हैं।
AI के क्षेत्र में फ्रांस और भारत साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। नॉर्वे ने भारत में 10 लाख नौकरियाँ पैदा करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। दक्षिण कोरिया वाले भारत में जहाज बनाएँगे। यूरोपीय संघ के साथ व्यापारिक समझौता हो चुका है। न्यूजीलैंड के साथ समुद्री सुरक्षा पर बात हुई है।
और हाँ, अब कोई ये आकर न कहे कि पहले भी तो ये सब होते थे या फिर पुराने प्रधानमंत्री भी तो विदेश जाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों का हिसाब माँगने वालों को ये भी देखना चाहिए कि न्यूयॉर्क टाइम्स अपने विश्लेषण में लिखा है कि पुराने दौर की कई शीर्ष-स्तरीय बैठकों में लक्ष्य बहुत व्यापक और अस्पष्ट होते थे। जबकि अब स्पष्ट लक्ष्य, निश्चित टारगेट और संख्याएँ तय की जा रही हैं।
पिछले साल ब्रिटेन ने भारत के कपड़ों पर टैरिफ घटाया है। इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को 'मेलोडी' टॉफी गिफ्ट किए जाने का भी ज़िक्र है इस आर्टिकल में। अमेरिका द्वारा लगाए गए तमाम टैरिफ के बावजजूद भारत अड़ा हुआ है, ईरान-युद्ध के बावजूद सबकुछ सामान्य है - तो इसके लिए नेतृत्व का धन्यवाद तो बनता है। तभी विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति भी चर्चा कर रहा है।