दिल्ली पुलिस के अफसर आज डरे सहमे नहीं होंगे, बल्कि शर्मिंदा होंगे कि इसी दिन के लिए वर्दी पहनी थी कि हत्या के प्रयास के आरोपी को एक फोन पर छोड़ देंगे? ऐसा भी क्या है दिल्ली में? जिस शहर में घंटों जाम में रहना पड़ता है, उस शहर में अफसरी करने का यही सुख रह गया है कि कोई सर फोड़ने की बात कैमरे पर कर रहा है, पुलिस FIR और गिरफ़्तारी तक नहीं कर पा रही है। दिल्ली पुलिस के बड़े अफ़सरों को ख़राब लग रहा होगा? अगर शर्मिंदगी भी महसूस हो रही है तो वह भी बड़ी बात है। बाकी किसी कमज़ोर को पकड़ कर, किसी को उठाकर थाने में बंद करने के लिए IPS होने की ज़रूरत नहीं है। वह काम तो स्वतंत्र भारद्वाज बिना UPSC की परीक्षा में बैठे ही कर रहा है।
दिल्ली पुलिस की क्या औकात है, ये 27 साल के स्वतंत्र भारद्वाज ने दिखा दी। एक व्यक्ति पर हमला किया, उसके सिर पर 60 टांके आए। जेल छोड़िए, अरेस्टिंग तक नहीं हुई। BJP के नेताओं से फोन कराया और थाने से छूट गया। खुलेआम पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज यह सब कबूलता है। कपिल मिश्रा, चिराग पासवान से लेकर PM मोदी को भाई बताता है। कनॉट प्लेस पर पुलिस का डंडा हाथ में लेकर फोटो शूट कराता है।
बात तो ऐसे कर रहा जैसे प्रधानमंत्री ने व्हाट्स एप किया हो। अब मोदी जी पर निर्भर करता है कि वे स्वतंत्र का कितना साथ देते हैं। इसी से पता चल जाएगा कि तीन बार के प्रधानमंत्री के पास कैसे लोग हैं। प्रधानमंत्री की ये हालत हो गई है कि वो ऐसे लोगों के साथ खड़े रहें तो उससे अच्छा है ये कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। जिस कुर्सी पर बैठ कर आप वैज्ञानिक से लेकर समाजसेवी, उद्योगपति से लेकर अपनी पार्टी के कार्यकर्ता की सोहबत पा सकते हैं अगर स्वतंत्र की सोहबत उनके लिए, गृहमंत्री के लिए, चिराग़ पासवान के लिए ज़रूरी बन जाए तो सबको अपना पद छोड़ देना चाहिए। संसद मार्ग थाने का नाम स्वतंत्र भारद्वाज थाना होना चाहिए। दिल्ली पुलिस का नाम स्वतंत्र भारद्वाज पुलिस होना चाहिए।
निशु, घबराने की ज़रूरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूँ।
साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों के हक़ की आवाज़ उठाती हो।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस एक तरफ़ छात्रों के साथ अमानवीय बर्बरता करती है। दूसरी तरफ़ एक दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला अपराधी खुलेआम घूम रहा है।
@narendramodi जी, @AmitShah जी - ऐसे अपराधी को आपका और आपकी पार्टी के लोगों का संरक्षण क्यों है? अब भी कार्रवाई होगी या किसी को बचाते रहेंगे?
निशु, तुम्हारी लड़ाई अकेली नहीं है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
जय भीम। जय संविधान।
रागिनी जब 6 महीने की थी, तब एक्सीडेंट में उसका एक पैर टूट गया था। अब 7 साल की हो गई है। घर से 400 मीटर दूर स्कूल है। वह एक पैर से कूदते हुए स्कूल जाती है। यह बिटिया हार नहीं मानेगी।
📍जिला बलिया, उत्तर प्रदेश
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मेट्रो में जन्मे लोग कहें कि किसी चाय की दुकान पर दलितों के साथ भेदभाव नहीं होता तो फिर भी समझ आता है कि चलो नहीं देखा होगा।
लेकिन यूपी बिहार राजस्थान जैसे राज्यों के छोटे शहर में पले बढ़े लोग कहें कि ऐसा नहीं देखा कभी तो साफ़ है कि वे न केवल झूठ बोल रहे हैं बल्कि एक ऐसी सामाजिक हक़ीक़त से मुँह छिपा रहे हैं जो बिना अतिरिक्त प्रयास के उनके अपने घरों में भी दिख जाएगी।
आपके घर के किसी कोने में जो बिना हत्थे के कप और शीशे के गिलास रखे हैं/ रखे थे, वही सच हैं।
और ये सच उन इलाक़ों के निन्यानवे प्रतिशत घरों का सच है।
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि चाय की दुकान पर दलितों को कागज के कप में चाय दी जाती है.
इस बात को सुनकर बहुत से ज्ञानी लोग मजाक बनाने लगे.
असल में इनको ग्रामीण भारत में दलितों के साथ हो रहे भेदभाव की समझ ही नहीं है. ये वीडियो उत्तर प्रदेश के कुशीनगर का है.
देखिए👇
“If Hindus migrate to other regions on earth, Indian caste will become a world problem.”
- Dr B. R. Ambedkar
in his paper he read on 9th May 1916, at the Colombia University
Noida woman caught hurling 'casteist' slurs at security guards of housing society.
'Joota saaf karwaungi tujhse.... Gareebon ke aulad.. do roti nahi hai jeb mein.. bh@ngi saale.. Akhilesh Yadav k kutte.... BJP se tere muh pe chappal padwaungi, aukaat me reh gareeb ki aulaad....'
Noida woman caught hurling 'casteist' slurs at security guards of housing society.
'Joota saaf karwaungi tujhse.... Gareebon ke aulad.. do roti nahi hai jeb mein.. bh@ngi saale.. Akhilesh Yadav k kutte.... BJP se tere muh pe chappal padwaungi, aukaat me reh gareeb ki aulaad....'
CJP is protesting for better schools
Congress is protesting for injured students
AAP is protesting against Ethanol & Sugar prices
Meanwhile BJP is debating why Vande Mataram should have 2 more stanzas.🤣🤣
NCLT - “नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल”
किसान 50 हज़ार न चुकाए तो ज़मीन नीलाम हो जाती है। Salaried एक EMI न भर पाएं तो घर पर बैंक के गुंडे पहुंच जाते हैं। गरीब छात्रों को तो शिक्षा तक के लिए लोन नहीं मिलता।
मगर, चुनिंदा "मित्रों" के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति है - कितना भी निकालो, जो मर्ज़ी चुकाओ।
मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना रखी हैं - एक चंद अरबपतियों के लिए, दूसरी बाक़ी सबके लिए।
मशहूर व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के अलग-अलग व्यंग्य लेखों से 14 लाइनें आपके समक्ष रखी हैं, मिर्ची से भी तीखी लगेंगी ।।
1- लडक़ों को, ईमानदार बाप निकम्मा लगता है ।
2- दिवस कमजोर का मनाया जाता है, जैसे हिंदी दिवस, महिला दिवस, अध्यापक दिवस, मजदूर दिवस । कभी थानेदार दिवस नहीं मनाया जाता।
3- व्यस्त आदमी को अपना काम करने में जितनी अक्ल की जरूरत पड़ती है, उससे ज्यादा अक्ल बेकार आदमी को समय काटने में लगती है।
4- जिनकी हैसियत है वे एक से भी ज्यादा बाप रखते हैं । एक घर में, एक दफ्तर में, एक-दो बाजार में, एक-एक हर राजनीतिक दल में।
5-आत्मविश्वास कई प्रकार का होता है, धन का, बल का, ज्ञान का । लेकिन मूर्खता का आत्मविश्वास सर्वोपरि होता है
6 –हमारे लोकतंत्र की यह ट्रेजेडी और कॉमेडी है कि कई लोग जिन्हें आजन्म जेलखाने में रहना चाहिए वे जिन्दगी भर संसद या विधानसभा में बैठते हैं ।
7- विचार जब लुप्त हो जाता है, या विचार प्रकट करने में बाधा होती है, या किसी के विरोध से भय लगने लगता है, तब तर्क का स्थान हुल्लड़ या गुंडागर्दी ले लेती है ।
8- बेइज्जती में अगर दूसरे को भी शामिल कर लो तो आधी इज्जत बच जाती है।
9- जब शर्म की बात गर्व की बात बन जाए, तब समझो कि जनतंत्र बढिय़ा चल रहा है।
10- जो पानी छानकर पीते हैं, वो आदमी का खून बिना छाने पी जाते हैं।
11- सोचना एक रोग है, जो इस रोग से मुक्त हैं और स्वस्थ हैं, वे धन्य हैं।
12- हीनता के रोग में किसी के अहित का इंजेक्शन बड़ा कारगर होता है।
13- नारी-मुक्ति के इतिहास में यह वाक्य अमर रहेगा कि ‘एक की कमाई से पूरा नहीं पड़ता।
14- एक बार कचहरी चढ़ जाने के बाद सबसे बड़ा काम है, अपने ही वकील से अपनी रक्षा करना ।
#हरिशंकरपरसाई #harishankarparsai #Satire
Justice Muralidhar warned that the concentration of wealth and political influence posed a challenge to India's democratic future
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गुरुग्राम से आया हर वीडियो बता रहा है कि शहर में पानी निकालने का सिस्टम नहीं है। स्कूल बसें डूब रही हैं। यह एक नया शहर था, नए सिरे से बसा फिर इसकी समस्या पुराने बसे शहरों की तरह क्यों हैं? इसका समाधान सोचा जाना चाहिये। ज़िला प्रशासन को खुल कर बताना चाहिए कि उनके अनुसार गुरुग्राम की समस्या के क्या कारण हो सकते हैं? ठीक होगी या नहीं होगी? वहाँ के रहने वाले लोग अगर नहीं बोलेंगे तो फिर बदलाव कैसे आएगा? पाँच घंटे जाम में रह लेंगे, एक घंटे के लिए प्रदर्शन नहीं कर सकते? वहाँ के लोग हर तरह से सक्षम है।उन्हें पूरा अधिकार है कि अच्छी व्यवस्था मिले। न मिले तो क्या करना चाहिए? सरकार से पूछनी चाहिए उसकी बात, फिर बहस करनी चाहिए। बेकार बना दिए गए एक शहर में सौ करोड़ का फ़्लैट ख़रीद लेने से शहर अच्छा नहीं हो जाता है। अफ़सोस कि गुरुग्राम के लोगों को अच्छा शहर नहीं मिला और उसके लिए लोगों ने मिलकर कोशिश भी नहीं की।