मध्य प्रदेश डिंडोरी जिले के करंजिया में भाजपा के लोगों द्वारा नाथूराम गोडसे का जयकारा लगाया गया अब देखना ये है कि @dindori_sp इस पर देशद्रोह का मुकदमा करती है या नहीं ? या फिर भाजपा के सामने चुप्पी साध लेती है।
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मध्यप्रदेश में अब परीक्षा नहीं, "पैसे और पहचान" से पद मिलते हैं। पुलिस कांस्टेबल भर्ती में 7411 पदों के लिए हुए घोटाले ने साबित कर दिया कि प्रदेश में ईमानदारी अब “रजिस्ट्रेशन नंबर” जितनी औपचारिकता बन चुकी है।
नकली सॉल्वर, बदला गया फिंगरप्रिंट, फोटो-सिग्नेचर तक मिलते नहीं, और असली उम्मीदवार 400-500 किमी की यात्रा कर सिर्फ मायूसी लेकर लौटते हैं। क्या यही है मप्र की रोजगार नीति?
आज विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायक दल ने पुलिस की प्रतीकात्मक वर्दी पहनकर प्रदर्शन किया। क्योंकि असली वर्दी अब फर्जी तरीकों से बिक रही है, और सरकार मौन दर्शक बनी है।
ये घोटाला सिर्फ एक भर्ती का नहीं, युवाओं के भविष्य की लाश पर राजनीतिक चुप्पी का अपराध है। यह व्यापम पार्ट-2 है, और इसकी निष्पक्ष न्यायिक जांच जरूरी है। वरना कल असली अपराधियों की जगह नकली पुलिस ही तैनात मिलेगी!
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इंदिरा गांधी अमरकंटक विश्वविद्यालय की स्थापना 2007-08 में आदिवासी छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा में अवसर देने के उद्देश्य से की गई थी। शुरुआती वर्षों में इस संस्थान में 80–90% छात्र एसटी वर्ग से थे, लेकिन आज उनकी भागीदारी घटकर मात्र 10–15% रह गई है। यह बदलाव केवल एक आंकड़ा नहीं, आदिवासी समाज की शिक्षा से हो रही दूरियों का स्पष्ट प्रमाण है।
अगर यह विश्वविद्यालय आदिवासी उत्थान के लिए स्थापित किया गया था, तो एसटी और एससी वर्ग के लिए कम से कम 50% आरक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। केवल भवन बनाना पर्याप्त नहीं है, उसमें प्रवेश का द्वार भी समान रूप से खुला होना चाहिए।
यह विडंबना है कि जिस संस्थान का नाम इंदिरा गांधी के नाम पर है — जिन्होंने हमेशा आदिवासी क्षेत्रों में विकास की बात की — वही संस्था आज आदिवासी युवाओं की पहुंच से दूर होती जा रही है।
मेरा आग्रह है कि विश्वविद्यालय की प्रवेश नीति में सुधार कर, आदिवासी और वंचित वर्गों के लिए आरक्षण और छात्रवृत्ति योजनाओं को प्रभावी किया जाए, ताकि यह संस्थान अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर सके।
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@dindori_sp मामले को त्वरित संज्ञान में लेकर उचित कार्यवाही करें और दोषियों को तत्काल बर्खास्त करें। आदिवासियों पर आए दिन हमला अत्याचार हो रहे हैं प्रशासन भी हमलावर हो रही है, कब तक बर्दाश्त करें हम।
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@dindori_sp डिंडोरी पुलिस अधीक्षक महोदया जी, आदिवासियों पर पुलिस को अभद्रता और बदसलूकी करने का पूरा छूट दे दिया गया है क्या ? रक्षक ही भक्षक बन रहे हैं तो आपके निर्देशों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है।
@DrMohanYadav51 जी आपके शासन में आदिवासियों पर अत्याचार चरम पर है।
@dindori_sp कहते हुए शर्म आ रही है सरकार और पुलिस का कोई खौफ नहीं है, ये लोग कब किसकी जान ले ले कोई तय नहीं, खुलेआम आदिवासियों को नाम जात पूछकर पीला गमछा देखकर मार रहे हैं, डिंडोरी प्रशासन और सरकार को शर्म आना चाहिए या उनके ही पनाह में रहकर ऐसा दुस्साहस किया जा रहा है
@HIRA_ALAWA
आदिवासी महिलाएं को सबक लेने की जरूरत है, समाज सबसे आगे हैं, गैरों ने आदिवासियों का शोषण तो किया है, आर्थिक, मानसिक, शैक्षणिक और महिलाओं का शारीरिक रूप से भी, गैर आदिवासी लोग आदिवासी महिलाओं के साथ झांसा देकर शोषण करते हैं
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डिंडोरी जिले के बैगा बाहुल्य गांव लिम्हा में गांव की वास्तविकता जानने को मिला, कि सरकारी दावे और गांव की हकीकत के बीच कितनी बड़ी खाई है। वहां के लोगों के करीब जाकर उनसे रूबरू होने का मौका मिला, पूरा वृतांत..
Gondwana Samay का आभार ....
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जयस प्रदेश सचिव द्वारा घोटाले के उच्च स्तरीय जांच के लिए मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखा गया है, यह आदिवासियों के शिक्षा से जुड़ा है, अगर सरकार खुद को आदिवासी हितैषी कहती है तो मामले की जांच कराएं और दोषियों को सख्त सजा दें
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हल्द्वानी में लोग इस ठंड में अपने घर बचाने के लिए सड़कों पर है, पर इसे टीवी पर नही दिखाया जाएगा, कोई गोदी मीडिया का चैनल इसे कवर नही करेगा क्योंकि वो इनके एजेंडे में फिट नही बैठता.
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Pakistan: पाकिस्तान में बुरा हाल, सिपाही के 1667 पदों के लिए 32 हजार पहुंचे, जमीन पर बैठाकर ली परीक्षा
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