SC/ST एक्ट लगा दी थी, 7 महीने से जेल में था, शादी नहीं करता तो 20 साल जेल में रहना पड़ता, इसलिए समझौता करना पड़ा:- सुरेश कुमार
युवक और युवती रिलेशनशिप में थे। बाद में युवती ने युवक पर रेप और SC/ST केस करवाकर 7 महीने का जेल करवा दी, शादी की शर्त पर समझौता किया। जेल के अंदर शादी हुई! अब ये व्यक्ति पूरा जीवन डर के रहेगा कि कब ये लड़की इसे दोबारा जेल करवा दे
मुझे नहीं पता जानकर बताएं:- यहाँ रेप और और SC/ST एक्ट का दुरुपयोग हुआ है या नहीं? ऐसे कितने केसेस में लोग जेल में होंगे। मामला छत्तीसगढ़ के जगदलपुर का।
यह वीडियो देखने के बाद मोदी-शाह की जोड़ी के प्रति सम्मान और भी बढ़ गया।
खतरे की भनक लगते ही आंदोलन समाप्त करवाकर उन्होंने देश को जलने और Gen Z की जान को खतरे में पड़ने से बचा लिया।
देश के साथ इतनी बड़ी गद्दारी फिर भी आंबेडकरवादी मीडिया से यह मुद्दा गायब है,अगर आरोपियों का सरनेम जाटव की जगह शर्मा होता तो आंबेडकरवादी अभी तक आग लगा चुके ।
आरोपियों के नाम इस प्रकार है।
👉उमेश जाटव
👉संजय जाटव
👉धारा जाटव
👉आकाश जाटव
इन चार गद्दारो को अभी हाल में ही राजस्थान के अलवर में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप ने पुलिस ने पकड़ा है।
क्या किसी आंबेडकरवादी मीडिया ने ये खबर अपने पोर्टल या SM हैडल दिखाई ?
भलस्वा लैंडफिल में बड़ा बदलाव, कूड़े के पहाड़ की ऊंचाई आधे से भी कम हुई
दिल्ली के भलस्वा लैंडफिल पर कूड़ा हटाने का अभियान तेज़ी से जारी है।
कूड़े के पहाड़ की ऊंचाई 65 मीटर से घटकर लगभग 30 मीटर रह गई है।
एमसीडी का लक्ष्य 2026 के अंत तक इस लैंडफिल को पूरी तरह साफ करना है।
वैसे तो हम पाठशाला में पहले भी बता चुके कि प्रेस फ्रीडम इंडेक्स कैसे दो कौड़ी की रेटिंग है और कैसे 180 देशों की रैंकिंग पूरी दुनिया के 150-200 लोग मिलकर तैयार कर देते हैं लेकिन इस रैंकिंग की विश्वसनियता का अंदाजा इस खबर से लगा लो..
वो पाकिस्तान 153 रैंक के साथ 157 रैंक वाले भारत से बेहतर बताया जाता है इसमें जो अपनी बर्बरता छुपाने के लिए विदेशी मीडिया को बैन किए जा रहा है।
गजबे है।
रिजर्वेशन को बढ़ाकर बिश्वगुरु बनने के सपने दिखाए जा रहे हैं, लेकिन ज़रा देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत भी देख लीजिए।
बिहार के शिवहर की 20 वर्षीय रेखा कुमारी कान का इलाज कराने पटना के महावीर आरोग्य संस्थान गई थीं। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद नर्स ने नस की बजाय आर्टरी में इंजेक्शन लगा दिया। रेखा ने दर्द और तकलीफ़ की शिकायत भी की, लेकिन कथित तौर पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा इन्फेक्शन इतना बढ़ा कि उनका हाथ काटना पड़ा। नवंबर में होने वाली शादी भी टूट गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि FIR दर्ज कराने गए तो पुलिस ने मना कर दिया।
सोचिए, जिस देश में इलाज कराने जाओ और इलाज के बदले अपना हाथ गंवाकर लौटो, वहाँ सिर्फ़ नारे लगाने से क्या होगा? पहले अस्पतालों में जवाबदेही, डॉक्टरों-नर्सों की जिम्मेदारी और पीड़ितों को न्याय तो सुनिश्चित कीजिए। 100 में से 99 पाने वाले घर बैठेंगे और -40 लानेवाले इलाज करेंगे तो और क्या ही उम्मीद करेंगे हम सब ।
नारों से नहीं, व्यवस्था से देश महान बनता है।