जब गीताप्रेस ने पौराणिक इतिहास के विरुद्ध लिया था निर्णय, तब एकमात्र स्वामी निग्रहाचार्य ने ही गीताप्रेस को फट्कार लगाते हुए धर्मशास्त्रों की रक्षा हेतु मुखरता दिखायी ! मूल वक्तव्य के कुछ अंश, पुनः प्रसारित !
#निग्रहाचार्य#Nigrahacharya#jagadguru
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बहुधा सनातन धर्म के अनेक प्रसिद्ध मठाधीश एवं जगद्गुरु व्यक्तिगत एवं एकान्त में हमसे यह प्रश्न करते हैं कि उनका चित्त शुद्ध नहीं रह पाता। हम उन्हें उनके सम्प्रदायोक्त आराधना की मर्यादा में कुछ परामर्श अवश्य प्रदान करते हैं किन्तु सार्वजनिक रूप से भी कुछ चिन्तन प्रस्तुत करेंगे। हमने अनेक मञ्चों पर इस तथ्य को स्पष्ट किया है कि धर्मगुरुओं के मतिविभ्रम का एक प्रमुख कारण अन्नदोष है। अपने मठ को सर्वाधिक भौतिक सुख सुविधाओं से युक्त करने की महत्त्वाकाङ्क्षा, स्वयं को बड़े बड़े उद्योगपति एवं नेताओं के साथ उठने बैठने वाला दिखाकर समाज को आकर्षित करने की लोकैषणा एवं अपने सम्प्रदायोक्त सदाचार के प्रति निष्ठा के अभाव के कारण मठाधीशों के जीवन में भय, लोभ, अज्ञान एवं मात्सर्य की भावना अनियन्त्रित रूप से बढ़ती जा रही है।
मात्र किसी सम्प्रदाय के मठ का अधिपति बन जाना, अथवा किसी मठाधीश का कृपापात्र बनकर व्यासपीठ पर बैठ जाना, अथवा किसी सेठ, मीडिया, नेता की अनुकम्पा पर बड़े मञ्च पर स्थान मिलने मात्र से किसी व्यक्ति में धर्मोपदेश का सामर्थ्य और विवेक भी आ जायेगा, यह इस कलिकाल में वन्ध्यापुत्र के विवाह के समान असम्भाव्य है। शास्त्र स्पष्ट कहते हैं -
पुराणन्यायमीमांसाधर्मशास्त्रार्थचिन्तकाः।
सदाचारपरा ये वै तदुक्तं यत्नतश्चरेत्॥
(शारदापुराणे)
पुराण, न्याय, मीमांसा और स्मृतियों के शास्त्रीय अर्थ का चिन्तन करते हुए जो स्वयं भी उस सदाचार का पालन करते हैं, ऐसे धर्मज्ञ जनों के निर्देश का अनुसरण समाज को प्रयत्नपूर्वक करना चाहिए। एक ओर आप स्वयं को जगद्गुरु कहेंगे और फिर उस कर्त्तव्य का स्वयं ही पालन नहीं करेंगे तो समाज की दिशा और दशा क्या होगी ? जगद्गुरु कौन है ?
जगतः परमहितोपदेष्टृत्वाज्जगद्गुरुः॥
(प्रणवकल्पप्रकाशे)
संसार को उसके परम कल्याण का उपदेश करने वाले जगद्गुरु हैं।
प्रत्ययाष्टाङ्गवादेन कामार्थाभिहतान्नृपान्।
शनैर्धर्मे नियुञ्जीत ज्ञानयोगे पुनः क्रमात्॥
एवं यः सर्वयत्नेन राजानं बोधयेद्बुधः।
जगद्गुरुस्सविज्ञेयस्सर्वलोकानुकम्पनः॥
(शिवधर्मोत्तरपुराणे प्रथमाध्याये)
मन्त्र, औषधि, निधि आदि धर्ममार्गावतार अष्टविध नीतियों का प्रयोग करके अर्थ-काम में फंसे विलासी राजाओं को भी सभी प्राणियों पर कृपा करने की भावना से मार्गदर्शन देकर धीरे धीरे उसे धर्म और ज्ञान के प्रति प्रेरित करने वाले को जगद्गुरु कहा जाता है।
आज स्वयं को धनबल और सत्ताबल के चरणों में निवेदित करने वाले अशास्त्रविहित जीवन से युक्त मठाधीश क्या जगद्गुरु शब्द की शास्त्रीय परिभाषा में स्वयं को व्यवस्थित देखते हैं ? शास्त्रों में नादबिन्दु भेद से दो प्रकार के वंश बताये गये हैं।
वंशो द्विधा विद्यया जन्मना च।
(सिद्धान्तकौमुद्याम्)
विद्यया जन्मना वा प्राणिनामेकलक्षणसंतानो वंश इत्यभिधीयते।
(काशिकावृत्तिः)
विद्या एवं जन्म, दो माध्यमों से वंश का निरूपण किया जाता है। विद्यावंश का जनक गुरु है, जन्मवंश का जनक पिता है। अतः वेद भगवान् श्रीगुरुमुख से शिष्य के लिए अनुशासन कहते हैं -
यान्यनवद्यानि कर्माणि तानि सेवितव्यानि। नो इतराणि॥ यान्यस्माकं सुचरितानि तानि त्वयोपास्यानि। नो इतराणि॥
(तैत्तिरीयोपनिषदि)
हे शिष्य ! तुम हमारे शास्त्रोक्त एवं निष्पाप चरित्र एवं कर्म का ही सेवन करना, अनिन्द्य का ही अनुसरण करना, अन्य का नहीं। वेद की इसी मर्यादा का उपदेश महर्षि विश्वामित्र भी अपने पुत्र देवरात को करते हैं -
वेदे शिष्याः प्रबोध्यन्ते गुरुणा स्वयमेव हि।
यानि सुचरितान्येव ह्यस्माकं शृणु पुत्रकाः॥
तान्येव समुपास्यानि नेतराणि कदाचन।
यतो नरो बहुज्ञोऽपि न सर्वज्ञ इति स्थितिः॥
अल्पज्ञत्वात्प्रमादाद्वा कदाचाररतो भवेत्।
तेजीयांसः समर्था ये तेषां दिव्यं हि जीवनम् ॥
नानुकर्तुं हि तच्छक्यं मनुजैरल्पशक्तिभिः।
विषदिग्धं पूतनायाः पपौ स्तन्यं जनार्दनः ॥
मुञ्जाटवीदवाग्निञ्च शिवो हालाहलं विषम्।
अल्पशक्तिर्नरस्तस्मान्न देवचरितं चरेत्॥
(कौशिकरामायणे)
वेद में गुरु शिष्य को सर्वप्रथम स्वयं यही उपदेश देते हैं कि हे पुत्र ! सुनो, हमारे जो वेदानुमोदित अच्छे आचरण हों, उनका ही तुम अनुकरण करना, अन्य का नहीं क्योंकि मनुष्य बहुत कुछ का ज्ञाता होता हुआ भी सर्वज्ञ तो नहीं होता, यह बात स्पष्ट है। इसलिए अल्पज्ञ होने के कारण अथवा प्रमादवश मनुष्य अधर्म के आचरण में रत हो सकता है। जो तेजस्वी और समर्थ होते हैं उनका जीवन दिव्य कोटि का होता है, अल्पशक्ति वाला साधारण मनुष्य उनके दिव्य आचरणों की नकल नहीं कर सकता। भगवान् श्रीकृष्ण ने पूतना का विषाक्त स्तनपान किया और मुञ्जवन में लगी अग्नि का भी पान किया । भगवान् शिव ने हालाहल विष का पान किया, क्योंकि वे समर्थ थे। इसलिए अल्पशक्ति वाले मनुष्य को देवताओं के आचरण का अनुकरण नहीं करना चाहिए।
"आदरणीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी, करोड़ों भारतीयों की आस्था और अर्थव्यवस्था का आधार गौ-वंश आज संकट में है। हमारी विनम्र प्रार्थना है कि गौ-हत्या को पूर्णतः बंद कर गौ-माता को अविलंब 'राष्ट्रमाता' घोषित किया जाए।
#gauhatyabandho#gaumatarashtramata"
आज के सफल ज्ञापन कार्यक्रम के लिए सभी सहयोगियों का धन्यवाद। हमारा उद्देश्य केवल गौ-माता का सम्मान सुरक्षित करना है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी, इस पुण्य कार्य में आपके निर्णय की हमें प्रतीक्षा है। सप्रेम निवेदन। 🙏🚩
@narendramodi@PMOIndia#gaumatarashtramata#NarendraModi
बहुत हुआ अब मौन समर्थन, अब होगा तहसील प्रदर्शन! 🚩
कल का दिन भारत के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित होने वाला है। अब समय आ गया है कि हम केवल बातों से नहीं, बल्कि अपनी उपस्थिति से प्रशासन को अपनी ताकत दिखाएं।
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#GauSammanAahvaanAbhiyaan#rastramata#gauseva#abhiyaan
समय आ गया है अपनी आवाज़ सीधे देश के 'प्रधान सेवक' तक पहुँचाने का!🚩कल, 27 अप्रैल का दिन हम सभी गौ-भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपनी आस्था और संस्कृति की रक्षा के लिए अब हमें डिजिटल माध्यम का उपयोग कर माननीय प्रधानमंत्री जी तक अपनी बात पहुँचानी है।
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#gauhatyabandho
आदरणीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी, करोड़ों भारतीयों की आस्था और अर्थव्यवस्था का आधार गौ-वंश आज संकट में है। हमारी विनम्र प्रार्थना है कि गौ-हत्या को पूर्णतः बंद कर गौ-माता को अविलंब 'राष्ट्रमाता' घोषित किया जाए।
#gauhatyabandho#gaumatarashtramata
गौ-माता केवल एक पशु नहीं, हमारी संस्कृति की आत्मा है। @narendramodi जी से निवेदन है कि गौ-वंश के संरक्षण के लिए सख्त केंद्रीय कानून बनाएं। अब और देरी सहन नहीं होगी! 🚩
#gauhatyabandho#gaumatarashtramata
जब तक गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगता, तब तक राष्ट्र का सर्वांगीण विकास अधूरा है। प्रधानमंत्री @narendramodi जी, देश के करोड़ों गौ-भक्तों की पुकार सुनें। 🙏
#gauhatyabandho#gaumatarashtramata
गौ-रक्षा ही राष्ट्र-रक्षा है! हम मांग करते हैं कि गौ-माता को अविलंब 'राष्ट्रमाता' का दर्जा मिले। @narendramodi जी, इस ऐतिहासिक कदम से भारत की गौरवशाली परंपरा को सुरक्षित करें। 🛡️
#gauhatyabandho#gaumatarashtramata
गौ सम्मान
हमारी पहचान
गौ सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा
मैं स्वयं की इच्छा से
दिनांक 27 अप्रैल को अपना प्रतिष्ठान
सुबह 9:00 बजे से 12:00 बजे तक
बंद रखूंगा
एवं गौ सम्मान हेतु इस कार्य में
अपना पूरा सहयोग प्रदान करूंगा
उपखण्ड कार्यालय जाकर
प्रार्थना पत्र दूंगा
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#rastramata#gauseva
भगवत्पाद शिवावतार जगद्गुरु आदि शङ्कराचार्य भगवान् के २५३३वाँ प्राकट्य महोत्सव की अनंत अनंत शुभकामनाएँ🪷🙏
वैशाख शुक्ल पञ्चमी, (विक्रम स० 2083) मङ्गलवार 21 अप्रैल, 2026
हर हर शंकर जय जय शंकर🪷
वीरों की धरती अहीरवाल से फिर गूंजी आवाज — अहीर रेजिमेंट की मांग हुई बुलंद
हरियाणा के रेवाड़ी की ऐतिहासिक धरती एक बार फिर चर्चा में रही, जब Akhilesh Yadav यहां पहुंचे। वह ओल्ड राव पैलेस में अपनी भांजी डॉ. श्वेता के विवाह समारोह में शामिल होने आए थे, लेकिन उनका यह दौरा सामाजिक और
पूजा यादव, पुत्री श्री पवन यादव, ने अपनी मेहनत और लगन से कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा (CGL) में शानदार सफलता हासिल करते हुए
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC), वित्त मंत्रालय में Tax Officer के पद पर चयन प्राप्त किया है।
आपकी इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई I
उच्च पदों पर भी विनम्रता, धैर्य और सम्मानजनक संवाद सबसे बड़ी मिसाल होती है।
अच्छा व्यवहार समाज के लिए बेहतर उदाहरण बनता है।
सेवा में जितनी भी बड़ी जिम्मेदारी हो, शालीनता कभी नहीं छोड़नी चाहिए।@IASassociation#CivilServices#Professionalism#GoodBehaviour