नौकरी के बदले तुमने औरंगजेब की सेना में भर्ती होकर राममंदिर तोड़ा, कृष्णजन्मभूमि तोड़ी, काशी तोड़ा, शिवाजी को धोखा दिया, तुमने अंग्रेज़ो की नौकरी भी की ओर रानी लक्ष्मीबाई ,तांत्याटोपे, कुँवरसिंह, नानासाहेब की मुखबिरी की,
तुमने आजाद हिंद फौज पर गोलियां बरसाई।😡😡😡
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नौकरी की अंधी भूख
नौकरी के लिए तुम सिकन्दर की सेना में भर्ती होकर चाणक्य के विरुद्ध लड़े,
खिलजी के सेना में भर्ती होकर गुरुकुल तोडे, अकबर की सेना में भर्ती होकर हेमचन्द्र विक्रमादित्य के विरुद्ध लड़े..
तो कभी राणाप्रताप के विरुद्ध , कभी अहिल्याबाई के विरुद्ध😡
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देश के जवान का दर्द...भू-माफियाओं से परेशान परिवार..CM योगी से मिलने और सेना द्वारा 2 बार लेटर जाने के बावजूद दबंग माफियाओं पर नहीं हुई कोई कार्यवाही..!
वीर बहादुर कहते है कि -
मैं यहां LOC पर देश सेवा करूं या अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता में पड़ा रहूं..!
जम्मू-कश्मीर LOC पर तैनात भारतीय सेना के जवान वीर बहादुर सिंह ने उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला (चुरिया गांव) से एक भावुक वीडियो जारी किया है..!
जवान का आरोप है कि भू-माफिया और दबंग उनके परिवार (बुजुर्ग माता-पिता और बहनों) को परेशान कर रहे हैं...!
इस वीडियो के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से परिवार की सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई गई है..!
CM योगी और PM मोदी से न्याय की गुहार लगा रहे सेना के जवान की पीड़ा सुनिए.. 👇👇
कपिल सिब्बल (सौरव दास के वकील) कोर्ट में:
“सौरव दास की पर्सनल फाइनेंस, उनकी इनकम, वो कहाँ रहते हैं, उनके माता-पिता कौन हैं – ये सब नहीं बताया जा सकता क्योंकि वो जर्नलिस्ट हैं।” – लॉ बीट
सौरव दास सुप्रीम कोर्ट जजों की संपत्ति-इनकम, पीएम की डिग्री और निजी जिंदगी जानना चाहते हैं… लेकिन खुद के बारे में कुछ भी नहीं बताना चाहते!!
ऐसा कैसे चलेगा भाई @SauravDassss??
माँ-बाप का नाम भी कौन छुपाता है? 😂
#DoubleStandards #TransparencyOnlyForOthers
एक आयरन लेडी 93000 पाकिस्तानी छोड़ के भी 48 भारतीय नहीं ले पाई थी...
और एक हमारा 56 इंची सीने वाला एक फौजी के लिए पूरा पाकिस्तान उड़ाने को तैयार हो गया था...
एक युवक भोपाल में नौकरी करने आया और उसे एक छोटे से पीजी में कमरा मिला जिसका
किराया ₹4,500 था।
एक दिन उसने देखा कि पीजी के बाहर रोज़ सुबह एक बुजुर्ग महिला दूध के पैकेट और घर के बने पराठे बेचने आती थी।
एक लड़के ने पूछा
"आंटी रोज़ इतनी सुबह क्यों आती हो?"
महिला बोली
"घर में बहू और पोती हैं। घर से कुछ कमाई हो जाए तो अच्छा है।"
युवक ने देखा कि महिला हर दिन लगभग 40 पराठे लेकर आती थी और करीब दो घंटे में सब बिक जाते थे।
उसने पूछा
"आंटी अगर 40 की जगह 150 पराठे बनें तो?"
महिला हँसकर बोली
"बेटा, कौन खाएगा इतने?"
युवक ने कहा
"आप नहीं बेचेंगी। मैं आपके लिए ग्राहक ढूँढ़ूँगा।"
उसने पीजी के लड़कों का एक समूह बनाया।
अगले दिन उसने पूछा
"कितने लोग सुबह बाहर नाश्ता खरीदते हैं?"
करीब 25 लोगों ने हामी भर दी।
उसने महिला से कहा
"आप सुबह सिर्फ़ ऑर्डर के हिसाब से बनाइए।"
अगले दिन 60 पराठे बिक गए।
फिर पास के दो पीजी के लड़कों ने भी ऑर्डर देना शुरू कर दिया।
एक महीने में रोज़ करीब 180 पराठे जाने लगे।
एक पराठे की कीमत ₹35 थी।
यानी रोज़ की बिक्री करीब ₹6,300।
महिला के पास पहले जितना पैसा नहीं बचता था उससे कहीं ज्यादा बचने लगा।
लेकिन युवक ने खुद कोई पैसा नहीं लिया।
उसने सिर्फ़ हिसाब और ऑर्डर संभालने का तरीका बनाया था।
एक दिन महिला ने पूछा
"बेटा, तुम्हें इसमें क्या मिलेगा?"
वह मुस्कुराया।
बोला
"आंटी, अभी कुछ नहीं।
पहले आपका काम खड़ा हो जाए।"
कुछ महीनों बाद महिला ने अपने घर की छोटी रसोई में दो और महिलाओं को काम पर रख लिया।
अब रोज़ 500 से ज्यादा पराठे बनते थे।
पीजी के लड़कों के अलावा पास के कार्यालयों में भी नाश्ता जाने लगा।
महिला ने एक दिन युवक को बुलाकर कहा
"अब तुम अपनी कमाई तय करो।"
युवक ने कहा
"आप हर महीने जितना मुनाफा बचाती हैं उसमें से सिर्फ़ 10 प्रतिशत मुझे दे देना।
बाकी आपका।"
महिला मान गई।
अब युवक की नौकरी के साथ उसकी एक छोटी अतिरिक्त आय बनने लगी।
लेकिन असली फायदा यह था कि तीन घरों की आमदनी बढ़ चुकी थी।
एक साल बाद महिला ने अपनी बेटी के नाम से बैंक में ₹2 लाख की सावधि जमा कर दी।
बोली
"पहले मैं सिर्फ़ रोज़ का खर्च सोचती थी।
अब पहली बार भविष्य के लिए पैसा बचा रही हूँ।"
युवक ने कहा
"आंटी, मैंने आपको कमाई का रास्ता नहीं दिया।
आपके पास काम पहले से था।
मैंने बस आपके काम को ग्राहक तक पहुँचा दिया।"
वह दिन मेरे लिए भी अलग था।
एक पीजी के बाहर बिकने वाले कुछ पराठों से शुरू हुआ काम
कुछ ही महीनों में एक छोटे घरेलू कारोबार में बदल गया।
कभी-कभी व्यापार शुरू करने के लिए दुकान या बड़ी पूंजी नहीं चाहिए।
किसी के हुनर को सही ग्राहक से जोड़ना भी एक कारोबार बन सकता है।
अगर आपके आसपास कोई स्वादिष्ट घर का खाना बनाता हो लेकिन ग्राहक न हों तो क्या आप उसके लिए ग्राहक ढूँढ़कर कमाई में हिस्सा लेना चाहेंगे?
दिमागी नक्सल व्यक्ति से अधिक प्रवृत्ति है। एक पीढ़ी से दूसरी पीढी को ट्रांसफर करनेवाली । इनका सबसे बड़ा टूल है किसी स्थापित मान्यता पर भ्रम का वातावरण निर्माण। दैनिक जागरण का मेरा स्तंभ https://t.co/78EegB6eoq
2 दिन पहले उत्तर प्रदेश के बनकटा गांव की महिला योगी जी के जनता दरबार में रास्ते का फरियादी की थी कि उसके घर आने का रास्ता दबंग लोगो ने बंध कर दिया
योगी जी ने सख्त तेवर दिखाए थे और कहा था कि अगर रास्ता ना खुले तो सभी अधिकारियों को सस्पेंड करो
और आज पूरा प्रशासनिक अमला जेसीबी लेकर महिला घर के रास्ते को खुलवा दिया और एक सड़क बना दी गई
अगर आपका मुख्यमंत्री ईमानदार है तो कभी किसी के साथ अन्याय नहीं हो सकता
@rishibagree Must React very very hard on public violence & make assurance to collect money from those who damage the public property, with interest & cancel all the government facility from current and their families &This restriction appliance next 7 generation.Comply Nation First to All.