Advocate⚖️-Ph.D Scholar-National Co Convenor,National Legal Team NSUI-National Spokesperson NSUI-National Player-Chairman,DCC Legal-Tweets are personal
पिता तुल्य @cmbishnoi जी पंचकूला से विधायक निर्वाचित होने के उपरांत हरियाणा विधानसभा में बतौर विधायक(5 वी बार) शपथ ग्रहण करते हुए।🙏🙏
हरियाणा विधानसभा के सबसे युवा विधायक होने से लेकर सबसे सीनियर विधायकों में शुमार होने तक के सफर में संघर्ष और चंद्रमोहन जी का हरियाणा के प्रति दर्द उनकी सादगी से साफ प्रतीत होता है🙏
The day for which we were waiting since long 🙏
#ChanderMohan
“आप दीवार के चित्रों को बदल कर इतिहास के तथ्यों को नहीं बदल सकते हैं”- पं जवाहर लाल नेहरू।
आधुनिक भारत के निर्माता, प. जवाहर लाल नेहरू जी को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन🙏!
Original Video👇
आज श्री राहुल गांधी जी ने गुरुग्राम में श्री @BrijendraSpeaks द्वारा आयोजित ‘सद्भाव यात्रा’ में भाग लिया, अपना प्रेम व सहयोग दिया और कांग्रेसजनों का साहस बढ़ाया । सद्भाव यात्रा के सभी साथियों को बहुत बधाई व शुभकामनाएँ ।
हरियाणा के सम्मान की प्रतीक पगड़ी राहुल जी को पहना उनका स्वागत किया ।
प्रेम और भाईचारा ही नफ़रत की सियासत को काटेगा, यही सच की लड़ाई है ।
तूफानों से टकराकर हमने अपनी हस्ती बनाई है,
स्वाभिमान की आग में तपकर यह शख्सियत पाई है।
जब बात हक और सच की आएगी, तो याद रखना,
नज़रे झुकाना हमारी फितरत नहीं, हमने सच को दहाड़ना सीखा है!"
"बीजेपी की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा द्वारा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजनलाल जी और पूर्व उपमुख्यमंत्री व विधायक चंद्रमोहन बिश्नोई जी पर की गई टिप्पणी बेहद निंदनीय है।
ऐसे बयान, खासकर एक दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री के बारे में इस तरह की टिप्पणी, सार्वजनिक जीवन की गरिमा और राजनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं। एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसी भाषा की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
रेखा शर्मा व भाजपा नेतृत्व तुरंत सार्वजनिक माफी मांगें।"
- श्री @raonarenderinc@INCHaryana
भजनलाल जी आज हमारे बीच नहीं हैं और ऐसे समय में उन पर इस तरह की टिप्पणी करना सिर्फ अनुचित ही नहीं अपितु हरियाणा की राजनीतिक परंपराओं के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है…
तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे नेता के बाबत की जा रही बेबुनियाद बयानबाज़ी दरअसल हमारे मूल्यों और संस्कारों पर सीधा प्रहार है और चिंता की बात यह है कि यह सब प्रदेश के मुखिया की उपस्थिति में उस मंच से हो रहा था जहाँ जिम्मेदारी और गरिमा की सबसे अधिक अपेक्षा होती है।
जिन लोगों का हरियाणा के सार्वजनिक जीवन में कोई ठोस योगदान नहीं रहा वो भी आज हमारी धरोहरों को कटघरे में खड़ा करने का दुस्साहस कर रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी को आत्ममंथन करना चाहिए और अपने विधायकों व सांसदों को यह समझाना चाहिए कि सत्ता का अर्थ केवल अधिकार नहीं बल्कि मर्यादा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी भी होती है।
हम स्पष्ट रूप से इस तरह की बयानबाज़ी करने वाले नेताओं की कड़ी निंदा करते हैं तो वहीं साथ ही मंच पर मौजूद रहकर चुप्पी साधे नेताओं की भूमिका को भी उतनी ही सवालों के घेरे में मानते है इसलिए ऐसे सभी लोगों को जनता और प्रदेश की भावनाओं का सम्मान करते हुए सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए।
@bishnoikuldeep@cmbishnoi
भाजपा साँसद श्रीमती रेखा शर्मा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री, स्वर्गीय चौधरी भजन लाल बारे की गई अमर्यादित टिपण्णी पूरी तरह शर्मनाक, अस्वीकार्य व अपमानजनक है ।
सार्वजनिक जीवन में इस प्रकार की भाषावली सामाजिक तथा राजनीतिक शुचिता से परे है। वो भी एक ऐसे व्यक्ति के बारे जो दिवंगत हैं और जिन्होंने लंबी राजनीतिक पारी निभाई।
यही नहीं उनके बेटे और पूर्व उप मुख्यमंत्री, हमारे साथी श्री चंद्रमोहन को लेकर की गई शब्दावली भी मर्यादा और शुचिता से कौसों दूर है ।
राजनीति में ऐसा अहंकार ही पतन की पहली शुरुआत है। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री श्री नायब सैनी व भाजपा अध्यक्ष श्री मोहन लाल बड़ौली सार्वजनिक तौर से चौधरी भजन लाल के पूरे परिवार से क्षमा मांग अपनी सांसद के ख़िलाफ़ कार्यवाही करेंगे ।
महान नेता दिवंगत स्व० भजनलाल जी एवं विधायक पंचकुला पूर्व उप मुख्यमंत्री @cmbishnoi जी पर अभद्र टिप्पणी करने पर कानूनी नोटिस दिया है। प्रदेश निर्माताओं के लिए ऐसे झूठे ब्यान करना लोकतंत्र और सिद्धांतों के विरुद्ध है।👇🏼
@bishnoikuldeep@bbhavyabishnoi
भाजपा की राज्यसभा सांसद द्वारा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजनलाल जी तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं विधायक श्री चंद्रमोहन बिश्नोई जी के प्रति की गई टिप्पणी अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।
भाजपा और उनके सांसद को इस प्रकार की अमर्यादित टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए तथा भविष्य में इस प्रकार की भाषा से परहेज करना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक गरिमा और राजनीतिक संवाद की शुचिता बनी रहे।
राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा द्वारा पूर्व CM भजनलाल को बदमाश कहने का मामला तूल पकड़ रहा है भाजपा के अन्दर ही इसका विरोध शुरु हो गया है
कुलदीप बिश्नोई के करीबी रणधीर पनिहार ने कहा है की वह इस मामले को मुख्यमंत्री प्रदेश अध्यक्ष व केन्द्रीय नेतृत्व के सामने विरोध दर्ज करायेंगे
उन्होने चन्द्रमोहन को भी अच्छा इंसान बताया
भजनलाल जी आज हमारे बीच नहीं हैं, ऐसे में उन पर इस तरह की टिप्पणी करना न सिर्फ अनुचित बल्कि बेहद दुःखद है।
जिनका हरियाणा के सार्वजनिक जीवन में कोई योगदान नहीं, वही आज हमारी धरोहरों पर मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बेबुनियाद बयानबाज़ी कर रहे हैं।
भाजपा को चाहिए कि अपने विधायकों और सांसदों को सार्वजनिक आचरण की मर्यादा पर प्रशिक्षण दे।
@NayabSainiBJP@bishnoikuldeep
#Haryana
भाजपा की राज्यसभा सांसद द्वारा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजनलाल जी तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं विधायक श्री चंद्रमोहन बिश्नोई जी के प्रति की गई टिप्पणी अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।
सार्वजनिक जीवन में रहने वाले प्रत्येक जनप्रतिनिधि से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने शब्दों का चयन पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ करें। इस प्रकार की टिप्पणियां न केवल व्यक्तियों का अपमान करती हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक शिष्टाचार को भी आहत करती हैं।
स्वर्गीय भजनलाल जी 36 बिरादरी के सम्मानित नेता रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए हरियाणा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। श्री @cmbishnoi जी को जनता ने 5 बार विधायक के रूप में चुनकर उनके जनसंपर्क और जनसेवा के प्रति विश्वास को स्पष्ट किया है।
भाजपा और उनके सांसद को इस प्रकार की अमर्यादित टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए तथा भविष्य में इस प्रकार की भाषा से परहेज करना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक गरिमा और राजनीतिक संवाद की शुचिता बनी रहे।
देश के उच्च सदन में हरियाणा का प्रतिनिधित्व करने वाली बीजेपी सांसद की इतनी निम्न श्रेणी की भाषा शैली से प्रत्येक हरियाणा वासी को गहरा धक्का लगा है।
बीजेपी सांसद रेखा शर्मा का बयान न केवल स्वर्गीय पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल जी, कांग्रेस के लोकप्रिय विधायक चन्द्रमोहन जी व हरियाणा के एक प्रतिष्ठित परिवार का अपमान है, बल्कि प्रदेश और पंचकूला की जनता का भी अपमान है। मैं इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ। @cmbishnoi
Apart from party lines. Whatever happened with @Dchautala ji is hooliganism of investigation agencies.
When such a person, who remained part of bjp government as an ally,being Deputy Chief Minister, is treated like this hooliganism so we can see what is happening around in entire state.
State is bound to act in transparent manner.
@NayabSainiBJP
56th NSUI Foundation Day - a journey of student power, struggle and unwavering commitment.
From raising voices on campuses to shaping national discourse, NSUI continues to stand at the forefront of democracy, justice and students’ rights.
On this Foundation Day, we celebrate our legacy and renew our resolve to keep fighting for a stronger, inclusive and student-led future.
I did not witness colonial rule, but history tells us that in those times arrest was often used as a tool of control rather than a consequence of investigation. Disturbingly, in present times, from what I observe in my day-to-day court practice, there appears a similar trend emerging,where arrest precedes investigation, and incarceration becomes a means to fish for evidence rather than a response to it.
What I have learnt,that law is clear: arrest is not meant to be a tool for conducting investigation. It is a last resort.The Supreme Court in Arnesh Kumar v. State of Bihar categorically held that arrest should not be automatic and acknowledged the “battle between the police and the lawmakers,” cautioning against misuse of arrest powers.Yet, despite these binding directions, arrests are often made first, and investigation follows later.
Take for instance the widely publicized “Cash for Job” matter in Haryana. I had the opportunity to secure discharge for one of the accused. The court found no sufficient material to proceed. But who restores the lost months of incarceration? Who compensates the damage to reputation? Who accounts for the social stigma? Discharge may vindicate legally,but it does not rewind time. There are other instances and precedents with me,this is one of that.
Similarly, in cases involving political leaders such as @ArvindKejriwal and @msisodia, arrest became the focal point of the process, while investigation seemed to follow rather than precede it. Ultimately, when courts grant relief or discharge, the larger question remains: was arrest truly necessary?
Even our leaders like @UdayBhanuIYC and other IYC members have faced arrest during peaceful protests. Arrest for investigation cannot become a norm; otherwise, the exception swallows the rule.
To be clear: courts are not extended arms of investigating agencies. However, when bail is denied mechanically, without strict scrutiny of the necessity of custody, it creates a perception that the process itself is being used as punishment.
There are courts that courageously uphold the majesty of law and protect personal liberty. But there is also an unsettling perception that some courts hesitate when powerful agencies are involved,as if upholding liberty might invite institutional discomfort.The Constitution envisions courts as guardians of liberty, not as silent spectators to executive overreach.
I get an opportunity to appear before number of courts dealing with criminal cases, I being representing in such cases, but when those cases are being tried in media,and named as "media trial" then most of the courts refrain themselves to give any relief,but there are courts who just go with the book and law,and ultimately upholds the majesty of law.
Arrest is not punishment.
Custody is not investigation.
And liberty is not a concession,it is a constitutional guarantee.
The real test of judicial strength is not in routine cases, but when the might of the State stands on the other side.
@RahulGandhi@KapilSibal@rssurjewala@DrAMSinghvi@LiveLawIndia
हरियाणा में सड़क दुर्घटना के घायलों के इलाज की केंद्रीय योजना भी "भाजपाई धोखेबाजी" की भेंट चढ़ी !
➡️ दरअसल मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अक्टूबर-2024 में सड़क दुर्घटना के घायलों के निःशुल्क इलाज की योजना शुरू की थी !
➡️ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा भुगतान की जाने वाली इस योजना के तहत, घायलों को प्राइवेट अस्पतालों में 7 दिन तक 1.5 लाख रुपए का नि:शुल्क इलाज निर्धारित है !
📍मगर हरियाणा में भाजपा की "जानलेवा ठगी" ने इस योजना को भी ठिकाने लगा दिया और सड़क हादसे के घायलों को उनके हाल पर छोड़ दिया !
📍इस योजना के तहत 14 महीने में कुल 4,654 लोगों ने फ्री इलाज के लिए आवेदन किया.. मगर 3,739 मामलों की पुलिस वेरिफिकेशन के बाद भी मात्र 300 घायलों को ही इलाज़ का पैसा मिला !
📍इनमें से 1400 मरीजों को तो सरकारी अस्पताल भेज दिया गया, बाकी सभी मरीजों को इलाज का पैसा खुद चुकाना पड़ा और अब तो 3 महीने से योजना का टीएमएस पोर्टल ही ठप है !
📍हकीकत यही है कि हरियाणा में सड़क हादसे के ज्यादातर घायलों को सरकारी अस्पतालों में ही भर्ती लिया गया और जो प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हुए उन्हें इलाज का पैसा खुद भरना पड़ा !
मतलब साफ है- भले ही लोगों की ज़िंदगी का ही सवाल क्यों न हो, भाजपाई सरकार की ठगी के डबल ईंजन की हर योजना सिर्फ खोखले प्रचार, झूठ की भरमार और धोखे की मार है !