दौसा जिले में राजावास स्थित स्टार किड्स एकेडमी में शिक्षकों द्वारा बच्चों को किताब की जगह कांवड़ पकड़ा देना बेहद चिंताजनक है। स्कूल बच्चों को शिक्षा, तर्क और वैज्ञानिक सोच सिखाने की जगह धार्मिक गतिविधियों में क्यों धकेल रहा है? क्या फीस लेकर पढ़ाने वाले स्कूलों का काम बच्चों को धार्मिक आयोजनों के लिए तैयार करना है? बच्चों के हाथ में किताब होनी चाहिए, कांवड़ नहीं। शिक्षा के मंदिर को धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बनाना बंद होना चाहिए।
क्या SC/ST/OBC का हक मारा जा रहा है? इस वीडियो में आंकड़ों के जरिए एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। जानिए कौन वाकई में किसका हक खा रहा है और आरक्षण का असली सच क्या है। देखें पूरी रिपोर्ट।
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ये कोई झरना नहीं, झालावाड़ के सरकारी स्कूल की तस्वीर है। सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के दावे करती है, लेकिन स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं और जल निकासी तक नहीं है। यह शिक्षा व्यवस्था की बदहाली नहीं तो और क्या है?
ये नैरेटिव बनाया जाता है कि चीन में अपने नागरिकों का दमन होता है। ये आँकड़े देखिए—2002 में चीन से बाहर पढ़ने जाने वाले केवल 13% छात्र ही चीन वापस लौटते थे। 2025 में 94% छात्र बाहर पढ़कर चीन वापस लौटे।
जब लोगों को अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ और रोजगार के अवसर मिलते हैं, तो लोग अपने देश वापस लौटते हैं।
2002 — 13%
2005 — 27%
2010 — 49%
2015 — 77%
2019 — 83%
2025 — 94%
बाकी, ये सोचने वाली बात है कि भारत कहने के लिए लोकतंत्र है, लेकिन जिनके पास अच्छी नौकरी और पैसा है, वे भी देश छोड़ना चाहते हैं।
अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी गांवों में, लोग जब भी अपना फोन चालू करते हैं, तो उन्हें एक चीनी मोबाइल नेटवर्क से मैसेज मिलता है।
इसकी जांच हो. क्या ये आरोप सही है? यह सिर्फ नेटवर्क का मामला नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा लीक का बड़ा खतरा है!
देश के सीमावर्ती नागरिकों की लोकेशन, कॉल और पर्सनल डेटा सीधे चीनी सर्वर तक पहुँचने का जोखिम है।
56 इंच की बात करने वाली सरकार का आईटी मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय आख़िर इस गंभीर डिजिटल घुसपैठ पर खामोश क्यों हैं?
भारत सरकार को ऐसे गंभीर सवालों पर तत्काल जवाब देकर नागरिकों की शंका का समाधान करना चाहिए.
भाजपा/आरएसएस से जुड़े लोग छात्र आंदोलन को हिंसक बनाने का प्रयास कर रहे हैं। छात्र आंदोलन का नेतृत्व इसे समझ रहा है और झारखंड सरकार से आग्रह कर रहा है कि इनकी पहचान कर कार्रवाई की जाए।
बैंगलोर में आज फ़ूड सेफ़्टी डिपार्टमेंट सुबह सुबह जाग गया,
और बड़े बड़े रेस्टोरेंट्स में रेड मार के ख़राब चिकन, मटर, एक्सपायरी दूध दही सीज करके होटल मालिकों का लाखों का नुक़सान कर दिया।
एमसी त्रिपाठी: पटना हाईकोर्ट,
अश्विनी मिश्रा: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट,
आरवी घुघे: कलकत्ता हाईकोर्ट,
वी कमेश्वर राव: पटना हाईकोर्ट।
सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने चार हाईकोर्ट के मुख्य चीफ जस्टिस के लिए इन नामों की सिफारिश की है। लेकिन बड़ा सवाल है कि इन नियुक्तियों में सामाजिक विविधता और प्रतिनिधित्व को कितना महत्व दिया गया? कॉलेजियम को इस पर पारदर्शी जवाब देना चाहिए। SC, ST और OBC को न्यायपालिका में उचित भागीदारी मिले, यह लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है। अगर उच्च न्यायपालिका एवं न्यायिक नियुक्तियों में ही इन वर्गों की अवहेलना होगी तो फिर बहुजन समाज न्याय एवं निष्पक्षता की उम्मीद कैसे करे?
ममता जी के ऊपर जानलेवा हमला हो रहा है।
BJP शासित राज्य में अगर असामाजिक तत्त्वों द्वारा हिंसा की जा रही है और इस पर देश के गृह मंत्री चुप हैं इसका सीधा अर्थ है कि वो इसके मौन समर्थन में हैं।
जो भी भाजपा करवा रही है ,बस गिनती याद रखे।
यदि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ कम की जाती है, तो इससे कार्यकुशलता (efficiency) प्रभावित होती है, लेकिन यदि सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ कम की जाती है, तो इससे कार्यकुशलता प्रभावित नहीं होती।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस बात का विस्तृत विश्लेषण किया था कि मेडिकल कॉलेजों में कट-ऑफ क्यों कम की जा रही है।
इसका मुख्य कारण यह है कि कट-ऑफ इसलिए घटाई जाती है ताकि सीटों की बिक्री की जा सके। आपके अंक जितने कम होंगे, मेडिकल कॉलेजों द्वारा उतनी ही अधिक फीस मांगी जाती है।
हर साल, एक कृत्रिम रिक्ति (artificial vacancy) पैदा की जाती है और फिर कट-ऑफ घटा दी जाती है ताकि निजी कॉलेजों को इसका फायदा मिल सके।
अब, जब हम यह देखते हैं कि इससे किसे फायदा हुआ, तो हम देख सकते हैं कि 4,267 से अधिक सामान्य वर्ग के छात्रों को कम कट-ऑफ से लाभ मिला और उनमें से कई को क्लिनिकल शाखाएं (clinical branches) मिलीं। उनमें से कई ने शून्य (zero) अंक प्राप्त किए थे।
यहां तक कि ओबीसी श्रेणी में भी लगभग 2,000 छात्रों को लाभ मिला, जिनमें न्यूनतम अंक 5 थे।
अब एससी/एसटी का सापेक्ष अनुपात बहुत कम था और संयोग से कई एससी/एसटी उम्मीदवारों को घटी हुई कट-ऑफ का लाभ नहीं मिलता, क्योंकि ये सभी सीटें भारी कीमत पर बेची जाती हैं जिन्हें वे वहन नहीं कर सकते।
अब, कट-ऑफ में यह कटौती सरकारी कॉलेजों के बजाय निजी कॉलेजों को लाभ पहुंचाने के लिए की जाती है। यदि आप 515+ अंक प्राप्त करते हैं, तो आपको 45 लाख रुपये में सीट मिल सकती है, लेकिन यदि आप 213+ अंक प्राप्त करते हैं (केवल क्वालिफाइड), तब भी आपको 1 करोड़ रुपये में सीट मिल सकती है।
यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि चिकित्सा शिक्षा के साथ मुख्य समस्या इसका तीव्र निजीकरण और सीमित सीटें हैं, जो कॉलेजों को मनमाफिक फीस वसूलने में सक्षम बना रही हैं।
इसका एकमात्र समाधान यह है कि इन पेमेंट सीटों पर प्रतिबंध लगाया जाए। सरकारी सीटों को तीन गुना किया जाना चाहिए और मेडिकल क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को कम किया जाना चाहिए।
साथ ही, हर 1 सीट के लिए 12 छात्रों को क्वालिफाई करने की इस अवधारणा को भी समाप्त किया जाना चाहिए।
Young SC/ST in Government Jobs decreasing at an alarming pace.
Share of Young SC/ST in Public Administration(Government jobs) decreased from 25% to 14%.
Additionally the Young SC/ST is not going into caste based traditional industries like Leather industry.
This shows that one of the major pain points for the Young SC/ST is shrinking government opportunities and increasing outsourcing of jobs leading to decline in stable public administration jobs.
Now when the government jobs for Young SC/ST come down, how can we say that creamy layer is taking away those jobs. The job access problem is because of scarcity of jobs not because of creamy layer.
It is high time government fill up SC/ST vacancies and increase recruitment of Group C/D jobs all over India at a mammooth scale to ensure that Young SC/ST who want to join government jobs are given a chance to come up in life.
( Source: State of Working India 2026 by Azim Premji university )
पत्नी प्रेग्नेंट है, घर जाना जरूरी है… लाइन में पहला नंबर था, काउंटर पर बैठी महिला ने ₹500 लेकर किसी ओर को दे दी टिकट।
रेलवे के तत्काल टिकट काउंटर पर एक आदमी दो दिन से टिकट के लिए परेशान था। गर्भवती पत्नी घर पर इंतजार कर रही थी। लाइन में सबसे पहले था।
आरोप है कि काउंटर पर बैठी महिला कर्मचारी कुछ लोगों से 500-500 रुपये लेकर उनका नंबर पहले कर टिकट दे रही थी।
जब आदमी ने विरोध किया तो बहस हो गई। बदतमीजी की गई, फोन छीनने की कोशिश हुई और धमकी भी दी गई कि अंदर करवा दूंगी। OTP गलत होने का बहाना भी बनाया गया।
बधाई हो, कॉलेजियम हुआ है। 🎉
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए जस्टिस MC Tripathi का सिफारिश किया है।
न्यायिक नियुक्तियों में जब तक SC, ST, OBC की भागीदारी नहीं होती है, तब तक अन्याय जारी रहेगा।
कॉलेजियम देश की न्याय व्यवस्था के लिए एक कलंक है।