वाह रे बहुरूपिये - अब "संघम शरणम् गच्छामि"
सावधान और होशियार - कुपात्र लोगों के मुंह से वसुधैवकुटुंबकम की परिकल्पना को साकार करने वाले संघ(राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के बारे में व्याख्यान करना मतलब दाल कुछ नहीं बल्कि पूरी काली है।
#domesticviolence@DrMohanBhagwat