@Jatav_ravi563 उस समय थर्ड डिवीजन भी बड़ी बात थी आज की तरह नंबर लुटाए नहीं जाते थे । 10th fail को भी लोग डिग्री की तरह बोलते थे शादी के लिए 10 फेल लड़के की भी अच्छी मांग थी। गांधी जी भी थर्ड डिविजन पास थे। बाबा साहब विद्वान थे इसमें कोई शक नहीं है % कुछ भी रहा हो कोई फर्क नहीं पड़ता।
@AshwiniUpadhyay@PMOIndia@narendramodi 2014 के बाद ज्यादा ही परेशान है। कानून नही मंशा की जरूरत है जिस दिन सरकार में बैठे लोग चाहेंगे कि कल से भ्रष्टाचार बिल्कुल नहीं होगा तो नहीं ही होगा
पर वे ऐसा करेंगे नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के नए नए तरीके खोजे जा रहे है। अकेली सड़क के साथ साथ भ्रष्टाचार भी चौड़ा हो गया है।
@grtbabamanish बिल्कुल सही बात इसका मतलब यही है कि जातिवाद कागजों के सहारे खत्म नहीं हो सकता। क्योंकि कागजों के सहारे केवल आरक्षण मिल सकता है जाति खत्म की दवा अलग है।
@dromsudhaa जहां की खबर लिख रहे हो वहां ब्राह्मण तो वहां अब हांसिए पर है 85% आरक्षण है लेकिन वो 85% ही आपस में भेद भाव करते है। इससे सिद्ध होता है आरक्षण आपका आर्थिक स्तर सुधार सकता है पर जातिगत भेद भाव नहीं। इसी लिए आरक्षण का आधार जाति के साथ आर्थिक भी होना चाहिए। हर स्तर पर क्रीमी लेयर।
@nitinmeshram_ निजी दुश्मनी रखना भी नहीं चाहिए क्योंकि दोस्त दिलीप मंडल की तरह सेट होने की आशा तो बनी ही रहती है। मतभेद का क्या सही ऑफर मिलते ही मतभेद दूर हो जाते है। बाकी BSP की सरकार बनवाता सकती थी पर आजाद समाज पार्टी को इसी को रोकने के लिए बनाए गया है।
@HansrajMeena EWS किसी ने नहीं मांगा बहन मायावती जी सहित लगभग सभी नेताओं ने ews का समर्थन किया था। EWS के वर्गीकरण में भी किसी को परेशानी नहीं है। कुछ फर्जी जमींदार लोग अपने आरक्षण को बचाने के लिए इस का रोना रोते रहते है।
@nitinmeshram_ कोई चीज स्थाई नहीं होती 80 साल में बहुत सी चीजें बदली है तो आरक्षण गरीब के लिए क्यों नहीं हो सकता। सीधी बात कहो कि अपने ही गरीब भाइयों को आरक्षण से वंचित रखना चाहते हो और उन्हीं की फोटो दिखा कर आरक्षण की पैरवी भी करते रहो।